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सावन के पहले सोमवार को मनोज तिवारी ने किया जलाभिषेक

सावन का महीना यूं तो भक्ति से भरा ही होता है. खास बात यह कि इस बार सावन की शुरुआत ही सोमवार को हुई है. इसे लेकर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है. नेतागण के लिए भी सावन का महीना भक्ति के साथ राजनीति के फूल खिलाने का होता है. इसलिए बहाना चाहे कोई भी हो, राजनीति के यह महारथी अपनी मौजूदगी दिखाने में पीछे नहीं रहते.

मनोज तिवारी मनोज तिवारी

सावन का महीना यूं तो भक्ति से भरा ही होता है. खास बात यह कि इस बार सावन की शुरुआत ही सोमवार को हुई है. इसे लेकर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है. नेतागण के लिए भी सावन का महीना भक्ति के साथ राजनीति के फूल खिलाने का होता है. इसलिए बहाना चाहे कोई भी हो, राजनीति के यह महारथी अपनी मौजूदगी दिखाने में पीछे नहीं रहते. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी भी सोमवार को भक्ति से पूरी तरह सराबोर थे. पार्टी पॉलिटिक्स के साथ उन्होंने भक्ती के सागर में भी खूब गोते लगाए.

रामकुटी मंदिर से की शुरूआत

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सावन के पहले सोमवार को दिल्ली भर के तमाम मंदिरों में गए और पूजा अर्चना की. सबसे पहले तिवारी नरेला इलाके के रामकुटी मंदिर पहुंचे. यहां सावन के पहले सोमवार को विशेष पूजन का आयोजन किया गया था. इसी पूजन में मनोज तिवारी के साथ स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता भी शरीक हुए. बता दें कि बाहरी दिल्ली का यह मंदिर काफी मशहूर है. सावन में पूरे महीने भर यहां भक्तों का मेला सा लगा रहता है.

पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में भी सावन का महोत्सव शिव मंदिर में देखते ही बन रहा था. पहले सोमवार को यहां सावन के भक्ति उत्सव की शुरुआत हवन से की गई. मनोज तिवारी इसी इलाके से सांसद हैं. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष यहां भी पहुंचे और हवन में खूब आहुतियां डालीं.

चांदनी चौक के गौरीशंकर मंदिर में भी सावन के पूरे महीने भक्तों का तांता लगा होता है. यहां दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. तिवारी ने यहां पहुंचकर शाम को भोलेनाथ का अभिषेक किया. वहीं शाम को दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी रोहिणी के विजय विहार भी पहुंचे. उन्होंने रोहिणी के सनातन धर्म मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की.

भक्ति में राजनीति कही नहीं

तिवारी के मुताबिक वो एक धार्मिक व्यक्ति हैं. साथ ही भोले के भक्त भी हैं. तिवारी ने कहा कि भक्ति में राजनीति कहीं नहीं है. बल्कि उनके लिए ये ईश्वर का शुक्रिया करने का एक मौका है. इसीलिए दिल्ली में जहां भी लोग बुलाते हैं. वो वहां जरूर जाते हैं. भगवान के दर्शनों के साथ जनता जनार्दन के दर्शन भी कर लेते हैं.

 

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