
दिल्ली के मौसम में लगातार बढ़ती अनिश्चितता और अचानक बदलते हालात पर पूर्व IMD निदेशक आनंद शर्मा ने विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि मई और प्री-मानसून का मौसम हमेशा से तेजी से बदलने वाला रहा है, लेकिन अब अर्बन हीट आइलैंड और क्लाइमेट चेंज के असर भी साफ दिखाई देने लगे हैं.
उन्होंने बताया कि दिल्ली में गर्मी के मौसम के दौरान दोपहर के समय तापमान तेजी से बढ़ता है. अगर उसी दौरान वातावरण में नमी आ जाए तो थंडरस्टॉर्म और तेज बारिश जैसी स्थितियां बन जाती हैं. वहीं, केवल तेज गर्मी होने पर कन्वेक्शनल करंट्स विकसित होते हैं, जिनसे डस्ट स्टॉर्म पैदा हो सकते हैं.
आनंद शर्मा के मुताबिक, हर साल मौसम का पैटर्न एक जैसा नहीं होता. कुछ सालों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है, जबकि कुछ सालों में धूल भरी आंधियां और थंडरस्टॉर्म अधिक देखने को मिलते हैं. उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के विस्तार ने भी मौसम को प्रभावित किया है.
उन्होंने 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव को समझाते हुए कहा कि शहर के कुछ हिस्सों में तापमान आसपास के इलाकों की तुलना में 2-3 डिग्री ज्यादा हो सकता है. इसकी वजह कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें, कम हरियाली और अधिक वाहन हैं. ये सतहें सूरज की गर्मी को सोख लेती हैं और बाद में उसे छोड़ती हैं, जिससे दिन और रात दोनों समय तापमान अधिक बना रहता है.

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पूर्व IMD निदेशक ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली का तापमान सामान्य सीमा के आसपास ही है, लेकिन अगर अचानक नमी आ जाए और थंडरस्टॉर्म बन जाए तो तापमान कुछ ही मिनटों में 24-25 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है.
क्लाइमेट चेंज पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 100 सालों में पृथ्वी का तापमान लगभग 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है. इसका असर एक्सट्रीम वेदर घटनाओं पर भी दिखने लगा है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि हर मौसमीय बदलाव को सीधे क्लाइमेट चेंज से जोड़ना सही नहीं होगा. कई बदलाव प्राकृतिक जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण भी होते हैं.

उन्होंने कहा कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी तरह जारी रहा और शहरों में कंक्रीट का विस्तार बढ़ता गया तो भविष्य में हीट वेव, तेज आंधी, भारी बारिश और बिजली गिरने जैसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ सकती है.
बिजली गिरने की घटनाओं पर उन्होंने कहा कि पहले भी बिजली गिरती थी, लेकिन अब रिपोर्टिंग ज्यादा बेहतर और तेज हो गई है. साथ ही, अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव और स्थानीय मौसमीय बदलावों के कारण कुछ इलाकों में लाइटनिंग गतिविधियों की तीव्रता बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.