
देशभर की कंपनियां एआई इम्पैक्ट समिट में अपनी नई-नई टेक्नोलॉजी दिखाने पहुंची थीं. माहौल में उत्साह था, उम्मीदें थीं. लेकिन अचानक फोकस इनोवेशन से हटकर एक रोबोटिक डॉग पर आ गया. गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा रोबोडॉग विवाद सुर्खियों में छा गया और टेक्नोलॉजी से ज्यादा उसी की चर्चा होने लगी. लेकिन सवाल है, क्या एक घटना से भारत की तकनीकी क्षमता तय हो जाती है?
आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं
डेटा कहता है कि भारत इनोवेशन की दौड़ में पीछे नहीं, बल्कि तेजी से आगे बढ़ रहा है. भारत उन टॉप 10 देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा पेटेंट फाइल और ग्रांट हो रहे हैं. सबसे बड़ी बात, भारत में पेटेंट फाइलिंग लगातार आठ साल से बढ़ रही है.
वर्ल्ड इंटेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारतीय निवासियों द्वारा दुनिया भर में दायर किए गए पेटेंट आवेदन 19.1% बढ़े.
वहीं, ऑफिस ऑफ द कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइंस एंड ट्रेड मार्क्स यानी भारतीय पेटेंट ऑफिस में भी बड़ा बदलाव दिखा है. साल 2014 में जहां कुल फाइलिंग में भारतीयों की हिस्सेदारी 28.1% थी, वो 2024 में बढ़कर 60.1% हो गई. यानी अब देश के भीतर से ही ज्यादा इनोवेशन सामने आ रहा है.

दुनिया में भारत कहां खड़ा है?
पिछले पांच साल में चीन, भारत और दक्षिण कोरिया पेटेंट ग्रोथ के बड़े खिलाड़ी रहे हैं.
चीन: 18.3 लाख आवेदन (करीब आधी दुनिया के पेटेंट)
अमेरिका: 16.2% हिस्सेदारी
जापान: 8.2%
दक्षिण कोरिया: 6.6%
यूरोपियन पेटेंट ऑफिस: 5.4%
भारत: 2.8%

फाइलिंग और मंजूरी में फर्क
पेटेंट फाइल करना और उसे मंजूरी मिलना दो अलग बातें हैं.
2024 में ब्राजील और यूके ऐसे देश रहे जहां आधे से कम आवेदन मंजूर हुए.
वहीं ऑस्ट्रेलिया में 99% प्रोसेस्ड आवेदन मंजूर हुए. भारत ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, प्रोसेस्ड आवेदनों में से 78.6% को मंजूरी मिली. जापान में यह आंकड़ा 75.5% रहा.
AI की रेस में भी आगे
केंद्र सरकार भी AI सेक्टर को बढ़ावा दे रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत 1000 करोड़ रुपये का फंड प्रस्तावित किया है. स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं, बड़ी टेक कंपनियां R&D पर ज्यादा खर्च कर रही हैं और सरकार भी AI ट्रांजिशन को सपोर्ट दे रही है.
बड़ी तस्वीर
एक रोबोडॉग विवाद सुर्खियां बना सकता है, लेकिन पेटेंट के आंकड़े बताते हैं कि भारत चुपचाप इनोवेशन की रेस में अपनी रफ्तार बढ़ा रहा है. कैंपस में हंगामा हो सकता है, लेकिन लैब्स और स्टार्टअप्स में काम जारी है और यही भविष्य तय करेगा.