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रहने के लिए संकरी जगह, दिन-रात काम, दिल्ली से मुक्त कराए गए 26 बाल मजदूर

दिल्ली में पुलिस ने एनजीओ की मदद से 26 बाल मजदूरों को मुक्त कराया है. पुलिस प्रशासन की टीम जब मयूर विहार समेत अन्य जगहों पर छापा मारने पहुंची तो ये बच्चे बेहद कठिन परिस्थिति में दिन-रात काम करते मिले. इनके रहने के लिए भी बेहद संकरी जगह थी और इनकी हालत भी अच्छी नहीं थी. पुलिस ने सभी बच्चों का मेडिकल करवाकर उन्हें बाल गृह भेज दिया है.

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यह मेटा एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर है
यह मेटा एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर है

देश की राजधानी दिल्ली में पुलिस-प्रशासन ने अलग-अलग जगहों से 26 बाल मजदूरों को मुक्त कराया है. अधिकारियों ने कहा कि पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार इलाके में कारखानों सहित आठ स्थानों पर छापेमारी की गई और 26 बाल मजदूरों को बचाया गया है.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों को शोषणकारी परिस्थितियों में काम करते हुए पाया गया. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को बाल कल्याण समिति के समक्ष बच्चों को पेश किया जाएगा और उनके बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

मयूर विहार के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) संजय ने बताया कि मयूर विहार के कोंडली और घडोली इलाकों में छापे मारे गए, जहां 9 से 14 साल की उम्र के 26 बच्चे आठ अलग-अलग स्थानों पर तंग जगहों में भारी काम करते हुए पाए गए.

उन्होंने बताया, 'प्रशासन को जानकारी मिली थी कि इलाके में बच्चों से काम कराया जा रहा है और हमने तुरंत कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों, एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन, श्रम विभाग और बाल समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और एक्शन लिया.'

अधिकारी ने कहा, छापे के दौरान अधिकारियों को पता चला कि बच्चों को न केवल काम करने के लिए मजबूर किया गया बल्कि रहने के लिए ढंग का आवास भी नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, बचाए गए बच्चों की मेडिकल जांच की गई और उन्हें बाल गृह ले जाया गया.

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कुमार ने कहा, 'बच्चों से सिलाई कारखानों और मिठाइयों आदि की बड़ी दुकानों में काम कराया जाता था. हमने दिल्ली बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सूचित कर दिया है और सभी बच्चों को शुक्रवार को उन्हें सौंप दिया जाएगा.'

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