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तुर्कमान गेट हिंसा मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द की आरोपी मोहम्मद उबेदुल्ला की जमानत

हाईकोर्ट ने 20 जनवरी को सत्र अदालत द्वारा दी गई जमानत को पर्याप्त कारणों के अभाव में रद्द करते हुए मामला दोबारा विचार के लिए सत्र अदालत को वापस भेज दिया. हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जमानत के समर्थन में पेश किए गए दस्तावेजों का संतोषजनक सत्यापन नहीं किया गया.

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मामला 6-7 जनवरी की दरम्यानी रात का है, जब मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी. (File Photo- PTI)
मामला 6-7 जनवरी की दरम्यानी रात का है, जब मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी. (File Photo- PTI)

दिल्ली हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान भड़की हिंसा के मामले में आरोपी मोहम्मद उबेदुल्ला को दी गई जमानत को रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि निचली अदालत का जमानत आदेश संक्षिप्त, अस्पष्ट और बिना ठोस कारणों के पारित किया गया था, जो कानूनन टिकाऊ नहीं है.

न्यायमूर्ति प्रतीक जलान ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत आमतौर पर किसी व्यक्ति को मिली स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने से बेहद सतर्क रहती है, लेकिन यह मामला असाधारण है, जिसमें जमानत एक क्रिप्टिक और बिना तर्क के आदेश के जरिए दी गई थी.

निचली अदालत का आदेश निरस्त

हाईकोर्ट ने 20 जनवरी को सत्र अदालत द्वारा दी गई जमानत को पर्याप्त कारणों के अभाव में रद्द करते हुए मामला दोबारा विचार के लिए सत्र अदालत को वापस भेज दिया. अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी की जमानत याचिका पर नए सिरे से सुनवाई की जाए. कोर्ट ने कहा कि जमानत आदेश में अभियोजन पक्ष की दलीलों पर समुचित विचार नहीं किया गया और न ही जमानत से जुड़े कानूनी मानकों का कोई प्राथमिक या संक्षिप्त विश्लेषण किया गया.

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दस्तावेजों के सत्यापन पर भी सवाल

हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जमानत के समर्थन में पेश किए गए दस्तावेजों का संतोषजनक सत्यापन नहीं किया गया. अदालत के मुताबिक, दस्तावेजों में इतनी कमियां थीं कि उनके आधार पर तथ्यों का सही आकलन कर जमानत देना संभव नहीं था.

अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए सीसीटीवी फुटेज और सह-आरोपी के खुलासे का हवाला दिया. अभियोजन का दावा है कि मोहम्मद उबेदुल्ला उन लोगों में शामिल था, जिन्होंने पुलिस और एमसीडी कर्मचारियों को रोकने की कोशिश की, पत्थरबाजी की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

वहीं, आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उसके खिलाफ मामला पूरी तरह से फिशिंग एक्सपीडिशन है और उसे झूठा फंसाया गया है.

कैसे भड़की थी हिंसा

यह मामला 6 और 7 जनवरी की दरम्यानी रात का है, जब रमलीला मैदान क्षेत्र में स्थित मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी. पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को तोड़ा जा रहा है, जिसके बाद 150 से 200 लोग मौके पर जमा हो गए. भीड़ ने पुलिस और नगर निगम कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिसमें छह पुलिसकर्मी, जिनमें क्षेत्र के एसएचओ भी शामिल हैं, घायल हो गए.

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