Snoring warning signs: सोते समय रात में खर्राटे लेना आम बात है लेकिन कई लोग इसे नॉर्मल समझकर अनदेखा कर देते हैं. लेकिन हर किसी के लिए खर्राटे लेना सामान्य नहीं होता वो किसी दूसरी बीमारी सा हेल्थ कंडिशन का भी संकेत हो सकते हैं. खर्राटों के साथ सांस रुकने, दिनभर थकान रहने या सुबह सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो यह स्लीप एपनिया जैसी बीमारी का इशारा भी हो सकता है. ऐसे में जरूरी है कि कुछ खास संकेतों को अनदेखा करने की बजाय उन पर ध्यान दिया जाए. तो आइए उन संकेतों को जान लेते हैं जिन्हें अनदेखा करने से बचते हैं.
बहुत तेज खर्राटे लेना
अगर खर्राटे कभी-कभी आते हैं तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती लेकिन यदि किसी को रोजाना तेज खर्राटे आते हैं तो यह बताता है कि आपकी सांस की नली नींद के दौरान आंशिक रूप से बंद हो रही है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लगातार और तेज खर्राटे अक्सर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से जुड़े होते हैं, जो नींद और सांस दोनों को प्रभावित करता है.
सोते समय सांस रुकना या हांफना
यदि किसी को खर्राटों के बीच में अचनाक से सांस रुकने या हांफने की समस्या समझ आती है तो गंभीर चेतावनी संकेत है. ये स्लीप एपनिया का ही संकेत होता है क्योंकि इस स्थिति में भी कुछ समय के लिए सांस लगभग रुक जाती है और शरीर अचानक जागकर सांस लेने की कोशिश करता है.
नींद के बाद भी दिनभर थकान
अगर रात में 7-8 घंटे की नींद लेने के बावजूद सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं होती और दिनभर नींद या थकान बनी रहती है, तो यह भी चेतावनी हो सकती है. स्लीप एपनिया में व्यक्ति कई बार रात में अनजाने में जागता है जिससे गहरी और आरामदायक नींद पूरी नहीं हो पाती. इसका असर दिनभर की एनर्जी, काम पर ध्यान और मूड पर भी पड़ सकता है.
सुबह सिरदर्द या मुंह सूखना
अगर सुबह उठते ही सिर भारी लगे, सिरदर्द हो या मुंह बहुत सूखा महसूस हो तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. दरअसल, नींद के दौरान मुंह से सांस लेने और ऑक्सीजन की कमी के कारण यह समस्या हो सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसे लक्षण अक्सर स्लीप एपनिया के मरीजों में देखे जाते हैं.
हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट समस्या
डॉक्टर्स का मानना है कि खर्राटे लेना सिर्फ नींद की समस्या नहीं है. लंबे समय तक अनदेखा करने पर यह हार्ट और ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है. कुछ रिसर्च बताती हैं कि स्लीप एपनिया की स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है.
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य रिसर्च और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है. इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या इलाज का ऑपशंस न समझें.)