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बिहार: बनकटवा प्रखंड के वैक्सीनेशन मॉडल का WHO भी हुआ मुरीद, जानिए कैसे पूरा हुआ टारगेट

बनकटवा प्रखंड पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह देश का पहला ऐसा प्रखंड बन गया है जहां 100 फ़ीसदी आबादी को कोरोनावायरस का टीका लगाया जा चुका है.

देश में कोरोना वैक्सीनेशन अभियान जारी है. (फाइल फोटो) देश में कोरोना वैक्सीनेशन अभियान जारी है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केंद्र और WHO ने की बनकटवा की तारीफ
  • बीजबानी पंचायत थी सबसे बड़ी चुनौती
  • स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य लोगों की मदद पूरा हुआ टारगेट

कोरोना वायरस (Corona Virus) से जंग जीतने के लिए वैक्सीन (Vaccine) ही फिलाहल मुख्य हथियार है. देश में वैक्सीनेशन (Vaccination)  अभियान तेजी से चलाया जा रहा है. वैक्सीनेशन पर जोर भी दिया जा रहा है ऐसे में बिहार (Bihar) के पूर्वी चंपारण के बनकटवा प्रखंड ने देश के सामने मिसाल पेश की है. बनकटवा प्रखंड पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह देश का पहला ऐसा प्रखंड बन गया है जहां 100 फ़ीसदी आबादी को कोरोनावायरस का टीका लगाया जा चुका है. बनकटवा प्रखंड में 100 फ़ीसदी टीकाकरण की ऐसी मिसाल पेश की है जिसका मुरीद विश्व स्वास्थ संगठन भी हो चुका है.

बनकटवा प्रखंड क्यों बना था चुनौती ?

बनकटवा प्रखंड में 18+ आयु की 100 फ़ीसदी आबादी को कोरोना का टीका लग चुका है. बनकटवा प्रखंड ने जो करके दिखाया है वह इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां स्वास्थ सुविधाओं के अभाव और टीकाकरण को लेकर हिचकिचाहट के कारण टीकाकरण कवरेज केवल 64 फ़ीसदी था. ऐसे में, बनकटवा प्रखंड के 10 पंचायतों के तकरीबन 100 से भी ज्यादा गांवों में 18+ की तकरीबन 62 हजार की आबादी का 100 फ़ीसदी कोरोना टीकाकरण हो यह पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी.

बीजबानी दक्षिण पंचायत सबसे बड़ी चुनौती !

बनकटवा प्रखंड के बीजबानी पंचायत में कैसे 100 फ़ीसदी टीकाकरण हो जिला प्रशासन के लिए सबसे गंभीर चुनौती थी क्योंकि पूर्व में इस पंचायत के अंतर्गत आने वाले अधिकतर मुस्लिम आबादी वाले गांवों ने लगभग सभी प्रकार के टीकाकरण कार्यक्रमों का बहिष्कार किया था. इसके लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सोसाइटी के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न पंचायती राज संस्थाएं और कई जन कल्याण विभाग के साथ तालमेल करके यहां के लोगों का भरोसा जीता और टीकाकरण को लेकर जो उनके मन में हिचकिचाहट थी उसे दूर किया गया. इसके बाद इस पंचायत में भी 100 फ़ीसदी टीकाकरण की टारगेट को पूरा किया गया.

मोतिहारी डीएम शीर्षस्थ कपिल अशोक ने कहा कि बनकटवा प्रखंड की जो उपलब्धि है उसके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि यहां पर 95 फ़ीसदी से भी ज्यादा टीकाकरण का काम हो चुका है. बनकटवा प्रखंड भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है और यहां पर मुसलमानों की आबादी भी ज्यादा है. हम लोगों ने जीविका दीदी, आंगनवाड़ी सेविका, जनप्रतिनिधि और धर्म गुरुओं की मदद से इस प्रखंड में 100 फ़ीसदी टीकाकरण का काम पूरा किया है”.

बीजबानी पंचायत के मुसलमानी टोला निवासी हुसैनी दीवान के परिवार के सभी 23 लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है. आजतक से बातचीत के दौरान हुसैनी दीवान ने बताया कि कैसे मुस्लिम समाज के अंदर पहले टीका लेने को लेकर भय था मगर जब प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन लोगों को समझाया उसके बाद इस पंचायत में जहां 6600 की आबादी 18 साल से ऊपर है, उसमें से 1200 मुस्लिम आबादी है और सभी ने टीका ले लिया है.

