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डिजिटल अरेस्ट थे बुजुर्ग दंपति… थाने पहुंचे तो वीडियो कॉल पर थे, ठगों ने दिल्ली पुलिस के SHO को भी धमका दिया

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले संयुक्त राष्ट्र (UN) से रिटायर्ड डॉ. ओम तनेजा और डॉ. इंदिरा तनेजा को साइबर ठगों ने 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए गए. इस बीच जब पीड़ित दंपति नजदीकी थाने पहुंचे, तो साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल पर दिल्ली पुलिस के SHO को ही धमका दिया.

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बुजुर्ग दंपति ने बताई ठगी की पूरी कहानी. (Photo: Screengrab)
बुजुर्ग दंपति ने बताई ठगी की पूरी कहानी. (Photo: Screengrab)

अमेरिका से लौटकर दिल्ली में जिंदगी बिता रहा रहे बुजुर्ग दंपति को 15 दिन तक साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान 14 करोड़ 85 लाख रुपये उन्हें डरा-धमकाकर ट्रांसफर करा लिए गए. डॉक्टर दंपति UN में सर्विस कर चुके हैं, वे साल 2016 में दिल्ली आए थे. यहां ग्रेटर कैलाश में रहते हैं.

इस डिजिटल अरेस्ट केस में साइबर अपराधी फर्जी पुलिस वाले बने, इसी के साथ पहली बार वीडियो कॉल पर सुप्रीम कोर्ट और नकली जज भी दिखाई दिए. बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को इतना डराया गया कि जब वे असली पुलिस यानी दिल्ली पुलिस के SHO के पास पहुंचे तो साइबर ठगों ने एसएचओ को भी धमका दिया.

दरअसल, डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा तकरीबन 48 साल तक अमेरिका में रहकर UN में सर्विस की. रिटायर होने के बाद वापस हिंदुस्तान आ गए. साल 2015 से डॉक्टर दंपति चैरिटेबल सर्विस से जुड़ गए, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उनके साथ एक दिन ऐसी ठगी होगी कि साइबर ठग उनकी मेहनत की सारी कमाई लूट लेंगे.

यहां देखें Video

24 दिसंबर को दंपति के पास साइबर ठगों का फोन आया और ठगों ने फर्जी मुकदमों और अरेस्ट वारंट का डर दिखाया. इस पर डॉक्टर दंपति इतना डर गए कि वे जाल में फंसते चले गए. ठगों ने 24 दिसंबर से लेकर 10 जनवरी की सुबह तक डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा को वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट रखा. इसी दौरान आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए.

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इंदिरा तनेजा के द्वारा यह पैसा ट्रांसफर किया गया. डॉक्टर इंदिरा तनेजा के मुताबिक, साइबर ठगों ने कभी दो करोड़ रुपये तो कभी 2 करोड़ 10 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा. इसी तरह से अलग-अलग अमाउंट ट्रांसफर करवाया. इंदिरा तनेजा ने कहा कि ठगों ने उन्हें अरेस्ट वारंट और फर्जी मुकदमों के नाम पर डराया. उन्हें पीएमएलए और मनी लॉन्ड्रिंग कानून का भी हवाला देकर डराया. नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर डिजिटल अरेस्ट रखा.

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इंदिरा तनेजा के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट रहने के दौरान जब भी उन्हें कहीं बाहर जाना होता था या फिर किसी को कॉल करना होता था तो साइबर ठग उनके पति डॉक्टर ओम तनेजा के फोन पर वीडियो कॉल करके सब सुनते और देखते थे, ताकि उन्हें यह पता चल सके कि इस बारे में वह किसी को बता तो नहीं रही हैं.

डॉक्टर इंदिरा तनेजा जब पहली बार पैसे ट्रांसफर करने बैंक गईं तो मैनेजर ने भी उनसे पूछा कि इतनी बड़ी रकम वह क्यों ट्रांसफर कर रही हैं. इस पर इंदिरा ने बैंक मैनेजर को वही बताया जो साइबर ठगों ने उन्हें समझाकर भेजा था.

दरअसल, जब भी डॉक्टर इंदिरा तनेजा पैसा ट्रांसफर करने बैंक जाती थीं तो बैंक जाने से पहले साइबर ठग उन्हें झूठी कहानी बता देते थे. उन्हें कहा जाता था कि अगर कोई भी बैंक का स्टाफ आपसे यह पूछे कि इतना पैसा क्यों ट्रांसफर कर रही हैं तो आपको यही कहानी बतानी है और डॉक्टर इंदिरा ने भी ठीक वैसा ही किया, जैसा ठगों ने उन्हें बोला था.

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इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब 10 जनवरी की सुबह ठगों ने कहा कि आप अपने लोकल पुलिस स्टेशन चले जाएंगे, क्योंकि अब यह सारा पैसा आपको आरबीआई के द्वारा रिफंड किया जाएगा. लोकल पुलिस को इसकी जानकारी होगी.

जब डॉक्टर इंदिरा तनेजा पुलिस स्टेशन पहुंचीं, तब भी ठग वीडियो कॉल पर थे. उन्होंने थाने के SHO से भी ठगों की बात कराई. इंदिरा का कहना है कि ठगों ने थाने के पुलिसकर्मियों से बड़ी बदतमीजी से बात की. थाने पहुंचकर पता चला कि उनके साथ 14 करोड़ 85 लाख की ठगी हुई है. अब डॉक्टर दंपति सदमे में हैं. हालांकि दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जांच स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO को सौंप दी है.

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