भारत में अगर औसत की बात करें, तो अब ज्यादातर कपल 2 बच्चे ही पसंद कर रहे हैं. भारत की नेशनल और इंटरनेशनल डेटा (NFHS-5 और UN रिपोर्ट्स) के मुताबिक, भारत की 'टोटल फर्टिलिटी रेट' (TFR) गिरकर 1.9 से 2.0 के बीच आ गई है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि औसतन एक भारतीय महिला अपने जीवनकाल में लगभग 2 बच्चों को जन्म दे रही है. ले किन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चों की संख्या आपकी उम्र पर भी असर डाल सकती है?
कुछ समय पहले एक रिसर्च हुई थी जिसमें वैज्ञानिकों ने लाखों लोगों के डेटा का एनालेसिस किया और कहा था कि किसके कितने बच्चे हैं परिवार का साइज और आपकी उम्र के बीच एक गहरा रिलेशन होता है और वो एक-दूसरे से संबंधित होता है. यह रिसर्च आपके शरीर और उम्र पर पड़ने वाले सीधे असर की पोल खोलती है.
क्या कहती है रिसर्च?
हेलसिंकी यूनिवर्सिटी (University of Helsinki) और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने डेटा का एनालेसिस करके एक पैटर्न निकाला जिसके मुताबिक, जिन लोगों के 2 बच्चे होते हैं, उनकी लंबी उम्र तक जीवित रहने की संभावना उन लोगों की तुलना में अधिक होती है जिनके कोई बच्चे नहीं हैं या फिर 2 से अधिक बच्चे हैं. उन्होंने पाया कि ये 2 का आंकड़ा एक तरह का बैलेंस पॉइंट है जो फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए सबसे सटीक बैठता है.
क्या है ये 2 बच्चे वाला आंकड़ा?
रिसर्च में एक्सपर्ट का कहना है कि 2 बच्चे होने से माता-पिता को सोशल और मेंटल सपोर्ट मिलता है जो उनके स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है. लेकिन जैसे ही ये आंकड़ा 2 से अधिक होता है तो फिजिकल और आर्थिक दबाव बढ़ने लगता है. रिसर्चर्स का तर्क है कि बहुत बड़ी फैमिली होने से शरीर पर अधिक बोझ पड़ता है और संसाधनों की कमी होने से इसका सीधा असर आपकी सेहत पर दिखता है.
वहीं रिसर्चर्स ये भी दावा करते हैं कि जिसकी कोई संतान नहीं है, उन्हें बुढ़ापे में अकेलेपन और कम सोशलाइजेशन के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे बुढ़ापे में एक 'हेल्थ सपोर्ट सिस्टम' की तरह काम करते हैं, जो मानसिक रूप से व्यक्ति को जवान रखने में मदद करता है.
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
रिसर्चर्स का मानना है कि यह सब कुदरत का खेल है. इवोल्यूशनरी थ्योरी के हिसाब से हमारा शरीर अपने वंश आगे बढ़ाने और किसी भी कठिन परिस्थिति, बीमारी या माहौल में खुद को जिंदा रखने के बीच समझौता करता है. हालांकि, आज की मॉडर्न मेडिकल सुविधाएं और बेहतर खान-पान इस प्रभाव को काफी हद तक मैनेज कर सकते हैं लेकिन कुदरती तौर पर 2 बच्चों का ही आंकड़ा सबसे सुरक्षित है.