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लालू प्रसाद यादव बिहार के सबसे बड़े जमींदार: सुशील मोदी

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को बिहार का सबसे बड़ा जमींदार घोषित कर दिया है.

सुशील मोदी सुशील मोदी

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को बिहार का सबसे बड़ा जमींदार घोषित कर दिया है. मोदी का दावा करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि बिहार में जितनी बड़ी संपत्ति लालू के परिवार ने इकठ्ठा कर लिया है शायद ही किसी नेता या उद्योगपति के पास होगी. आज वो बिहार के सबसे बड़े जमींदार हैं. उनका कहना है कि ये सारी संपत्ति बेनामी है.

लालू यादव पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने काम करना के एवज में, टिकट देने के एवज में, मंत्री बनाने के एवज में, एमपी और एमएलए बनाने के एवज में संपत्ति बनाई है. रेलवे का होटल देने के एवज में 200 करोड़ की कीमत की जमीन लिखवा लिया, शराब फैक्ट्री के एवज में पटना शहर में कीमती जमीन लिखवा लिया. ये सारी बेनामी संपत्ति है इसलिए लालू प्रसाद यादव नोटबंदी का विरोध कर रहे थे. मोदी ने लालू प्रसाद यादव को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो इसे नकार दें. उन्होंने कहा कि अभी और खुलासे होने बाकी हैं.

सुशील मोदी चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव से पहले ही दो-दो हाथ कर चुके हैं. और अब मिट्टी घोटाले से शुरू हुआ ये प्रकरण बेनामी संपत्ति तक पहुंच गया है. पटना के सगुना मोड़ के पास लालू प्रसाद यादव का परिवार बिहार का सबसे बडा मॉल बनवा रहे हैं. इसकी मिट्टी को पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान में खपाया गया. जैविक उद्यान बिहार सरकार के वन विभाग के तहत है जिसके मंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव हैं, इस मामले की शुरूआत हुई थी.

बाद में मोदी ने खुलासा किया की जिस जमीन पर मॉल बन रहा है वो जमीन रेलवे के दो होटलों को एक होटल व्यवसायी लीज पर देने के एवज में लालू प्रसाद यादव को मिला है उस समय वो देश के रेलमंत्री थे. पहले ये जमीन उनके करीबी रहे पूर्व मंत्री प्रेम गुप्ता की पत्नी के नाम पर थी बाद में उस कंपनी के निदेशक लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के साथ-साथ उनकी बेटी चंदा यादव बन गई.

इस पर मोदी ने सवाल किया कि लालू बताएं कि ऐ के इन्फ़ो सिस्टम प्राइवेट कंपनी की जमीन आज किसके कब्जे में है. डिलाईट मार्केटिंग जिसके पास 2 एकड़ है जिस पर 500 करोड़ का मॉल बन रहा है, आज उसका मालिक कौन है. उन्होंने कहा कि सारे मामले में लालू यादव पहले इसलिए बचते रहे क्योंकि 2004 से 2014 तक केंद्र में यूपीए की सरकार थी और पांच साल वो रेल मंत्री थे. 2009 से 2014 तक भी यूपीए की सरकार इन्हीं के बदौलत चल रही थी. इसलिए सीबीआई और इंकम टैक्स ने मदद किया, जो मनमाना रिटर्न था वो फाइल कर दिया गया किसी ने पूछताछ नहीं किया, लेकिन अब केंद्र में इनकी सरकार नहीं है, और सीबीआई एक निष्पक्ष काम करने वाली संस्था है, तो मैं सीबीआई, ईडी, इंकम टैक्स, रेल मंत्रालय भी जाऊंगा.

सुशील मोदी ने नीतीश कुमार से भी आग्रह किया कि वो बार-बार कहते हैं कि बेनामी संपत्ति पर हमला होना चाहिए, ये तो बिहार के अंदर बेनामी संपत्ति है, बिहार के अंदर जो कानून है वो स्वयं सक्षम है उस पर कार्रवाई करने के लिए. मोदी ने कहा कि सबसे पहले तेजस्वी और तेज प्रताप जिन्होंने करोड़ों रुपए की संपत्ति को छिपा लिया, जिसने अपने एफिडेविट में जिसका उल्लेख नहीं किया उनको बर्खास्त करना चाहिए. उन पर कार्रवाई करना चाहिए. चंदा यादव जिसने मुख्यमंत्री के पते का बेजा इस्तेमाल किया, वो भी 2014 में और उस पर हस्ताक्षर करने वाले हैं तेजस्वी और तेज प्रताप, तो क्या 2014 में तेज प्रताप और तेजस्वी को ये नहीं मालूम था कि इस मकान में राबड़ी या लालू का नहीं बल्कि नीतीश कुमार या जीतनराम मांझी रहते हैं, क्या चंदा यादव को ये नहीं मालूम था की 2005 में उनके पिता ने ये मकान खाली कर दिया था.

मोदी का दावा है कि बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है और ये उस समय से हुआ जब 2000 में राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनती हैं और 2004 में लालू रेल मंत्री रहते हैं. सारे जमीन की खरीद फरोख्त है 2000 से 2014 के बीच हुआ है. जमीन खरीदा नहीं गया है, लिखवाया गया है, मदद करने के एवज में ये भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंदर मामला आता है की जमीन आपने खरीदी नहीं लिखवाया गया, तो पहले सारे खुलासे हो जाएं, उसके बाद जहां-जहां जाना होगा जाएंगे. क्योंकि ये मामला सिर्फ मिट्टी का नहीं.

उन्होंने कहा कि अभी ये भी प्रमाण आएंगे की मंत्री बनाने के एवज में किस तरह से लालू ने जमीन लिखवाया है, टिकट देने के एवज में लोग सामने आ रहे हैं इसलिए ये चारा घोटाला और अलकतरा घोटाला से भी बड़ा घोटाला है. लेकिन, नीतीश कुमार कार्रवाई करें, हिम्मत दिखाएं. नैतिकता की बात करते हैं, सारी पारदर्शिता के बाद जहां तक जाना होगा हम जाएंगे और दूध का दूध और पानी का पानी होगा, जहां का दरवाजा खटखटाना होगा खटखटाएंगे.

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