सुरों की मल्लिका आशा भोंसले का आज रविवार को निधन हो गया. आशा भोंसले के निधन से केवल बॉलीवुड ही नहीं बल्कि पूरा देश गमगीन है. उन्होंने अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ी है जिसने आठ दशकों से भी ज्यादा समय तक भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया को आकार दिया.
आशा, जो मंगेशकर परिवार का एक अहम हिस्सा थीं, उन्हें शनिवार शाम को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में बहुत ज्यादा थकान और सीने में इन्फेक्शन के कारण भर्ती कराया गया था. यह जानकारी उनकी पोती जनाई भोसले ने इंस्टाग्राम पर शेयर की थी. भोसले के परिवार में उनके बेटे आनंद और उनके पोते-पोतियां हैं.
इस वजह से हुआ निधन
PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने इस दुखद खबर की पुष्टि करते हुए कहा, 'आशा भोसले ने आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली. उनका निधन मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण हुआ.'
आनंद ने अस्पताल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'उनका निधन आज हो गया. जो लोग उन्हें अपनी अंतिम श्रद्धांजलि देना चाहते हैं. वो कल सुबह 11 बजे उनके घर आ सकते हैं. उनका अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा.'
फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी और स्लीप मेडिसिन डिपार्टमेंट में हेड और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रवि शेखर झा ने indianexpress.com बताया कि बहुत ज्यादा उम्र के लोगों में सीने का इन्फेक्शन या LRTI आम बात है और इसके कुछ जरूरी कारण हैं.
उम्र के साथ होती है ज्यादा तकलीफ
उन्होंने कहा, उम्र बढ़ने के साथ शरीर का डिफेंस सिस्टम कमजोर हो जाता है. खांसी का रिफ्लेक्स उतना मजबूत नहीं रहता (मतलब मरीज आसानी से बलगम बाहर नहीं निकाल पाते), इसलिए म्यूकस और कीटाणु सांस की नली से ठीक से साफ नहीं हो पाते. 90 साल से ज्यादा उम्र के कई लोगों को निगलने में भी कमजोरी होती है, इसलिए थोड़ी मात्रा में खाना या लार बिना किसी साफ घुटन के फेफड़ों में जा सकती है. इससे बार-बार इन्फेक्शन होता है.
साथ ही जब कोई व्यक्ति ज्यादा समय लेटे हुए या बैठे हुए बिताता है तो फेफड़े पूरी तरह से फैल नहीं पाते. इससे फेफड़ों के निचले हिस्सों में वेंटिलेशन ठीक से नहीं हो पाता जिससे इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है.
डॉ. झा ने कहा. उनके अनुसार, पहले से मौजूद बीमारियां जैसे COPD, दिल की बीमारी, या डायबिटीज इस खतरे को और बढ़ा देती हैं. हल्का डिहाइड्रेशन भी स्राव को गाढ़ा कर सकता है और उसे साफ करना मुश्किल बना सकता है.
थकान चेतावनी क्यों है?
उन्होंने बताया कि बुजुर्गों में संक्रमण के लक्षण हमेशा सामान्य नहीं होते. वो कहते हैं, 'बुखार या खांसी के बजाय थकान अक्सर इसका पहला संकेत होता है. ज्यादा उम्र के लोगों में पारंपरिक लक्षण दिखाई नहीं देते. उन्हें बहुत कमजोरी, बहुत नींद या भ्रम महसूस हो सकता है.'
बचाव है इलाज
1-बुजुर्गों में फेफड़ों के संक्रमण से बचने के लिए केवल दवाइयां ही काफी नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली में छोटे बदलाव और सतर्कता भी अनिवार्य है. डॉ. झा के अनुसार, इन्फ्लूएंजा और न्यूमोकोकस जैसे संक्रमणों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाना सबसे प्रभावी कदम है. यह फेफड़ों की सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.
2-इसके अलावा मुंह की बेहतर साफ-सफाई से हानिकारक बैक्टीरिया का बोझ कम होता है जिससे उनके फेफड़ों तक पहुंचने का जोखिम घट जाता है.
3-बुजुर्गों को बैठने, चलने और सांस लेने के सरल व्यायामों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. इससे फेफड़ों का फैलाव बेहतर होता है और कार्यक्षमता बढ़ती है.
4-साथ ही बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए सही पोषण और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है.
5-जिन लोगों को खाना निगलने में कठिनाई होती है, उन्हें खाना खिलाते समय सही मुद्रा और सही तकनीक का ध्यान रखना चाहिए, ताकि भोजन फेफड़ों की नली में न जाए.
संक्षेप में कहें तो यह बीमारी असल में उम्र के साथ फेफड़ों की घटती क्षमता, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और जीवनशैली के कारकों का एक जटिल मेल है. हालांकि, रोकथाम के ये छोटे-छोटे प्रयास एक बड़ा सकारात्मक अंतर पैदा कर सकते हैं और कीमती जान बचा सकते हैं.