
किसी विमान से निकाले जा रहे ताबूतों और उन ताबूतों के पास खड़े गमगीन लोगों की तस्वीरें शेयर करते हुए कुछ लोग कह रहे हैं कि ये कुवैत से लाए गए 20 भारतीयों के शव हैं, जो मध्य पूर्व युद्ध की भेंट चढ़ गए.
एक थ्रेड्स यूजर ने इन तस्वीरों को पोस्ट करते हुए लिखा, 'कुवैत से 20 भारतीयों का शव भारत पहुंचा. भारतीय न्यूज चैनलों से इतनी बड़ी खबर लगभग गायब. और ये सभी लोग ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध में मारे गए हैं. खबरें क्यों छुपाई जा रही हैं और किसके कहने पर?'

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये तस्वीरें हाल-फिलहाल की नहीं, साल 2024 की हैं जब एक बिल्डिंग में आग लगने की वजह से 45 भारतीय मजदूरों की मौत हो गई थी.
हालांकि ये बात सच है कि हाल ही में 20 लोगों के शव कुवैत से भारत लाए गए हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ एक की मौत यूएस, इजरायल और ईरान युद्ध के चलते हुई है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
रिवर्स सर्च करने से हमें दोनों वायरल तस्वीरें 14 जून, 2024 की इंडिया टुडे की रिपोर्ट में मिलीं. ये खबर कुवैत में हुई एक घटना के बारे में है जिसमें कुवैत के मंगाफ शहर की एक रिहायशी इमारत में आग लगने से 45 भारतीय मजदूरों की जान चली गई थी. उन्हीं मजदूरों के शव एयरफोर्स के विशेष विमान से भारत लाए गए थे. इनमें 23 केरल के, सात तमिलनाडु के, तीन-तीन आंध्र प्रदेश व उत्तर प्रदेश के, दो ओडिशा के, और एक-एक महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, और झारखंड के थे.
कुवैत फायर फोर्स ने उस वक्त इस घटना से संबंधित अपने बयान में कहा था कि ये आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी.
बीबीसी के अनुसार, जिस इमारत में ये घटना हुई, उसमें 176 भारतीय मजदूर रहते थे. घटना में 50 लोगों की जान गई थी जिनमें से 45 भारतीय और तीन फिलीपींस के थे. दो लोगों की पहचान नहीं हो पाई थी.
कुवैत से जिन 20 लोगों के शव भारत आए, क्या है उनकी कहानी?
एक अप्रैल को कुवैत से 20 भारतीयों के शव कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाए गए. इनमें से एक व्यक्ति ऐसे थे जिनकी मौत की वजह ये जंग बनी. 37 साल के संथलासेल्वम कृष्णन, जो तमिलनाडु के रहने वाले थे, उनकी मौत एक वॉटर डीसेलाइनेशन प्लांट पर हुए ड्रोन हमले में हुई थी.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, बाकी 19 लोगों की मौत प्राकृतिक कारणों से और अलग-अलग वजहों से हुई थी. कोच्ची इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के एक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इन लोगों की मौत कुवैत के अलग-अलग शहरों में हुई थी और युद्ध की वजह से फ्लाइट्स के संचालन में रुकावट के चलते उन्हें लंबे समय तक भारत नहीं लाया जा सका. 20 में से 17 शवों को अलग-अलग राज्यों में भेज दिया गया.
मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स के सेक्रेट्री असीम आर महाजन ने 30 मार्च को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मध्य पूर्व के युद्ध में अभी तक आठ भारतीय नागरिकों की मौत हुई है और एक व्यक्ति गुमशुदा है.
कुवैत और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े मामलों पर नजर रखने वाली न्यूज वेबसाइट अरब टाइम्स की रिपोर्ट में भी यही बताया गया है कि हाल ही में जिन 20 लोगों के शव कुवैत लाए गए, उनमें से एक की मौत ड्रोन अटैक में हुई. वहीं बाकी लोगों की मौत, प्राकृतिक कारणों से और अलग-अलग वजहों से हुई थी.
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व की जंग में फारस की खाड़ी में तीन, ओमान में दो, सउदी अरब (रियाद) में एक, यूएई (अबू धाबी) में एक और कुवैत में एक भारतीय नागरिक मारा गया था.
हमें किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसी जानकारी नहीं मिली कि कुवैत में 20 लोग, मध्य पूर्व युद्ध के चलते मारे गए.
साफ है, एक पुरानी फोटो के साथ कुवैत में मध्य पूर्व जंग के चलते 20 लोगों के मारे जाने का गलत दावा किया जा रहा है.