
पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने के बाद टीएमसी यानी तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. टीएमसी ने पार्टी विरोधी बयानबाजी के आरोप में अपने तीन प्रवक्ताओं को सस्पेंड कर दिया था.
इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कुछ लोगों का कहना है कि बंगाल में अब बड़ी संख्या में मुसलमान, टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. वीडियो में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग बीजेपी का पटका पहनकर किसी बिल्डिंग से बाहर आते हुए नजर आ रहे हैं.
पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है. लंबे समय से इन्हें टीएमसी का मजबूत वोट बैंक माना जाता रहा है. इसी वजह से वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
एक्स पर एक व्यक्ति ने लिखा, 'बंगाली आदमी बड़ा सयाना. बंगाली आदमी का कहना है कि जो भी प्यार से मिला हम उसी के हो लिए. कल तक दीदी आज दादा और इसी में है फ़ायदा. सत्ता विरोधी बनकर विपक्ष का काम करना तुम्हारी जिम्मेदारी नही ये उन पार्टी को जिम्मेदारी जिनकी सत्ता गई है वो जाने. क्योंकि उनका भी अब यही कहना है कि जाओ मरो.'

एक ने लिखा, 'BJP में घुसपेठ शरू हो चुकी है. पहले बांग्लादेश से बंगाल मे घुसपेठ, अब BJP मे. इसको रोकना होगा. वरना BJP और TMC मे कोई अंतर नहीं रहेगा.'
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं, बल्कि असम का है. यहां इसी साल मार्च में कई मुसलमान बीजेपी में शामिल हुए थे.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये ‘न्यूज 18 असम एंड नॉर्थ ईस्ट’ की वीडियो रिपोर्ट में मिला. यहां असमिया भाषा में लिखे कैप्शन के मुताबिक ये वीडियो असम के पाथारकान्दी का है और चुनाव के वक्त का है. ये वीडियो रिपोर्ट 27 मार्च की है. इतनी बात तो यहीं साफ हो जाती है कि वीडियो पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद का नहीं है.
इस जानकारी के साथ सर्च करने पर हमें असम के कई न्यूज आउटलेट्स की रिपोर्ट्स में ये वीडियो मिला. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 मार्च को असम के पाथारकान्दी विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी प्रत्याशी कृष्णेंदु पॉल की मौजूदगी में कई ‘मियां मुस्लिम’ बीजेपी में शामिल हुए थे. कृष्णेंदु इस सीट से चुनाव जीतकर विधायक बन गए हैं.
असम में ‘मियां मुस्लिम’ उन लोगों को कहा जाता है जिनके पूर्वज ब्रिटिश शासन के दौरान तत्कालीन पूर्वी बंगाल, यानी आज के बांग्लादेश से आकर, असम में बस गए थे.
कृष्णेंदु पॉल ने 26 मार्च को अपने फेसबुक अकाउंट पर इस कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें भी शेयर की थीं.
क्या पश्चिम बंगाल में वाकई ऐसा हुआ है?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता बदलने के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं का नई सत्ताधारी पार्टी की तरफ झुकाव होना कोई नई बात नहीं है. राज्य में पहले भी कई बार ऐसा देखा गया है. हालांकि, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ कहा है कि हिंसा, घोटाले और अत्याचार से जुड़े लोगों के लिए बीजेपी के दरवाजे बंद हैं. फिलहाल पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मुस्लिमों के बीजेपी में शामिल होने की कोई पुख्ता खबर नहीं है.
कुल मिलाकर साफ है कि वायरल हो रहे वीडियो के साथ गलत दावे किए जा रहे हैं.