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अबॉर्शन लॉ पर डिबेट में ट्रंप-कमला हैरिस में दिखा जबरदस्त तनाव, जानें- अमेरिका में कैसे बना ये बड़ा मुद्दा

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस के बीच प्रेसिडेंशियल डिबेट हुई. इस डिबेट में कई अहम मुद्दों पर दोनों के बीच जोरदार बहस हुई. लेकिन अबॉर्शन के मुद्दे पर दोनों के बीच तीखी बहस देखने को मिली. ऐसे में जानते हैं कि अबॉर्शन को लेकर अमेरिका में नियम क्या हैं? और कैसे अबॉर्शन अमेरिकी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन गया?

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अमेरिकी चुनाव में इस बार अबॉर्शन बड़ा मुद्दा बना हुआ है.
अमेरिकी चुनाव में इस बार अबॉर्शन बड़ा मुद्दा बना हुआ है.

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले मंगलवार को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रेसिडेंशियल डिबेट हुई. ये पहली बार था जब हैरिस और ट्रंप के बीच डिबेट हुई. इस डिबेट को ABC न्यूज ने होस्ट किया था. 90 मिनट की इस डिबेट में हैरिस और ट्रंप के बीच कई मुद्दों पर जोरदार बहस हुई. जिन मुद्दों पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई, उनमें अबॉर्शन का मुद्दा भी शामिल था.

इस दौरान ट्रंप ने आरोप लगाया कि अगर कमला हैरिस राष्ट्रपति बनती हैं तो वो अबॉर्शन से जुड़े नियम बदल देंगीं. इस पर कमला ने ट्रंप पर झूठ बोलने का आरोप लगाया.

जब ट्रंप से सवाल किया गया कि आपने कहा था कि 6 हफ्ते बाद भी अबॉर्शन की अनुमति देंगे, लेकिन आप पलट गए. तो ट्रंप ने जवाब देते हुए कहा, 'डेमोक्रेटिक पार्टी प्रेग्नेंसी के 9वें महीने में अबॉर्शन का अधिकार देना चाहती है. वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर ने कहा था कि बच्चा पैदा होने के बाद देखा जाएगा कि उसका क्या करना है. जरूरत पड़ी तो उसे मार देंगे. इसलिए मैंने अपना पक्ष बदला.'

इस पर पलटवार करते हुए कमला हैरिस ने कहा, 'ट्रंप सिर्फ झूठ बोल रहे हैं. ट्रंप की वजह से आज 20 राज्यों में अबॉर्शन पर बैन है. इसकी वजह से एक रेप पीड़िता को अपने लिए फैसला लेने में दिक्कत आ रही है.'

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कमला हैरिस ने कहा कि ट्रंप नहीं बता सकते कि महिलाओं को अपने शरीर के साथ क्या करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति बनी तो अबॉर्शन को मंजूरी देने वाला कानून लाया जाएगा.

दरअसल, अमेरिकी चुनाव में अबॉर्शन एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कमला हैरिस ने संघीय स्तर पर अबॉर्शन के अधिकार को बहाल करने का वादा किया है. जबकि, ट्रंप का मानना है कि इस मुद्दे पर फैसला लेने का अधिकार राज्यों को होना चाहिए.

अबॉर्शन कैसे बना बड़ा मुद्दा?

दरअसल, दो साल पहले तक अमेरिका में अबॉर्शन का अधिकार था. 1973 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रो बनाम वेड मामले में फैसला देते हुए महिलाओं अबॉर्शन को अधिकार दिया था.

रो बनाम वेड मामले में फैसला सुनाते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक महिला को अपनी प्रेग्नेंसी खत्म करने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी महिलाओं को प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते तक अबॉर्शन करने का अधिकार दे दिया था. ये फैसला संघीय स्तर पर लागू हुआ, जिस कारण देशभर की सभी महिलाओं को अबॉर्शन का अधिकार मिल गया. 

