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दिल्ली-NCR में 2 घंटे की बारिश ने खोली पोल, ऊंची इमारतें गिरने का सता रहा है डर!

दिल्ली एनसीआर में तेज बारिश से एक तरफ जहां मौसम को सुहावना हो गया है, वहीं शहरों में कई जगह पानी-पानी हो गया है. जलभराव की वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

पार्किंग में भरा पानी पार्किंग में भरा पानी

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बनी हाई राइज़ सोसायटीज़ गुरुवार को हुई भारी बारिश में पानी पानी हो गईं. नोएडा की अधिकतर ऊंची इमारतों वाली सोसाइटीज़ के बेसमेंट मानो स्विमिंग पूल हो गए हैं. पानी के इस जमाव ने घटिया कंस्ट्रक्शन की पोल खोलकर रख दी है.

लोगों में चिंता इस बात को लेकर भी है कि इस तरह पानी का रिसाव ऊंची इमारतों के स्ट्रक्चर को कमजोर कर देगा. शाहबेरी हादसे के बाद घबराए लोगों में इससे अपनी सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है. गाजियाबाद से लेकर ग्रेटर नोएडा तक हाल के दिनों में कई इमारतें ज़मीदोंज हो चुकी हैं. कई की बाउंड्री वॉल इस बारिश में टिक नहीं पाई. हाल ही के दिनों में नई बनी इमारतें इस जलभराव और लगातार सीलन से पुरानी नजर आने लगी हैं.

ऊंची इमारतों में रहने वालों को इस बारिश ने ऐसा डरा दिया कि मानो वो किसी टाइम बॉम्ब पर बैठे हुए हैं. इतने हादसों के बाद ये सवाल खड़े होने लगे हैं कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी जैसी सरकारी एजेंसियां किस आधार पर बिल्डिंग को रहने के लिए सुरक्षित घोषित करते हैं. सड़कों पर जलभराव तो आम बात है लेकिन अब तो सोसायटी में बेसमेंट और घरों तक पानी भरने की शिकायतें आम हो गई हैं.

गुरुवार सुबह 2 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश में क्या गाज़ियाबाद क्या नोएडा और क्या ग्रेटर नोएडा की सोसायटीज़ सब जलमग्न हो गया. नोएडा के सेक्टर 45 में बनी आम्रपाली सफायर, सेक्टर 46 में गार्डेनिया ग्लोरी से लेकर सेक्टर 76 में आम्रपाली सिलिकॉन सिटी, सेठी मैक्स रॉयल, सेक्टर 77 में प्रतीक विस्टेरिया, सेक्टर 78 में महागुन माडर्ने के बेसमेंट में पानी की नदियां बहती नजर आईं. सेक्टर 119 में आम्रपाली प्लेटिनम का हाल भी कुछ ऐसा ही है. उधर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सुपरटेक इको विलेज 1 के बेसमेंट में तो कारें आधी से ज्यादा डूब गई हैं.

कई सोसायटीज़ के व्हाट्सएप ग्रुप में लोग मजाक में कार तक जाने के लिए नाव का इंत़जाम करने की बात कहते नजर आए तो किसी ने ई-रिक्शा को एक दिन के लिए रखने का सुझाव दिया. जिससे अपनी कार तक पहुंच जा सके. कुछ लोगों का कहना है कि आज बचपन याद आ गया जब नदी पार करके स्कूल या बाज़ार जाया करते थे. कंक्रीट का जंगल बन चुके नोएडा-ग्रेटर नोएडा में विकास तो खूब हुआ लेकिन पानी की निकासी या दूसरी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का सबूत ये जलभराव है. ना तो इस पर किसी बिल्डर ने घर बनाते वक्त ध्यान दिया और ना ही अथॉरिटी ने नियमों का पालन करवाया. उम्मीद है कि गुरुवार की बारिश से सबक लेते हुए सभी जिम्मेदार पक्ष ऐसी स्थिति दोबारा ना आने से बचने के लिए कुछ ठोस योजना बनाएंगे.

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