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फैक्ट चेक: किसान आंदोलन में 'बिना मूछों वाला सरदार'? भ्रामक है ये पोस्ट

तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि किसान आंदोलन में एक मुस्लिम शख्स सरदार का भेष बनाकर शामिल हुआ. तस्वीर में पगड़ी पहने एक आदमी को देखा जा सकता है. देखने में ऐसा लग रहा है कि आदमी की दाढ़ी है लेकिन मूछें नहीं हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर

किसान आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी कई पोस्ट वायरल हैं जिनके जरिए कहा जा रहा है कि इस आंदोलन की आड़ में देश को बांटने की साजिश हो रही है. कुछ लोग किसानों के इस विरोध-प्रदर्शन में खालिस्तानी और पाकिस्तानी एंगल भी निकाल रहे हैं.

इसी कड़ी में एक और तस्वीर खूब शेयर की जा रही है. तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि किसान आंदोलन में एक मुस्लिम शख्स सरदार का भेष बनाकर शामिल हुआ. तस्वीर में पगड़ी पहने एक आदमी को देखा जा सकता है. देखने में ऐसा लग रहा है कि आदमी की दाढ़ी है लेकिन मूछें नहीं हैं. इसी को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स कह रहे हैं कि ये एक मुस्लिम है जो सरदार बनकर किसान आंदोलन में पहुंच गया है.

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा भ्रामक है. तस्वीर के धुंधली होने या इसके साथ छेड़छाड़ करने की वजह से आदमी की मूछें नहीं दिख रही हैं. इसी तस्वीर से जुड़े एक वीडियो में आदमी की मूछें अच्छे से देखी जा सकती हैं.

सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं, "बिना मूँछ वाला दुनिया का इकलौता सरदार किसान आंदोलन में पहुंचा है, अब्दुल मियां कान खोलकर सुन लो, ये पब्लिक है सब जानती है". तस्वीर को भ्रामक दावों के साथ सोशल मीडिया पर हजारों में शेयर किया जा चुका है. पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.

कैसे पता चली सच्चाई?

वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च की मदद से खोजने पर हमें कोई जानकारी नहीं मिली. लेकिन इसी तरह की एक फेसबुक पोस्ट में हमें एक व्यक्ति का कमेंट मिला. इस यूजर ने  एक फेसबुक लिंक डालते हुए लिखा था कि ये तस्वीर एडिट की गई है.

इस फेसबुक लिंक से हम एक वीडियो पर पहुंचे जिसे 29 नवंबर को 'Hindustan LIVE Farhan Yahiya' नाम के एक पेज ने अपलोड किया था. दरअसल, ये एक फेसबुक लाइव था जिसे आंदोलनकारी किसानों के साथ फरहान याहिया नाम के पत्रकार ने किया था. ये फेसबुक लाइव दिल्ली की सिंधु बॉर्डर पर हुआ था.

इस वीडियो में 2.47 मिनट के बाद वायरल तस्वीर वाले व्यक्ति को देखा जा सकता है. यहां साफ तौर पर दिख रहा है कि इस व्यक्ति की दाढ़ी के साथ मूछें भी हैं. हमें ये नहीं पता चल पाया कि ये व्यक्ति कौन है लेकिन वीडियो देख कर साबित हो जाता है कि पोस्ट में किया जा रहा दावा गलत है. तस्वीर के जरिये भ्रम इसलिए फैला क्योंकि ये धुंधली है या शायद इसे एडिट किया गया है.

ये ऐसी पहली पोस्ट नहीं है जिसके जरिये किसान आंदोलन को एक विशेष समुदाय से जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है. नजीर मोहम्मद नाम के एक व्यक्ति की तस्वीर इस समय खूब शेयर की जा रही है जिसमें वो हरे रंग की पगड़ी पहने हैं. नजीर की फेसबुक प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट और उनकी इस तस्वीर के साथ झूठा दावा किया गया कि मुस्लिम शख्स सरदार बनकर किसानों के साथ प्रदर्शन कर रहा है. फैक्ट चेकिंग वेबसाइट बूम लाइव ने इस भ्रामक पोस्ट की सच्चाई बताई है जिसे यहां पढ़ा जा सकता है.

इसी तरह किसान आंदोलन से जुड़ी महिंदर कौर नाम कि एक बुजुर्ग महिला की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई. कंगना रनौत सहित कई लोगों ने दावा किया कि ये शाहीन बाग वाली बिलकिस दादी हैं जो अब पैसे लेकर किसान आंदोलन में चली गई हैं. इंडिया टुडे ने इस दावे को भी ख़ारिज करते हुए खबर छापी है.

इसी कड़ी में एक नौ साल पुराने वीडियो के साथ दावा किया गया कि नजीर मोहम्मद नाम का एक एसडीपीआई कार्यकर्ता सरदार के भेष में किसान आंदोलन में पंहुचा. ये भी कहा गया कि पुलिस ने इसे हरियाणा से गिरफ्तार किया है. इंडिया टुडे की पड़ताल में ये दावा भी भ्रामक निकला.

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

'बिना मूछों वाले इस सरदार' की तस्वीर बता रही है कि कैसे ये मुस्लिम आदमी सरदार बनकर किसान आंदोलन में पंहुचा है.

निष्कर्ष

तस्वीर के धुंधली होने या इसके साथ छेड़छाड़ करने की वजह से आदमी की मूछें नहीं दिख रही हैं. इसी तस्वीर से जुड़े वीडियो में आदमी की मूछें अच्छे से देखी जा सकती हैं.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
सोशल मीडिया यूजर्स
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