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Water Crisis in Delhi: गर्मियों में क्यों सूख जाता है दिल्ली का गला, राजधानी क्यों मांगने लगती है पानी!

राजधानी दिल्ली का गला एक बार फिर सूख रहा है. दिल्ली के कई इलाकों में कई दिनों से पानी का संकट बना हुआ है. सोशल मीडिया पर लोग दावे कर रहे हैं कि 4-5 दिन से उनके यहां पानी नहीं आया है. लेकिन दिल्ली में हर साल पानी का संकट आने का कारण क्या है? जानें इस रिपोर्ट में...

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दिल्ली के कई इलाकों में पानी का संकट बढ़ गया है. (फाइल फोटो-PTI) दिल्ली के कई इलाकों में पानी का संकट बढ़ गया है. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पानी के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है दिल्ली
  • जरूरत का ज्यादातर पानी हरियाणा से आता है
  • दिल्ली को जितनी जरूरत, उससे कम सप्लाई

दिल्ली का वसंत कुंज. यहां के दलित एकता कैम्प में अप्रैल के आखिर में एक महिला की हत्या हो गई. इस हत्या की वजह पानी था. श्याम कला नाम की महिला रोज सुबह पानी भरने जाती थी. 26 अप्रैल की सुबह 6 बजे इसे लेकर उसका पड़ोसी से झगड़ा हो गया. झगड़ा इतना बढ़ा कि पड़ोसी अर्जुन ने चाकू से उसका गला रेत दिया. श्याम कला का पति उसे बचाने आया तो उसका भी हाथ काट दिया. 

ये घटना बताती है कि दिल्ली में पानी को लेकर कितनी मारामारी है. दिल्ली में हर साल गर्मियों के मौसम में और मॉनसून आने से पहले पानी की किल्लत शुरू हो जाती है. छोटे-छोटे इलाकों में पानी भरने को लेकर झगड़े होते रहते हैं.

हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली में पानी का संकट खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर लोग शिकायत कर रहे हैं कि उनके यहां 4-5 दिन से पानी नहीं आ रहा. अगर किसी इलाके में टैंकर पहुंच भी रहा है तो उसमें इतने पाइप डाल दिए जाते हैं कि थोड़ी ही देर में टैंकर खाली हो जाता है.

लेकिन दिल्ली में पानी का संकट आम बात क्यों होती जा रही है? ये समझने से पहले वहां की जियोग्राफी समझना जरूरी है. दिल्ली एक लैंडलॉक स्टेट है, यानी चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ. दिल्ली का अपना कोई पानी का बहुत बड़ा जरिया नहीं है. दिल्ली को पानी के लिए उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा पर निर्भर होना पड़ता है. इसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा हरियाणा का है. 

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मॉनसून से पहले हर साल दिल्ली का गला सूखने लगता है. (फाइल फोटो-PTI)

लेकिन हरियाणा क्यों?

दिल्ली को अपनी जरूरत का ज्यादातर पानी यमुना से मिलता है. यमुना के पानी को लेकर दिल्ली और हरियाणा के बीच अक्सर विवाद बना रहता है. 

यमुना नदी हिमालय के यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है और गंगा में मिलने से पहले हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली से होकर गुजरती है. 

1994 में दिल्ली और हरियाणा समेत इन यमुना बेसिन राज्यों में पानी के बंटवारे को लेकर एक समझौता हुआ था. पानी के बंटवारे का काम सही हो, इसके लिए 1995 में केंद्र सरकार ने यमुना रिवर बोर्ड का गठन किया था. 

हालांकि, यमुना के पानी को बंटवारे को लेकर दिल्ली और हरियाणा में अक्सर विवाद बना रहता है, खासकर गर्मियों के मौसम में. दिल्ली अक्सर हरियाणा पर कम पानी छोड़ने का आरोप लगाती रहती है.

मौजूदा संकट में भी दिल्ली ने हरियाणा पर पानी न देने का आरोप लगाया है. दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष और आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में पानी का गंभीर संकट है. ऐसे समय में दिल्ली वालों की प्यास बुझाने के लिए हरियाणा को पानी उपलब्ध कराना चाहिए, क्योंकि राजधानी इसकी हकदार है.