लेकिन, जून 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया था कि अबॉर्शन को लेकर अमेरिका के अलग-अलग राज्य अपने हिसाब से कानून बना सकते हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से पहले अमेरिका के 13 राज्य अबॉर्शन को गैरकानूनी करार देने वाले कानून लागू कर चुके थे. और इस फैसले के बाद अब तक कई राज्य अबॉर्शन पर पूरी तरह या फिर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा चुके हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका के 22 राज्य ऐसे हैं, जहां अबॉर्शन पर या तो पूरी तरह प्रतिबंध है या फिर आंशिक रूप से.

अबॉर्शन को लेकर अलग-अलग राज्यों में क्या नियम?

अमेरिका के 14 राज्यों- अलाबामा, अर्कांसास, लुईसियाना, मिसिसिपी, नॉर्थ डकोटा, साउथ डकोटा, ओक्लाहामा, टेनेसी, इडाहो, इंडियाना, केंटकी, मिसूरी, टेक्सास और वेस्ट वर्जीनिया में अबॉर्शन पर पूरी तरह से रोक है.

वहीं, आठ राज्य ऐसे हैं, जहां एक समय सीमा तक अबॉर्शन की अनुमति है. फ्लोरिडा, जॉर्जिया, आयोवा और साउथ कैरोलिना में प्रेग्नेंसी के छठे हफ्ते तक अबॉर्शन कराया जा सकता है. नेब्रास्का और नॉर्थ कैरोलिना में ये सीमा 12 हफ्तों की है. एरिजोना में 15 हफ्ते तक अबॉर्शन कराने की अनुमति है. जबकि, यूटा राज्य की महिलाएं 18 हफ्ते तक अबॉर्शन करवा सकतीं हैं.

जबकि, अमेरिका के 26 राज्यों- अलास्का, कंसास, न्यू हैम्पशायर, ओहायो, वर्जीनिया, विस्कॉन्सिन, वॉशिंगटन डीसी, कैलिफोर्निया, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, मेन, मैरीलैंड, मैसाचुएट्स, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन, पेनसिल्वेनिया, रोड आइलैंड, वर्माउंट और वॉशिंगटन में अबॉर्शन करवाना अब भी कानूनी हक है. 

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इन राज्यों में 22 से 24 हफ्ते के बीच महिलाएं अबॉर्शन करवा सकती हैं. अलास्का, वॉशिंगटन डीसी, कोलोराडो, मिनेसोटा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, ओरेगन और वर्माउंट ऐसे राज्य हैं, जहां अबॉर्शन करवाने की कोई सीमा नहीं है. यानी, यहां प्रेग्नेंसी के किसी भी हफ्ते तक अबॉर्शन करवाया जा सकता है.

जबकि, दो राज्य- मोंटाना और व्योमिंग में अभी तक सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले को लागू नहीं किया गया है. यहां अब भी प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते तक अबॉर्शन करवाने का अधिकार है.

महिलाएं क्या चाहती हैं?

अमेरिका की ज्यादातर महिलाएं अबॉर्शन का कानूनी अधिकार चाहती हैं. इसी साल फरवरी में एक सर्वे हुआ था, जिसमें ज्यादातर महिलाओं ने अबॉर्शन का कानूनी हक मिलने की बात मानी थी.

इस सर्वे में शामिल 74% महिलाओं ने माना था कि सभी मामलों में अबॉर्शन का कानूनी अधिकार होना चाहिए. जबकि, जिन राज्यों में अबॉर्शन पर बैन है, वहां की 67% महिलाओं का भी यही मानना था.

इसी तरह मई में प्यू रिसर्च ने भी एक सर्वे किया था. इस सर्वे में शामिल 63% लोगों ने माना था कि अबॉर्शन का कानूनी हक मिलना चाहिए. जबकि, 36% अबॉर्शन के खिलाफ थे. इस सर्वे में शामिल रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में से 57% ने ही अबॉर्शन का हक मिलने की बात कही थी. जबकि, डेमोक्रेटिक पार्टी के 85% समर्थकों ने अबॉर्शन के कानूनी अधिकार का समर्थन किया था.

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