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बिहार की लाइफ लाइन गांधी सेतु पर नहीं चलेंगे बड़े वाहन, पाबंदी की तैयारी

पथ निर्णाण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा कि भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. नए पुल दीघा को केवल रात में बड़े वाहनों के लिए खोला जाएगा. साथ ही आरा-छपरा पुल और मोकामा पुल से भारी वाहन गंगा पार कर सकेंगे.

गांधी सेतु गांधी सेतु

बिहार की जीवन रेखा गांधी सेतु पर सरकार बड़ी गाड़ियों को आवागमन पर रोक लगाने पर विचार कर रही है. सेतु के एक लेन पर भारी दबाव की वजह से स्थिति बिगड़ती जा रही है. इस तरह इस पुल पर अब भारी वाहन नहीं चल पाएंगे. दुर्घटनाओं को देखते हुए पहले ही सेतु पर दो पहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लग चुका है.

पथ निर्णाण मंत्री नंद किशोर यादव ने कहा कि भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. नए पुल दीघा को केवल रात में बड़े वाहनों के लिए खोला जाएगा. साथ ही आरा-छपरा पुल और मोकामा पुल से भारी वाहन गंगा पार कर सकेंगे.

बड़े वाहनों पर पाबंदी क्यों

देश का सबसे लंबा पुल होने का खिताब पा चुका गांधी सेतु के एक लेन को तोड़ कर नए सिरे से तैयार किया जाना है. इसलिए वाहनों का सारा दबाव दूसरे लेन पर है. भारी वाहनों के दबाव की वजह उसके ज्वाइंट में भी दिक्कत आने लगी है जो खतरनाक हो सकता है. ऐसे में सरकार बड़े वाहन यानी मालवाहक ट्रक और यात्री बसों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है.

हालांकि इस फैसले से सबसे ज्यादा दिक्कत बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों को होगी. उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए दूसरे रास्ते से जाना होगा जो लंबा है. ट्रक नए बने आरा छपरा पुल या फिर मोकामा के राजेंद्र पुल से जा सकेंगे. सरकार पटना के दीघा पुल पर रात में भारी वाहनों को जाने की इजाजत दे सकती है.

पिछले आठ-नौ महीने से गांधी सेतु के एक लेन के कटाव के कारण सारे वाहनों का परिचालन केवल एक लेन से हो रहा है. छोटे बड़े वाहनों को मिलाकर हर दिन आने-जाने वाले वाहनों की संख्या 40 हजार है. इनमें आठ हजार ट्रक, चार हजार बस, आठ हजार कार-जीप और छोटे तिपहिया वाहन और 20 हजार बाइक शामिल हैं. एक ही लेन से इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के आने जाने से जाम की समस्या बढ़ गई थी और पुल पर दवाब भी बढ़ गया था. पिछले दिनों दो पहिया वाहन के चलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था. अब वो पीपा पुल होकर पटना आएंगे जाएंगे.

कभी भी दुरुस्त नहीं रहा गांधी सेतु

केंद्र सरकार ने गांधी सेतु के पुर्नोद्धार के लिए लगभघ 14 सौ करोड़ आवंटित किए हैं.  नंदकिशोर यादव का कहना है कि पहले की सरकारों ने गांधी सेतु के रख रखाव पर ध्यान नहीं दिया. इसकी वजह से यह पुल समय से पहले खराब हो गया. देखा जाए तो इसके दोनों लेन चार सालों तक ही ठीक रहे. गांधी सेतु का निर्माण 1972 में हुआ था. 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसके एक लेन का उद्धाटन किया था. 1987 में दूसरा लेन शुरू हुआ, लेकिन 1991 से ही इस पुल में गड़बड़ी आनी शुरू हो गई.  वर्ष 2000 से इसके मरम्मत का काम चल रहा है . पिछले 18 वर्षों से अभी ये पुल के दोनों लेन एक साथ नहीं चले.

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