तंबाकू की लत सिर्फ सेहत ही नहीं, बल्कि घर की तिजोरी पर भी भारी पड़ रही है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अगर लोग तंबाकू छोड़ दें तो लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति रातों-रात सुधर सकती है. नोएडा स्थित आईसीएमआर राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं रिसर्च सेंटर (ICMR-NICPR) और मुंबई स्थित टाटा सोशल साइंस इंस्टीट्यूट (TISS) के रिसर्चर्स का कहना है कि तंबाकू पर खर्च होने वाला पैसा यदि एजुकेशन, हेल्दी डाइट और सेविंग में लगाया जाए तो करीब 10 प्रतिशत भारतीय परिवार गरीबी रेखा से ऊपर उठ सकते हैं. यह आंकड़ा चौंकाने वाला है और देश की आर्थिक सेहत के लिए एक बड़ा संकेत भी हो सकता है.
बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में पब्लिश्ड स्टडी के मुताबिक, भारतीय घरों में तंबाकू पर होने वाला खर्च उनके बजट का एक बड़ा हिस्सा होता है. खास तौर पर कम आय वाले परिवारों में यह समस्या और भी अधिक गंभीर हो सकती है.
रिसर्चर्स का मानना है कि यदि कोई परिवार बीड़ी, सिगरेट या गुटखे पर खर्च होने वाले पैसे को बचाकर जरूरी चीजों पर खर्च करे तो उनकी लाइफस्टाइल में काफी बड़ा बदलाव तो आएगा ही साथ ही साथ यह सिर्फ उनकी एक आदत छोड़ने की बात नहीं है बल्कि अपने बच्चों के भविष्य और घर की खुशहाली में इन्वेस्टमेंट का एक अच्छा कदम भी है.
रिसर्च के अनुसार, तंबाकू के कारण न केवल जेब खाली होती है, बल्कि बीमारियों पर होने वाला एक्स्ट्रा खर्च फैमिली को कर्ज में भी ले जा सकत है. कैंसर और सांस की बीमारियों के इलाज में जमा-पूंजी खत्म हो जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू छोड़ने से न केवल दैनिक खर्च बचेगा बल्कि भविष्य में मेडिकल पर होने वाले भारी-भरकम खर्च में भी कटौती होगी. इससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों को अपनी आर्थिक श्रेणी सुधारने में सीधी मदद मिलेगी.
भारत में तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्या करोड़ों में है. रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तंबाकू छोड़ने से घरेलू खपत के पैटर्न में सुधार होगा. लोग बेहतर फल, सब्जियां और बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे पाएंगे. कुल मिलाकर यह स्टडी मैसेज देती है कि तंबाकू को छोड़ना न सिर्फ फेफड़ों के लिए फायदेमंद है, बल्कि फाइनेंसिअल स्थिति सुधारने का भी अच्छा मौका है.