बीजबानी पंचायत के मुसलमानी टोला के निवासी हुसैनी दीवान ने कहा कि टीकाकरण को लेकर पहले मुस्लिम आबादी में हिचकिचाहट थी क्योंकि टीका को लेकर बहुत सारी बातें सुनने को मिल रही थी मगर सभी लोगों ने हमें आकर समझाया जिसके बाद मेरे पूरे परिवार ने टीका लगवा लिया है.”

कैसे हुई बनकटवा के लिए प्लानिंग ?

पूर्वी चंपारण डीएम शीर्षस्थ कपिल अशोक ने जिला स्वास्थ्य समिति और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF के शंकर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि टीम के साथ मिलकर समन्वय बनाया और फिर बनकटवा प्रखंड के गांव-गांव में ना केवल टीकाकरण कैंप लगाया गया बल्कि डोर टू डोर टीकाकरण कार्यक्रम चलाया गया जिसके कारण आज यह देश का पहला प्रखंड बन गया है जहां पर 100 फ़ीसदी टीकाकरण हो चुका है.

देश में पल्स पोलियो अभियान को लेकर जो टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है उसी से मार्गदर्शन देते हुए पूर्वी चंपारण प्रशासन ने जिला स्वास्थ्य समिति और विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर इस काम को पूरा किया.

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यूनिसेफ के प्रतिनिधि मुनेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि, जन वितरण प्रणाली, आशा दीदी, आंगनवाड़ी सेविका और इस पंचायत से जुड़े सभी कर्मियों की बैठक की गई जिसमें यह फैसला लिया गया कि पहले टीकाकरण फिर काम. बीजबानी पंचायत को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया गया था और टीकाकरण की तैयारी माइक्रो लेवल पर की गई थी.

कैसे पूरा हुआ टारगेट ?

जानकारी के मुताबिक बनकटवा में 100 फ़ीसदी टीकाकरण के लक्ष्य को पाने के लिए आसपास के दूसरे प्रखंडों से तकरीबन 44 एएनएम और 40 डाटा एंट्री ऑपरेटर को लगाया गया और इन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा ट्रेनिंग दी गई. साथ ही बनकटवा में कोरोना के टीका के 35000 डोज़ के भंडारण के लिए दूसरे प्रखंड से एक अतिरिक्त आइस लाइन्ड रेफ्रिजरेटर (Ice lined refrigerator) को भी मंगाया गया था.

बीजबानी पंचायत के मुखिया बीजबानी पंचायत के जब 100 फ़ीसदी टीकाकरण कार्यक्रम पूरा हो गया तो फिर प्रशासन की मदद से हम लोगों ने पूरे प्रखंड में 100 फ़ीसदी टीकाकरण करके दिखलाया. मुझे इस बात की खुशी है कि बनकटवा प्रखंड का नाम आज देश विदेश में हुआ है.

बनकटवा का विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हुआ मुरीद 

बनकटवा प्रखंड में 100 फ़ीसदी कोरोना टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त किया है. इसका मुरीद विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हो चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन में टीकाकरण के बनकटवा मॉडल को अपने संगठन के वेबसाइट पर जगह दी है और उसे पूरे देश के लिए मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया है कि कैसे भारत में टीकाकरण की रफ्तार को बनकटवा मॉडल का अपनाकर तेज किया जा सकता है.

केंद्र सरकार ने भी की बनकटवा मॉडल की सराहना 

बनकटवा प्रखंड ने टीकाकरण के कार्यक्रम को रफ्तार देने के लिए जो करके दिखाया है. उसकी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सराहना की है और ट्विटर पर लिखा “ बिहार के पूर्वी चंपारण का बनकटवा प्रखंड पूरे देश की शान बन गया है. आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सेविका और जनप्रतिनिधि सभी की मदद से इस प्रखंड में 100 फ़ीसदी कोरोना टीकाकरण यह प्रमाणित करता है कि कुछ ठान लो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है”.

 

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