दिल्ली में यमुना किनारे होनेवाले आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम के लिए सेना ने दिल्ली सरकार के कहने पर पुल बनाया था. आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के विश्व सांस्कृतिक समारोह के लिए सेना की मदद से अस्थायी पुल बनाए जाने पर काफी विवाद हुआ था.
इंडिया टुडे को मिला है एक्सक्लूसिव पत्र
भी इस मुद्दे पर सवाल उठने के बाद इंडिया टुडे के पास एक्सक्लूसिव पत्र मिला है. दिल्ली सरकार में संस्कृति और जल विभाग के मंत्री कपिल मिश्रा ने देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को पत्र लिखकर पंटून पुल (तैरते रहने वाला पुल) बनाने के लिए सेना की मदद मांगी थी. उन्होंने समारोह के दौरान यातायात काबू में रखने के लिए यमुना पर अस्थायी पुल बनाने में मदद के लिए पत्र लिखा था.
मंत्री कपिल मिश्रा ने चिट्ठी पर दी सफाई
कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि मेरी चिट्ठी का गलत मतलब निकाला गया. सेना के जवान वहां पहले से एक पुल बना चुके थे. मैंने बस इतना कहा था कि यह नाकाफी है.
Some media frnds misinterpreting my letter. It says Army hs already constructed one bridge tht may not be sufficient
— Kapil Mishra (@KapilMishraAAP)
पहले भी मदद करती रही है सेना
विवादों के बीच पत्र के सामने आने से साफ हो गया है कि दिल्ली सरकार की ओर से मांग करने पर ही सेना को मदद के लिए भेजा गया था. इसके पहले भी निजी समारोहों के लिए करती रही है. आगरा में यमुना किनारे संगीतकार यान्नी के समारोह के दौरान भी सेना ने पुल बनाने में मदद की थी. राज्य सरकारों के कहने पर कुंभ मेला में सेना हमेशा मदद के लिए खड़ी रहती है.
विपक्ष का था हमलावर रुख
इसके पहले के लिए सेना की मदद पर विपक्ष ने हमलावर रुख अख्तियार कर लिया था. संसद में जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने इसपर सवाल पूछे थे. वहीं कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी इसके लिए सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने समारोह में जाने से राष्ट्रपति के मना करने को भी इस मुद्दे से जोड़ दिया था.