इलाकों में टैंकर पहुंचता है तो कुछ ही देर में खाली हो जाता है. (फाइल फोटो-PTI)

दिल्ली को कहां-कहां से मिलता है पानी?

दिल्ली को हरियाणा सरकार यमुना नदी से, उत्तर प्रदेश सरकार गंगा नदी से और पंजाब सरकार भाखरा नांगल से पानी सप्लाई करती है.

दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वे के मुताबिक, राज्य में 2.30 करोड़ आबादी को हर दिन 1,380 मिलियन गैलन पानी की जरूरत है, जबकि दिल्ली की पानी की सप्लाई 953 मिलियन गैलन प्रति दिन की है. गौरतलब है कि एक गैलन में 4.5 लीटर पानी होता है. 

दिल्ली को हर दिन यमुना से 389 मिलियन गैलन, गंगा से 253 मिलियन गैलन और भाखरा से रवि-ब्यास नदी का 221 मिलियन गैलन पानी मिलता है. इसके अलावा दिल्ली को कुंए, ट्यूबवेल और ग्राउंड वॉटर से 90 मिलियन गैलन पानी मिलता है. 

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बर्तनों को हाथ में लिए पानी के इंतजार में खड़े रहते हैं लोग. (फाइल फोटो-PTI)

इसी कारण बढ़ जाता है पानी का संकट

दिल्ली की जितनी जरूरत है, उतनी आपूर्ति नहीं होती है. इस वजह से दिल्ली में हर साल पानी का संकट खड़ा हो जाता है. इसके अलावा बढ़ती गर्मी इस संकट को और बढ़ा देती है.

जितनी मांग, उतनी सप्लाई नहीं, ये तो एक वजह है ही. इसके अलावा यमुना नदी भी लगातार सूखती जा रही है. सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार पानी नहीं छोड़ रही है, इसलिए दिल्ली में यमुना नदी सूखती जा रही है.

भारद्वाज के मुताबिक, वजीराबाद तालाब में 674.5 फीट पानी होना चाहिए, लेकिन 667.60 फीट पानी ही है. यानी, इसका जलस्तर करीब 7 फीट कम हो गया है. उन्होंने बताया कि यमुना में करीब 8 फीट पानी होता है. लिहाजा अब यमुना की गहराई करीब 6 इंच से लेकर 1 फीट तक ही बची है. 

दिल्ली सरकार हरियाणा पर पानी न देने का आरोप लगा रही है. लेकिन हरियाणा का कहना है कि उसने 2015 में हर दिन 84,000 मिलियन गैलन, 2016 में 88,000 मिलियन गैलन, 2017 में 88,500 मिलियन गैलन, 2018 में 88,000 मिलियन गैलन, 2019 में 89,500 मिलियन गैलन, 2020 में 92,000 मिलियन गैलन और 2021 में 92,500 मिलियन गैलन पानी दिया है. इस साल 85,500 मिलियन गैलन पानी हर दिन दिया जा रहा है.

आने वाले सालों में दिल्ली में और बुरा पानी का संकट गहराने की आशंका है. (फाइल फोटो-PTI)

दिल्ली में कैसे खत्म होगा पानी का संकट?

दिल्ली में पानी का संकट खत्म करने की बात अक्सर होती है. चुनावों में ये मुद्दा भी बनता है, लेकिन इस पर अभी तक कोई ठोस काम नहीं हो सका है. दिल्ली सरकार के 2041 के ड्राफ्ट मास्टर प्लान में अनुमान लगाया गया है कि 2041 तक दिल्ली में हर दिन 1,455 मिलियन गैलन पानी की जरूरत होगी. 

इस मास्टर प्लान के मुताबिक, दिल्ली में अभी हर दिन हर व्यक्ति को 227 लीटर पानी की जरूरत होती है. इस जरूरत को 2041 तक घटाकर 189 लीटर प्रति दिन पर लेकर आने का टारगेट रखा गया है. बाद में इसे 151 लीटर प्रति दिन पर लाया जाएगा.

दिल्ली को पानी के संकट से उबारने के लिए एक हजार एकड़ में छोटे-छोटे तालाब और गड्ढे बनाए जा रहे हैं. इन गड्ढों और तालाबों में मॉनसून के समय पानी भरेगा, जिससे ग्राउंड वॉटर बढ़ने की उम्मीद है.

 

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