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राष्ट्रवाद पर भिड़ गए संबित पात्रा और कन्हैया कुमार, बताई अपनी-अपनी परिभाषा

एजेंडा आजतक के मंच पर 'राष्ट्र या राष्ट्रवाद' विषय पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भिड़ गए. संबित पात्रा ने कहा कि देश और राष्ट्र दोनों अलग-अलग शब्द हैं. वहीं, कन्हैया कुमार ने कहा कि बीजेपी के राष्ट्रवाद से कोई दिक्कत नहीं है. यह एक देश है, जिसे आप नेशन या कंट्री कहें. देश संविधान से चलेगा.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • राष्ट्रवाद और देश अलग-अलग शब्द हैं-संबित
  • बीजेपी के लिए राष्ट्रवाद व्यक्तिवाद है- कन्हैया
  • आईटीडीसी का चेयरमैन बनाए जाने पर बहस

एजेंडा आजतक का मंच सजा 'राष्ट्र या राष्ट्रवाद' के विषय पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के बीच जमकर बहस हुई..राष्ट्रवाद की आवधारणा के सवाल पर संबित पात्रा ने कहा कि देश और राष्ट्र दोनों अलग-अलग शब्द हैं. वहीं, कन्हैया कुमार ने कहा कि बीजेपी के राष्ट्रवाद से कोई दिक्कत नहीं है. यह एक देश है, जिसे आप नेशन या कंट्री कहें. देश संविधान से चलेगा.

राष्ट्र और देश अलग-अलग शब्द हैं-संबित पात्रा

संबित्र पात्रा ने कहा कि देश की अपनी एक छवि होती है, प्रधानमंत्री होते हैं और अर्थनीति होती है और एक बाउंड्री होती है, लेकिन राष्ट्र एक सोच होती है और उसकी कोई बाउंड्री नहीं होती है. उदाहरण के तौर पर देश की नजर से गंगा एक नदी है, लेकिन राष्ट्र की नजर से देखें तो यह गंगा मां हैं. गंगा एक सोच, जननी हैं. इसीलिए राष्ट्र को बांधा नहीं जा सकता है. वह व्यापक है.

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्र को लेकर कोई दो मत नहीं हो सकते हैं. वहीं, राष्ट्रवाद क्या है? संबित पात्रा ने जवाब दिया कि राष्ट्र को मां मानना, राष्ट्र ने ही मुझे जन्म दिया है, उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं. राष्ट्र के लिए बलिदान भी दे सकता हूं. यही राष्ट्रवाद है.

बीजेपी के लिए राष्ट्रवाद व्यक्तिवाद है-कन्हैया कुमार

वहीं, कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि मुझे बीजेपी के राष्ट्रवाद से कोई दिक्कत नहीं है. यह एक देश है, जिसे आप नेशन या कंट्री कहें. देश संविधान से चलेगा. आजादी के बाद जब संविधान लागू हुआ. पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और खुदीराम की जयंती है. तमाम अलग-अलग धाराओं के लोगों ने अंग्रेजों से लड़कर देश को आजाद करवाया और गुलामी को समाप्त करवाया.

कन्हैया कुमार ने कहा कि संबित पात्रा की पार्टी की एक नेता ने कहा कि आजादी 99 साल की लीज पर है. इसीलिए कहता हूं कि ये न तो आजादी को मानते हैं और न ही संविधान को मानते हैं. कोई भी राष्ट्र जो नियम-कानून से चलेगा, उसकी जो पुस्तिका देश का संविधान है. संविधान कहता है कि देश में रहने वाले सभी जाति और धर्म के लोग इस देश के नागरिक हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारा मानना है कि ये राष्ट्र का नाम लेकर अपनी व्यक्तिगत जेब भरते हैं. संबित पात्रा टीवी पर रोज आकर राष्ट्र-राष्ट्र करते हैं और अभी आईटीडीसी का चेयरमैन बनाया गया है. इनका राष्ट्रवाद दरअसल व्यक्तिवाद है और इससे हमें दिक्कत है. हम कलेक्टिव अंडरस्टैंडिंग में भरोसा करते हैं. इसीलिए कहते हैं कि यह देश सभी लोगों के मिलने से बनेगा. संविधान से इतर कोई भी व्यक्ति होगा, उसके खिलाफ हम खड़े होंगे और सही को सही, गलत को गलत कहेंगे.

कन्हैया कुमार के बयान पर भड़के संबित पात्रा

कन्हैया कुमार के इस आरोप पर संबित पात्रा भड़क गए और बोले हे व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की जाए. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और कन्हैया कुमार के बीच नोकझोंक देखने को भी मिली. संबित पात्रा ने कहा कि हम लोगों को एजुकेशन का सर्टिफिकेट व्यवहार से देना चाहिए. हम लोगों को मुर्गा लड़ाने वाला काम नहीं करना चाहिए. इसके जवाब में कन्हैया कुमार ने कहा कि ये रोज मुर्गा लड़ाते हैं. इसी वजह से ये आईटीडीसी का चेयरमैन बने हैं.

संबित पात्रा ने कहा कि मैं पिछले चेयरमैन से ज्यादा पढ़ा-लिखा हूं. मैंने एमबीबीएस किया, लंदन से एमआरसीएस किया और फिर यूपीएससी पास की. आप लोगों द्वारा डॉक्टरों की क्यों बेइज्जती की जाती है? जो लोग 50-50 साल तक थीसिस करते हैं, वे यूपीएससी वालों से पूछेंगे कि क्वालिफिकेशन क्या है?

राष्ट्रवाद भारत माता पर आधारित-साकेत बहुगुणा

साथ ही एबीवीपी की सेंट्रल वर्किंग कमेटी के सदस्य साकेत बहुगुणा ने कहा कि कन्हैया कुमार की बातों से पता चला कि इनका मानना है कि भारत देश के रूप में साल 1947 में पैदा हुआ, लेकिन हमारा और देश के ज्यादातर लोगों का मानना है कि भारत को पॉलिटिकल देश के रूप में 1947 में आजादी मिली, लेकिन राष्ट्र के रूप में हजारों सालों से सनातन परंपरा है.

उन्होंने कहा कि सनातन राष्ट्र के रूप में भारत वर्ष हजारों सालों से है और इसीलिए भारत माता के रूप में देश की पूजा करते हैं. राष्ट्रवाद भारत माता पर आधारित है. साल 1947 में जो भारत को आजादी मिली, उसका सम्मान करते हैं, लेकिन हजारों सालों से इतिहास है, उसपर भी ध्यान रखने की जरूरत है.

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