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हर वक्त कुछ खाने की आदत कर सकती है 'बीमार', ऐसे पाएं काबू

कई लोग ऐसे होते हैं जिनको खाने-पीने की लत लग जाती है. वो थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खा लेते हैं. उनका खाने पीने का कोई टाइम नहीं होता, न ही भूख से इसका कोई वास्ता होता है. ये आदतें धीरे-धीरे हमें बीमार करती हैं. अध‍िक वजन से लेकर स्लीपिंग डिसआर्डर और यहां तक कि इससे मेंटल हेल्थ भी प्रभावित होने लगती है. आइए-एक्सपर्ट से जानें कि कैसे इस आदत पर हम काबू पा सकते हैं. 

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प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने खाने-पीने को लेकर पूरी तरह जागरूक होते हैं. हम खाने में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, वाटर इनटेक कितना ले रहे हैं, इसके बारे में भी हम इतना ध्यान नहीं रखते. वहीं कई लोग ऐसे होते हैं जिनको खाने-पीने की लत लग जाती है. वो थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खा लेते हैं. उनका खाने पीने का कोई टाइम नहीं होता, न ही भूख से इसका कोई वास्ता होता है. ये आदतें धीरे-धीरे हमें बीमार करती हैं. अध‍िक वजन से लेकर स्लीपिंग डिसआर्डर और यहां तक कि इससे मेंटल हेल्थ भी प्रभावित होने लगती है. आइए-एक्सपर्ट से जानें कि कैसे इस आदत पर हम काबू पा सकते हैं. 

इहबास दिल्ली के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि हालिया रिपोर्टस बताती हैं कि भारतीयों में ईटिंग डिसऑर्डर (ईडी) की समस्‍या बढ़ी है. साल 1995 के बाद से ईडी के अस्पताल-आधारित अध्ययन और सर्वेक्षणों में सामने आया है क‍ि भारत में आर्थिक परिवर्तन, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, कार्पोरेट में कर्मचारियों में वृद्धि, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी, वैश्वीकरण के प्रभाव और लक्षित विज्ञापनों द्वारा आहार पैटर्न में बदलाव के कारण ये समस्‍या बढ़ी है.

ईटिंग डिसऑर्डर के चलते लोगों में नींद की समस्या भी बढ़ी है. रात में खाने का वक्त तय न होने से कई बार हैवी डिनर लेकर तुरंत सो जाते हैं, इससे उनकी नींद की क्वालिटी काफी प्रभावित होती है. एसिड‍िक फूड खाने वाले लोगों में रात में सोने की कमी देखी जाती है. कम नींद और बढ़ता वजन भी कुछ लोगों में मानसिक समस्या को जन्म दे देता है. वहीं कुछ लोग बुलिमिया डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं. ऐसे लोग भी अपने खाने की आदत में काबू नहीं रख पाते. 

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बुलिमिया से पीड़ि‍त व्यक्ति बिना वजह जरूरत से ज्यादा खाता है. इसे इमोशनल ईटिंग भी कहा जाता है. कभी परेशान होने पर स्ट्रेस की अवस्था में वो कुछ न कुछ भी खा लेता है जिसे उसे एक अलग तरह का सुकून मिलता है. पीड़‍ित व्यक्त‍ि चाहकर भी अपने खान-पान को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं. बहुत कम खाने की आदत वाला रोग एनोरेक्सिया और ज्यादा खाने वाले बुलीमिया से पीड़‍ित हो सकते हैं. ये डिसऑर्डर आमतौर पर 15 वर्ष की उम्र से शुरू होता है. लोग तनाव को कम करने या घर में होते हैं तो बार बार खाने पीने की तरफ भागते हैं. प्रोफेशनल्स की मदद से आप ये समझ सकते हैं कि आपकी खानपान की हैबिट कहीं डिसऑर्डर तो नहीं है. अगर ऐसा है तो आपको इसके लिए काउंसिलिंग की सलाह दी जाएगी. 

ऐसे करें बचाव, ये 5 टिप्‍स अपनाएं

  •   लाइफस्‍टाइल को हेल्‍दी और रूटीन पर रखें. कोश‍िश करें कि नाश्‍ता और खाना वक्‍त पर, पाचक और पौष्टिक हो.
  •  हेल्दी फूड और इसके बॉडी पर असर को लेकर अध‍िक से अधि‍क जानकारी जुटाएं. शरीर के वजन के हिसाब से डाइट अपनाएं.      
  • अपने खाने का एक रूटीन बनाएं और गैप देकर ही कुछ खाएं, हमेशा कुछ खा लेने की आदत से बचें. 
  • रात में सोने से दो घंटे पहले खाना खा लें, इससे आपको गहरी नींद में समस्या नहीं आएगी. 
  • अगर दोबारा या बार बार खाने का मन करता है तो कोश‍िश करें क‍ि हेल्‍दी चीज जैसे फल या पत्‍तेदार सलाद लें.
  • जब भूख लगे तब खाएं, न जबरदस्ती भूखे रहें, न पेट भरा होने पर कुछ खाने की आदत डालें.

 

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