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बिहार: पुलिस बिल के पास होने से होंगे क्या बदलाव, सदन में क्यों हुई हाथापाई? जानिए, पूरा माजरा

बिहार में अब भी बिहार मिलिट्री पुलिस के नाम से बल है. मिलिट्री शब्द किसी राज्य के पुलिस बल में नहीं है. इस विधयेक से सबसे पहले मिलिट्री शब्द हटाना उद्देश्य था.

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बिहार में विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के विधायक. बिहार में विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के विधायक.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अध्यक्ष के हाथ से विधेयक खींचने की हुई कोशिश
  • सदन में पास हुआ बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक
  • विपक्ष पर बरसे सीएम नीतीश कुमार

बिहार विधानसभा में बीते मंगलवार को विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक पास हो गया. इस बिल को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ. पुलिस बिल पुलिस के साये में ही पास हुआ. सदन में विपक्ष के विधायकों और सुरक्षाबलों के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई.  बिहार विधानसभा में हुई घटना ने मंगलवार को काफी सु्र्खियां बंटोरी. खबरें ऐसी भी आईं कि सदन में प्रस्ताव पास कराने के दौरान अध्यक्ष की कुर्सी तक विपक्ष के विधायक पहुंच गए और अध्यक्ष के हाथ से विधेयक खींचने की कोशिश की. विधानसभा अध्यक्ष को चेंबर से निकालने के लिए पटना के डीएम और एसएसपी तक को जुटना पड़ा.

क्या  है बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक

बिहार में अब भी बिहार मिलिट्री पुलिस (बीएमपी) के नाम से बल है. मिलिट्री शब्द किसी राज्य के पुलिस बल में नहीं है. इस विधयेक से सबसे पहले मिलिट्री शब्द हटाना उद्देश्य था. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि विशेष सशस्त्र पुलिस का काम सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना होगा. इनमें एयरपोर्ट, मेट्रो या फिर ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा करना शामिल है. बोधगया में आतंकवाद की घटना के बाद बीएमपी पिछले 8 सालों से वहां की सुरक्षा कर रही है लेकिन बीएमपी के पास किसी की तलाशी लेने या गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं था. इस बिल के जरिए ये अधिकार भी दिया जाना है. लेकिन ये अधिकार उन्ही जगहों पर रहेगा जहां उन्हें सुरक्षा में लगाया जाएगा. यह सीआईएसएफ से मिलता जुलता है.

विपक्ष क्यों कर रहा विरोध

विपक्ष ने ये प्रचारित किया कि पुलिस अब बिना वारंट किसी भी घर में घुसकर तलाशी ले सकती है और गिरफ्तार कर सकती है. विपक्ष ने इसको हवा दी तो कहीं ना कहीं सरकार के अधिकारियों की नाकामी भी रही. इस विधयेक के बारे में पहले से कुछ जानकारी नहीं दी गई थी ना ही मीडिया को कुछ बताया गया था. तेजस्वी यादव ने इस कानून को लेकर कहा कि यह क्या कानून है? पुलिस के पास बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार पहले से है. CM किसे बेवकूफ बना रहे हैं? जब विधानसभा में विधायकों की पिटाई हो रही है तो अब आम लोगों को घर में घुसकर पीटेंगे. इस कानून से पुलिस जब चाहे किसी की तलाशी ले सकती है, किसी को गिरफ्तार कर सकती है. सरकार बहस नहीं होने देना चाहती, बहस से भाग रही है, मैं बहस के लिए तैयार हूं. नीतीश कुमार पुलिस को सशक्त नहीं बल्कि गुंडा बना रहे हैं.

सड़क पर उग्र प्रदर्शन

तेजस्वी और तेजप्रताप के नेतृत्व में मंगलवार को नीतीश सरकार को घेरने के लिए आरजेडी ने विधानसभा घेराव का आयोजन किया था. इस बीच आरजेडी कार्यकर्ताओं को डाक बंगला चौराहे पर ही प्रशासन और पुलिस के द्वारा रोक दिया गया था. इसी दौरान आरजेडी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच में हिंसक झड़प हुई. इस दौरान कई लोग घायल हुए. आरजेडी के उग्र कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण पाने के लिए पटना पुलिस ने पहले वाटर कैनन चलाया, जिसके जवाब में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पत्थरबाजी की. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी आरजेडी कार्यकर्ताओं पर जमकर लाठियां भांजी. इस मामले में तेजस्वी और तेजप्रताप समेत कई आरजेडी नेताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है.

सीएम नीतीश कुमार का बयान

सदन में हुए बवाल पर सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार मिलिट्री पुलिस का नाम बदलकर बिहार सशस्त्र पुलिस बल कर दिया गया है। मैंने 3 घंटे बैठकर देखा है कि इसमें कहीं कोई दिक्कत तो नहीं है. DGP और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को कहा कि आखिर इस प्रकार का दुष्प्रचार कौन कर रहा है? कहीं ये आपके बीच का ही तो कोई नहीं, जिसे ये अच्छा नहीं लग रहा? हम तो चाहते थे कि इस पर डिबेट हो और हम उसमें भाग लेते. हम तो चाहते थे कि पूछें कि इसको पढ़े हैं, क्या लिखा है इसमें? लोग बोलते हैं अगर कहीं अपराध होगा तो पुलिस कार्रवाई करेगी या कोर्ट से जाकर परमिशन लेगी? मैं तो चाहता था कि इस विषय पर डिबेट हो, लेकिन किसी ने इसको पूरा पढ़ा है? इस कानून में सामान्य पुलिस के मुकाबले ज्यादा कड़े कानून हैं कि अगर कोई अधिकारी अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करता है तो उसपर कड़ी कार्रवाई होगी.

प्रियंका चतुर्वेदी ने किया ट्वीट

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बिहार की इस घटना की निंदा की. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, बिहार में ये क्या हो रहा है? जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है. ये बेहद निंदनीय है और अस्वीकार्य है.

 

 

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