सरकारी डेंटल कॉलेज के छात्रों ने स्टाइपेंड में विसंगति को लेकर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. छात्रों ने अन्य राज्यों और MBBS डॉक्टरों के स्टाइपेंड के तुलनात्मक आंकड़े पेश कर सरकार से नीतिगत बदलाव की मांग की है.
उन्होंने बढ़ते एकेडमिक खर्च, क्लिनिकल वर्कलोड और जिसे वे डेंटल शिक्षा के खिलाफ सिस्टमैटिक भेदभाव का हवाला दिया है. यह विरोध प्रदर्शन तब और तेज हो गया जब छात्रों ने अपनी मांग को साबित करने के लिए तुलनात्मक चार्ट, खर्चों की सूची और सरकारी दस्तावेज दिखाए.
छात्रों ने पोस्टर के जरिए बताया कि देश के अन्य प्रमुख संस्थानों में डेंटल पीजी (MDS) छात्रों को काफी अधिक स्टाइपेंड मिलता है. कटक, पटना, मुंबई, पुणे और केजीएमयू लखनऊ में पीजी डेंटल छात्रों को 68 हजार से 1.16 लाख रुपए प्रति माह तक स्टाइपेंड मिलता है.
इसके विपरीत, रायपुर सरकारी डेंटल कॉलेज (GDC) में पीजी छात्रों को केवल 53 हजार से 59 हजार रुपए और इंटर्न को मात्र 12 हजार 600 रुपए मिल रहे हैं.
छात्रों ने प्रदर्शन स्थल पर एक्सपेंस वॉल यानी खर्चों की दीवार लगाई है, जिसमें डेंटल शिक्षा के दौरान लगने वाले महंगे उपकरणों की सूची दी गई है. माइक्रोन मोटर्स, सर्जिकल किट, एपेक्स लोकेटर, इंप्लांट किट, एंडोमोटर और आर्टिकुलेटर जैसे उपकरणों का खर्च छात्रों को खुद उठाना पड़ता है.
इन उपकरणों और कॉन्फ्रेंस या थीसिस का खर्च लगभग 1.5 लाख रुपए से अधिक बैठता है. छात्रों का कहना है कि कम स्टाइपेंड के कारण इन खर्चों को वहन करना और जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है।
'काम समान, तो दाम अलग क्यों?'
प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में MBBS डॉक्टरों (MD/MS) और इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाया है. पीजी प्रथम वर्ष के लिए लगभग 67 हजार 500 और इंटर्न के लिए 15 हजार 900 निर्धारित है. डेंटल पीजी छात्र भी ओपीडी, वार्ड और इमरजेंसी सेवाओं में फुल-टाइम काम करते हैं. ड्यूटी के घंटे और मरीजों का भार भी समान है, फिर भी उन्हें इस बढ़ोतरी से बाहर रखा गया है.