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वेनेजुएला के बाद आ सकती है क्यूबा की बारी, 90 गुना छोटे देश में अमेरिका की क्यों है दिलचस्पी?

अमेरिकी सेना ने सैन्य ऑपरेशन चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि मादुरो सरकार की शह पर उनके देश तक नशे की सप्लाई हो रही थी. वेनेजुएला पर अटैक के बाद आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका कई और देशों पर हमलावर हो सकता है. क्यूबा का नाम इसमें टॉप पर है.

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कैरेबियन में क्यूबा पर अमेरिका की नजरें काफी समय से टेढ़ी रहीं. (Photo- Pexels)
कैरेबियन में क्यूबा पर अमेरिका की नजरें काफी समय से टेढ़ी रहीं. (Photo- Pexels)

अमेरिका की दुश्मनी रूस या चीन या भारत जैसे बड़े देशों तक सीमित नहीं, वो भौगोलिक और सैन्य तौर पर कमजोर देशों के लिए भी उतना ही उग्र है. खासकर अपने पड़ोसी मुल्कों पर वो कड़ी नजर रखता है कि कोई भी उसकी विचारधारा से अलग न लगे. अब वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिकी प्रशासन दबे सुर में कई और देशों को चेता रहा है. क्यूबा इनमें से एक है. कैरेबियन सागर में स्थित ये देश हर तरह से कमजोर है, लेकिन यूएस दशकों से इसके पीछे पड़ा रहा. 

लैटिन अमेरिकी देश क्यूबा की अमेरिकी स्टेट फ्लोरिडा से दूरी महज डेढ़ सौ किलोमीटर है. इतनी कम समुद्री दूरी की वजह से यह यूएस का सबसे नजदीकी कैरेबियन पड़ोसी रहा. ऐसे में होना तो ये था कि दोनों अच्छे पड़ोसियों की तरह मिल-जुलकर रहते लेकिन हुआ कुछ और. दोनों के बीच तलवारें खिंच गईं और दशकों से यही स्थिति है. यहां तक कि अमेरिका ताक में है कि कब वो क्यूबा पर बाहरी ही सही, अपना कंट्रोल पा सके. 

पहले दोनों के बीच दोस्ताना था

इनकी मित्रता किसी कहानी से कम नहीं. इसकी शुरुआत 19वीं सदी के आखिर में हुई, जब अमेरिका खुद को आजादी दिलाने वाला मसीहा बताकर कैरेबियन में उतरा. स्पेन से लड़ाई में अमेरिका जीत गया और क्यूबा स्पेनिश कब्जे से निकल गया. 

cuba flag in mourning after Venezuela attack (Photo- Reuters)
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले में क्यूबा के कई सैनिक मारे गए, जो निकोलस मादुरो की सुरक्षा में तैनात थे. (Photo- Reuters)

इसके बाद से सालों तक अमेरिका इस पड़ोसी का बड़ा आर्थिक और राजनीतिक साझेदार रहा. क्यूबा की तत्कालीन तानाशाह सरकार को अमेरिका का खुला सपोर्ट था. अमेरिकी कंपनियां वहां केसीनो बिजनेस में पैसे लगाया करतीं. क्यूबा की राजधानी हवाना अमेरिकी कारोबारियों और माफिया का बड़ा अड्डा हुआ करता था.

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हालांकि ये आजादी और सपोर्ट कागजों तक था. असल में क्यूबा, वाइट हाउस के लिए मोहरा था, जिससे कई हित साधे जा सकें. 

वॉशिंगटन ने शुरुआती मदद के बहाने अपनी सेना वहीं बनाए रखी. कुछ समय बाद उसने कहा कि उसे नेवल बेस बनाने के लिए एक स्पेस चाहिए. अहसानों में दबा क्यूबा राजी हो गया. उसने एक समझौते के तहत ग्वांतानामो बे इलाके को अमेरिका को किराये पर दे दिया. बेहद कम किराया, लगभग न के बराबर.

यह किराया आज भी कुछ हजार डॉलर ही है, जिसे क्यूबाई सरकार लेने से इनकार करती है. वो चाहती है कि यूएस जगह छोड दे. इधर ऊंगली से पहुंचा पकड़ने में माहिर यूएस की दलील है कि समझौता वैध है और जब तक दोनों देश राजी नहीं होते, वह ग्वांतानामो नहीं छोड़ेगा. यानी चाबी अमेरिका के हाथ में है.

Cuba deteriorating economy (Photo- Pixabay)
क्यूबा दशकों से अमेरिका के प्रतिबंध झेलते हुए आर्थिक तौर पर कमजोर पड़ चुका. (Photo- Pixabay)

अमेरिका राजनीति से लेकर आर्थिक मामलों में घुसा हुआ था, जब क्यूबाई क्रांति हुई. बागी नेता फिदेल कास्त्रो सत्ता में आए और तस्वीर बदलने लगी. कास्त्रो ने अपने यहां मौजूद अमेरिकी कंपनियों का क्यूबाईकरण शुरू कर दिया. समाजवादी नीतियां अपनाई गईं. रूस करीब दिखने लगा. इससे अमेरिका नाराज हो गया और रिश्ते तेजी से बिगड़ते चले गए. अगले कुछ ही सालों के भीतर दोनों के बीच डिप्लोमेटिक रिश्ते तक टूट गए. 

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अमेरिका क्यों चाहता है क्यूबा पर कंट्रोल

- क्यूबा अमेरिका के फ्लोरिडा तट से बहुत करीब है. इस नजदीकी की वजह से अमेरिका नहीं चाहता कि वहां कोई विरोधी ताकत मजबूत हो.

- क्रांति के बाद क्यूबा में पूंजीवाद की जगह समाजवाद आने लगा. इससे सहज ही उसकी रूस से नजदीकी बढ़ी. यह यूएस के लिए डरावनी बात है. 

- अमेरिका लैटिन अमेरिका को लंबे समय से अपना प्रभाव क्षेत्र मानता रहा है. क्यूबा का आजाद रुख इस सोच को चुनौती देता है.

- क्यूबा सिर्फ एक देश नहीं बल्कि अमेरिका के लिए बगावत का प्रतीक है. अगर क्यूबा अमेरिकी दबाव में झुक जाए तो पूरे क्षेत्र को संदेश जाएगा.

- क्यूबा से समुद्री सीमाओं पर नजर रखना आसान हो जाएगा इसलिए भी यूएस को वहां अपनी मजबूती चाहिए. 

वेनेजुएला के बाद अंदेशा है कि यूएस क्यूबा पर भी हमलावर हो. वहां कम्युनिस्ट सरकार है, जो चीन और रूस के साथ रिश्ते मजबूत कर रही है. अमेरिका के लिए ये ऐसा ही है, जैसे पड़ोस में ताकतवर परिवार का आ जाना. प्रतिबंधों की मार से क्यूबा में आर्थिक तंगी है ही, साथ ही कई और समस्याएं आ चुकीं. ऐसे में किसी न किसी बहाने यूएस उसे घेर सकता है.

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