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Bihar: 'मीठी गोली' देकर लोगों की बीमारी छूमंतर कर देने वाले डॉक्टर का निधन, 99 साल की उम्र में भी थे एक्टिव

Bihar: बिहार की राजधानी पटना में मीठी गोलियां देकर लोगों की बीमारी दूर करने वाले देश के चर्चित होम्योपैथी के डॉक्टर बी भट्टाचार्य का 99 साल की उम्र में निधन हो गया. अपने जीवन के अंतिम क्षण तक वो लोगों का इलाज करते रहे. सीएम नीतीश समेत कई नेताओं ने उनकी मौत पर दुख जताया है.

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चर्चित डॉक्टर बी भट्टाचार्य का निधन. चर्चित डॉक्टर बी भट्टाचार्य का निधन.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मीठी गोली देकर लोगों का इलाज करने वाले डॉक्टर का निधन
  • सीएम नीतीश और तेजस्वी यादव ने भी जताया दुख

बिहार की राजधानी पटना सहित पूरे राज्य में अपनी मीठी गोलियों से बीमारी दूर करने वाले होम्योपैथी के प्रसिद्ध डॉक्टर बी. भट्टाचार्य का निधन हो गया है. इससे पूरे बिहार में शोक की लहर है. 

बी. भट्टाचार्य राष्ट्रीय स्तर पर होम्योपैथी के नामी डॉक्टर थे. 99 साल की उम्र तक वे सक्रिय थे और लोगों का इलाज कर रहे थे. रविवार को सुबह 3 बजे भट्टाचार्य ने पटना में अंतिम सांस ली. वह अंतिम सांस तक लोगों के इलाज में लगे हुए थे.
 
उनके करीबी छात्र डॉ. एस ए रजा ने बताया, 'बी भट्टाचार्य ने अपनी पूरी जिंदगी समाज के गरीबों के नाम कर दी थी. वे दूसरों के लिए जीते थे. बहुत ही व्यवहारिक इंसान थे और उन्हेंहोम्योपैथी की विशेष जानकारी थी. उन्हें किताबी ज्ञान के अलावा होम्योपैथी में प्रयोग के लिए जाना जाता था. उनसे अपना इलाज कराने देशभर से लोग आते थे और ठीक होकर जाते थे.' 

राजधानी पटना में 50 के दशक से मरीजों से बिना फीस के इलाज करने का श्रेय डॉ. बी भट्टाचार्य को जाता है. सीएम नीतीश कुमार ने अपने शोक संदेश में कहा, 'डॉ बी भट्टाचार्य होम्योपैथी के प्रसिद्ध डॉक्टर थे. वो सरल स्वभाव के थे और मरीजों के साथ उनका आत्मीय संबंध रहता था. उन्हें होम्योपैथी चिकित्सा का चरक भी माना जाता था. उनके निधन से चिकित्सा जगत को अपूरणीय क्षति हुई है.' 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुख की इस घड़ी में डॉक्टर भट्टाचार्य के परिजनों को धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने हेतु ईश्वर से प्रार्थना की है. इसके अलावा बी होम्योपैथी के निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और होम्योपैथिक चिकित्सकों ने शोक संवेदना व्यक्त की. 

तेजस्वी यादव ने कहा कि बी भट्टाचार्य ने होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों में विश्वास को बढ़ाया. दूर-दूर से जटिल बीमारियों से ग्रस्त लोग उनके पास आते थे और उनका सफल इलाज होता था. 

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