केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए वोडाफोन के एरिया सेल्स मैनेजर को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इस अधिकारी ने साइबर अपराधियों की मदद के लिए बड़ी संख्या में फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी कराए, जिनका इस्तेमाल देशभर में फिशिंग और ऑनलाइन ठगी के लिए किया गया.
गिरफ्तार आरोपी की पहचान बिनु विध्याधरन के रूप में हुई है, जो नई दिल्ली में वोडाफोन के एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर तैनात था. CBI के अनुसार, दिसंबर 2025 में दिल्ली एनसीआर और चंडीगढ़ से संचालित हो रहे एक साइबर क्रिमिनल गिरोह की जांच के दौरान उसका नाम सामने आया.
CBI जांच में खुला साइबर ठगी का नेटवर्क
CBI की जांच में पता चला है कि यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों को बल्क एसएमएस सेवाएं उपलब्ध कराता था. इन मैसेज के जरिए आम लोगों को फर्जी लोन, निवेश योजनाओं और अन्य आर्थिक फायदे का लालच देकर उनके बैंक और निजी विवरण हासिल किए जाते थे.
CBI Arrests Area Sales Manager of a Telecom Service Provider for Illegal Sale of SIM Cards used in Cyber Crimes pic.twitter.com/bca0UnwlD6
— Central Bureau of Investigation (India) (@CBIHeadquarters) January 8, 2026
CBI के मुताबिक, आरोपी अधिकारी ने दूरसंचार विभाग के नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब 21 हजार सिम कार्ड हासिल किए. इन सिम कार्ड का इस्तेमाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बल्क मैसेज भेजने के लिए किया गया. यही सिम कार्ड फिशिंग मैसेज भेजने में इस्तेमाल हुए, जो बाद में बड़े साइबर फ्रॉड का आधार बने.
21 हजार फर्जी सिम कार्ड जारी कराने का आरोप
जांच एजेंसी ने बताया कि बिनु विध्याधरन ने लॉर्ड महावीर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के नाम पर डमी लोगों को कर्मचारी दिखाकर उनके दस्तावेज KYC के लिए जमा किए. इनमें बेंगलुरु में रहने वाले एक ही परिवार के कई सदस्य भी शामिल थे, जिन्हें कागजों में कंपनी का कर्मचारी बताया गया.
CBI को आरोपी के पास से इन लोगों के आधार कार्ड की प्रतियां भी मिली हैं.। एजेंसी का कहना है कि इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी कराए गए और फिर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी के नेटवर्क में किया गया.
दिल्ली-NCR और चंडीगढ़ से संचालित हो रहा था गिरोह
CBI ने स्पष्ट किया कि फिशिंग किसी भी साइबर ठगी का पहला और अहम चरण होता है. इसके जरिए बड़े पैमाने पर मैसेज या कॉल भेजकर लोगों को झांसे में लिया जाता है. जैसे ही लोग लिंक पर क्लिक करते हैं या अपनी जानकारी साझा करते हैं, वे बड़े घोटालों का शिकार हो जाते हैं और उनकी गाढ़ी कमाई लुट जाती है.
पहले भी हो चुके हैं तीन आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में इससे पहले दिसंबर 2025 में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें एक टेलीकॉम कंपनी का चैनल पार्टनर भी शामिल है. सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. CBI ने बताया कि मामले की जांच जारी है और साइबर अपराध के इस पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं.