आज के समय में लोगों का जीवन इतना व्यस्त हो गया है कि उन्हें रेडी टू ईट या रेडीमेड फूड खाने की आदत हो गई है. बदलते लाइफस्टाइल और खाने-पीने का असर व्यक्ति की फिजिकल हेल्थ के साथ मेंटल हेल्थ पर भी पड़ रहा है. इसी वजह से आजकल लोगों में एंग्जाइटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ रहा है.
क्या आप जानते हैं कि डिप्रेशन का एक मुख्य कारण अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन भी है. हम जो खाते हैं वह सीधे मस्तिष्क की संरचना, कार्य और मूड को प्रभावित करता है. डीकिन यूनिवर्सिटी और कैंसर काउंसिल विक्टोरिया में किए गए शोध के मुताबिक, प्रोसेस्ड फूड एंग्जाइटी और डिप्रेशन का एक मुख्य कारण है. अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड को केमिकल के साथ और अधिक प्रोसेस किया जाता है, जिसकी वजह से ये हमारे दिमाग पर गलत प्रभाव डालता है.
प्रोसेस्ड फूड से कैसे खराब होती है मेंटल हेल्थ?
1. ये बात तो हम सभी जानते हैं कि प्रोसेस्ड फूड हमारी ओवरऑल हेल्थ के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं. प्रोसेस्ड फूड्स में शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा पाई जाती है, जो ब्लड शुगर के स्पाइक्स और क्रैश का कारण बन सकते हैं. इसके चलते चिड़चिड़ापन हो सकता है. इसके अतिरिक्त बहुत अधिक चीनी का सेवन अवसाद को बढ़ावा दे सकता है.
2. प्रोसेस्ड फूड खाने से मेमोरी वीक होने के साथ दिमाग कमजोर होने लगता है. वहीं, इससे डिप्रेशन और डिमेंशिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
3. सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है. यह नींद और भूख को नियंत्रित करने, मूड को ठीक करने और दर्द को कम करने में मदद करता है. जो लोग प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, उनके दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर असंतुलित हो जाता है और फिर इस वजह से व्यक्ति को मेंटल हेल्थ प्रोब्लम्स होने लगती है.
घर का बना खाना ही है बेहतर
डॉक्टर्स का भी यही कहना है कि भले ही आपका लाइफस्टाइल कितनी ही बिजी हो, लेकिन घर का बना ताजा खाना ही खाएं. जल्दबाजी में प्रोसेस्ड फूड खा तो लेते हैं, लेकिन फिर आगे चलकर इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इसलिए बेहतर यही है कि पारंपरिक घर का बना भोजन ही खाना चाहिए, इससे एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियां भी नहीं होती हैं.