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जेटली से माफी मांगने पर BJP विधायक ने लगाए केजरीवाल के यू-टर्न पोस्‍टर

बता दें, ये पोसटर्स बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा की ओर से लगाए गए थे. इन पर लिखा था- 'Kejriwal Turn NOT ALLOWED.' ये तमाम पोस्‍टर उन साइन बोर्ड के नीचे लगे थे जिसपर लिखा था- U TURN NOT ALLOWED.   

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बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने जारी किया पोस्‍टर बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने जारी किया पोस्‍टर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार माफी मांगकर कोर्ट केस खत्म करने में जुटे हुए हैं. इसी कड़ी में केजरीवाल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी माफी मांगी है. इसके बाद मंगलवार को दिल्‍ली के अलग-अलग ट्रैफिक सिग्‍नल (यू टर्न) के नीचे पोस्‍टर लगे नजर आए. इन पोस्‍टर्स के माध्‍यम से केजरीवाल पर निशान साधा गया था.

पोस्‍टर में क्‍या लिखा है

बता दें, ये पोसटर्स बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा की ओर से लगाए गए थे. इन पर लिखा था- 'Kejriwal Turn NOT ALLOWED.' ये तमाम पोस्‍टर उन साइन बोर्ड के नीचे लगे थे जिसपर लिखा था- U TURN NOT ALLOWED.  

केजरीवाल की माफी दर माफी

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने सबसे पहले पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रिम सिंह मजीठिया से मांफी मांगी थी. इसके बाद से लगातार अपने खिलाफ चल रहे मानहानि के मुकदमों से निजात पाने के लिए केजरीवाल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल से भी माफी मांग चुके हैं. मजीठिया से मांफी के खिलाफ कई आप नेताओं ने भी केजरीवाल की आलोचना की थी.  

क्या ये हैं माफीनामे की असल वजह?

1. संगठन की चिंता

यह सीएम केजरीवाल की खास रणनीति हो सकती है. नेतृत्व ने फैसला लिया है कि सभी नेताओं पर चल रहे मानहानि के मुकदमों को जैसे-तैसे खत्म किया जाए. इसके लिए माफी भी मांगनी पड़े, तो भी वे तैयार हैं. मानहानि के मुकदमों की वजह से ‘आप’ नेता पार्टी के विस्तार पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. कई राज्यों में संगठन बढ़ाना है. अगले साल 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं.

2. खतरे में पार्टी का भविष्य

मानहानि के मामलों में पर्याप्त सबूत न पेश कर पाने की स्थिति में या तो भारी भरकम हर्जाना देना पड़ेगा या जेल जाना होगा. आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल को ही देश भर में चेहरा बनाया है और ऐसे में जब मानहानि केस की मुसीबत में खुद अरविंद केजरीवाल फंस जाएं तो लगातार टूट रही पार्टी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

3. फंड की कमी

एक सवाल यह भी उठता है कि क्या ‘आप’ को चंदा आना भी कम हो चुका है या पार्टी के पास मानहानि के मुकदमें लड़ने के लिए पर्याप्त रकम नहीं है. कोर्ट केस में वकील अपने मनमुताबिक फीस लेते हैं. तारीखों की वजह से समय के साथ पैसा भी नुकसान हो रहा है. जाहिर है 2019 के चुनाव प्रचार में धन की जरूरत होगी.

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