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जेडीयू नेता ने आरक्षण में संशोधन का मुद्दा उठाया, एक परिवार से एक सदस्य को मिले लाभ

जेडीयू के प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए कहा कि ऐसा नियम बनाना चाहिए कि अगर किसी को एक बार आरक्षण का लाभ मिल गया है तो उसके परिवार के किसी अन्य सदस्य को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए. इसी तरह से आरक्षण से कुछ परिवारों की पकड़ को छुड़ाया जा सकता है. 

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जेडीयू नेता अजय आलोक
जेडीयू नेता अजय आलोक
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जेडीयू नेता ने आरक्षण में संशोधन का मुद्दा उठाया
  • आरक्षण का लाभ परिवार से एक ही शख्स को मिले
  • जेडीयू नेता आरक्षण के मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं

जेडीयू नेता ने देश में दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदाय को मिलने वाले आरक्षण में संशोधन किए जाने की मांग उठायी है. जेडीयू नेता डॉ. अजय आलोक ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए कहा कि ऐसा नियम बनाना चाहिए कि अगर किसी को एक बार आरक्षण का लाभ मिल गया है तो उसके परिवार के किसी अन्य सदस्य को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए. इसी तरह से आरक्षण से कुछ परिवारों की पकड़ को छुड़ाया जा सकता है. 

जेडीयू नेता अजय आलोक ने आरक्षण से जुड़ी खबर को ट्वीट करते हुए लिखा है, 'संशोधन कर नियम ये बनाना चाहिए कि एक बार अगर आरक्षण के लाभ से पढ़ाई और आगे नौकरी मिल गयी हो तो उस व्यक्ति की अगली पीढ़ी को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए तभी इन जातियों के बड़े वर्ग को लाभ मिल सकेगा , कुछ परिवारों की पकड़ से आरक्षण को छुड़ाना जरूरी हैं.' अजय आलोक ने अपने इस ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया है. 

आरक्षण पर अजय आलोक का ट्वीट

बता दें कि साल 2015 में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की बात महज उठायी थी, जिसके लेकर बिहार की सियासत गर्मा गई थी. जेडीयू के अध्यक्ष रहे नीतीश कुमार और आरजेडी प्रमुख लालू यादव आरक्षण के मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर हो गए थे. उस समय बीजेपी और जेडीयू अलग-अलग चुनाव लड़ रही थी जबकि आरजेडी और जेडीयू एक साथ थे. संघ प्रमुख के बयान का सियासी असर यह हुआ कि बीजेपी को बिहार चुनाव में करारी मात खानी पड़ी थी.

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वहीं, अब बिहार में बीजेपी और जेडीयू एक साथ है. जेडीयू नेता अजय आलोक ने आरक्षण कानून में संशोधन की बात उठायी है. ऐसे में देखना है कि जेडीयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या राजनीतिक स्टैंड लेते हैं?

हालांकि, अजय आलोक ने आरक्षण के मुद्दे पर पहली बार कोई ट्वीट नहीं किया है. इससे पहले भी उन्होंने साल 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जब पीएम मोदी ने सवर्ण समुदाय को गरीबी के आधार पर 10 फीसदी आरक्षण दिया था, तब भी उन्होंने कहा था कि आरक्षण पर चर्चा का मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं होता है. उन्होंने कहा था कि 10 फीसदी सवर्ण समाज के लोगों को आरक्षण दिया गया है. इसका स्वागत कीजिए और व्यर्थ की राजनीति से अब कोई लाभ नहीं होगा.

 

जब संघ प्रमुख ने आरक्षण पर चर्चा की बात की थी तब भी अजय आलोक उनके समर्थन में खड़े रहे थे. उन्होंने उस समय भी ट्वीट कर कहा था, 'आरक्षण पे खुली चर्चा हो , पक्ष में या विपक्ष में लेकिन चर्चा हो' ये कहकर RSS प्रमुख ने कोई अपराध नहीं किया है. आज 70 वर्षों के बाद दलितों की दशा में सुधार नहीं हुआ तो ये जानना ज़रूरी है कि आरक्षण का लाभ सभी दलितों को क्यों नहीं मिला? हम और क्या कर सकते हैं जिससे कि व्यापक लाभ मिले. 

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