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फैक्ट चेक: छेड़छाड़ को लेकर बने काल्पनिक वीडियो को सोशल मीडिया पर दिया गया सांप्रदायिक रंग

वीडियो देखने में किसी सीसीटीवी फुटेज जैसा लग रहा है जिसमें एक बस स्टैंड पर तीन लड़के एक लड़की के साथ बदतमीजी करते हुए नजर आ रहे हैं. इस बीच वहीं मौजूद एक दूसरी लड़की आ जाती है और लड़को की आंखों में कुछ स्प्रे कर देती है.

छेड़छाड़ को लेकर बने काल्पनिक वीडियो को दिया गया सांप्रदायिक रंग छेड़छाड़ को लेकर बने काल्पनिक वीडियो को दिया गया सांप्रदायिक रंग

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि तीन मुस्लिम लड़के दो हिन्दू लड़कियों को छेड़ रहे थे, जिसके जवाब में लड़कियों ने तीनों की आंखें फोड़ दीं. वीडियो देखने में किसी सीसीटीवी फुटेज जैसा लग रहा है जिसमें एक बस स्टैंड पर तीन लड़के एक लड़की के साथ बदतमीजी करते हुए नजर आ रहे हैं. इस बीच वहीं मौजूद एक दूसरी लड़की आ जाती है और लड़को की आंखों में कुछ स्प्रे कर देती है. इसके बाद आंखों में जलन के कारण लड़को की हालत खराब हो जाती है और वो जमीन पर गिर कर अपनी आंखें मलने लगते हैं.  

क्या है सच्चाई? इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल वीडियो किसी असली घटना का नहीं है. वीडियो काल्पनिक है और इसे जागरूकता फैलाने के मकसद से बनाया गया था. एक ट्विटर यूजर ने वीडियो को साझा करते हुए कैप्शन में लिखा, "यह जिहादी गुंडे इन लड़कियों को छेड़ रहे थे ,इन लड़कियों ने तीनों की आंखें फोड़ दीं, अब यह तीनों जिहादी जमीन पर लोट रहे हैं. हिन्दुओं अपनी लड़की को ऐसी शिक्षा दो जो उनकी तरफ आंख उठाये वह उसकी आंख  निकाल ले". इसी कैप्शन के साथ वीडियो फेसबुक पर भी शेयर किया गया है. वायरल पोस्ट का आर्कइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.कैसे पता की सच्चाई? इन-विड टूल की मदद से रिर्वस सर्च करने पर हमें ये वीडियो "LOBO 619" नाम के एक फेसबुक पेज पर मिला. इस पेज पर वायरल वीडियो पिछले साल 29 फरवरी को अपलोड किया गया था. यहां वीडियो के साथ दिए गए कैप्शन में ये बात साफ तौर पर लिखी है कि ये पटकथा पर आधारित वीडियो है और इसे लोगों को जागरूक करने के लिए बनाया गया था. ये जानकारी वीडियो के आखिर में दिखाए गए डिस्क्लेमर में भी पढ़ी जा सकती है. दरअसल, इस वीडियो के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि लड़कियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए. "LOBO 619" फेसबुक पेज पर इस तरह के कई और शिक्षाप्रद वीडियोज़ भी मौजूद हैं.

 

यहां हमारी जांच में साफ हो जाता है कि एक काल्पनिक वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि पटकथा पर आधारित किसी वीडियो को सांप्रदायिक एंगल के साथ शेयर किया गया हो. हाल ही में ऐसे ही एक वीडियो के साथ दावा किया गया था ‌कि एक मुस्लिम व्यक्ति और उसके साथी ने एक दंपत्ति के गहने लूट लिए. "आजतक" ने इसका खंडन करते हुए खबर भी की थी. पिछले महीने भी एक वायरल वीडियो के साथ दावा किया गया था कि एक मुस्लिम लड़के ने अपनी हिंदू दोस्त को नशे की दवा मिलाकर पानी पिलाने की कोशिश की, ताकि वो उसकी इज्जत लूट सके. हमारी तफ्तीश में यह वीडियो भी काल्पनिक निकला था. इस पर की गई हमारी खबर यहां पढ़ी जा सकती है.

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे छेड़छाड़ कर रहे मुस्लिम लड़कों को हिन्दू लड़कियों ने सबक सिखाया.

निष्कर्ष

ये वीडियो काल्पनिक है और इसे जागरूकता फैलाने के मकसद से बनाया गया था.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
सोशल मीडिया यूजर्स
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