बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार की संपर्क यात्रा का असर पार्टी के कार्यकर्ताओं पर दिखे ना दिखे, महागठबंधन पर जरूर दिखने लगा है. बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि इस महागठबंधन का चेहरा नीतीश कुमार को होना चाहिए. बिहार में समाजवादियों के नाम से परहेज करने वाली कांग्रेस को अब नीतीश कुमार में ही भविष्य नजर आने लगा है. यही वजह है कि कांग्रेस ने गठबंधन में चेहरा कौन हो, इस पर अपना रुख साफ कर दिया है.
जिस नीतीश कुमार से कांग्रेस को परहेज था, जो कांग्रेस नीतीश कुमार को फूटी आंख नहीं सुहाती थी, उसी कांग्रेस और नीतीश का प्यार कुछ इस कदर परवान चढ़ा है कि बिहार में आरजेडी-जेडी(यू) और कांग्रेस का चेहरा कौन हो, इसपर जेडी(यू) से पहले, कांग्रेस ने ही अपने पत्ते खोल दिए हैं. नीतीश कुमार इस समय राज्य में संपर्क यात्रा पर हैं लेकिन पटना में उनके नाम का झंडा कांग्रेस पार्टी बुलंद कर रही है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने 'आज तक' से खास बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार को ही गठबंधन का चेहरा होना चाहिए.
अशोक चौधरी कहते हैं, 'इस महागठबंधन को एक चेहरे के साथ आगे बढ़ना होगा. आखिरी फैसला तो तीनों पार्टियों के नेताओं को करना है लेकिन ये सच्चाई है कि नीतीश कुमार ही वो चेहरा है जो राज्य में सबसे भरोसेमंद है और जिसे बिहार में और केंद्र में काम करने का अच्छा अनुभव है. साथ ही बतौर मुख्यमंत्री भी नीतीश कुमार के 8 साल का कार्यकाल अच्छा रहा है. ऐसे में हम चाहेंगे कि नीतीश कुमार ही इस महगठबंधन का चेहरा हों.'
अशोक चौधरी के मुताबिक लालू यादव की पूरे बिहार में बड़े नेता की छवि है और उनकी 'पैन बिहार' अपील है, लेकिन अब उन्हें आगे नहीं किया जा सकता क्योंकि उसमें कानूनी अड़चन है. ऐसे में नीतीश कुमार ही वो चेहरा है जिसपर ये गठबंधन दांव लगा सकता है. चौधरी के कहा कि नीतीश कुमार ने बतौर मुख्यमंत्री राज्य के लिए अच्छा काम किया है, ऐसे में अगर वो महागठबंधन का चेहरा होंगे तभी मोदी के रथ को बिहार में रोका जा सकता है.
बहरहाल कांग्रेस की भूमिका क्या सिर्फ मोदी के रथ को रोकने की होगी या फिर इस गठबंधन के पिछलग्गू पार्टी की होगी, इस पर बोलते हुए बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी की भूमिका पहले मोदी के विजय रथ को रोकने की है. ऐसे दल का स्वार्थ बाद में आता है. बिहार में नीतीश को कांग्रेस का साथ मिलने से उनके हौसले बुलंद होंगे लेकिन क्या लालू और आरजेडी इतनी आसानी से नीतीश को नेता मानेगी ये सबसे बड़ा सवाल होगा.