scorecardresearch
 

आंदोलन कर रहे किसानों के बीच फूट डाल रही सरकार? जानिए क्या बोले कृषि मंत्री तोमर

कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह तोमर से पूछा गया कि कुछ किसान वापस जाने लगे हैं तो क्या सरकार किसानों के बीच फूट डाल रही है? इस सवाल पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा, ''सरकार को न तो फूट डालने की जरूरत है और न ही ऐसी मंशा भी रही.''

X
एजेंडा आजतक के मंच पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एजेंडा आजतक के मंच पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'सरकार को फूट डालने की जरूरत नहीं'
  • तोमर ने की आंदोलन खत्म करने की अपील

Agenda Aajtak 2021, Agriculture Minister Narendra Singh Tomar: दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर सालभर से अधिक समय से आंदोलन कर रहे किसानों का प्रदर्शन कृषि कानूनों की वापसी के बाद भी जारी है. किसानों की मांग एमएसपी पर कानून बनाने समेत कई अन्य भी हैं. हालांकि, इस बीच कई किसान कृषि कानूनों के वापस होने के बाद अपने घरों को लौटने लगे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में कई किसान अब भी डटे हुए हैं. इन सभी मुद्दों पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित किए गए 'एजेंडा आजतक' कार्यक्रम में अपनी बात रखी. तोमर ने किसानों के बीच फूट डलवाने जैसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार की कभी भी ऐसी मंशा नहीं रही. साथ ही, कृषि मंत्री ने किसानों से आंदोलन को खत्म करने की भी अपील की. 

कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह तोमर से पूछा गया कि कुछ किसान वापस जाने लगे हैं तो क्या सरकार किसानों के बीच फूट डाल रही है? इस सवाल पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा, ''सरकार को न तो फूट डालने की जरूरत है और न ही ऐसी मंशा भी रही. कुनबा कोई भी हो, उसमें सोचने की शक्ति होती है. भगवान ने उन्हें भी बुद्धि दी होती है. लोकतंत्र में कोई किसी को रोक सकता नहीं है. मुझे लगता है कि इस दिशा में किसान भी अलग-अलग तरीके से विचार कर रहे होंगे.'' वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत समेत किसान नेताओं के आंदोलन जारी रखने पर कृषि मंत्री ने आगे कहा कि कृषि कानूनों को लेकर हमारा फैसला गलत नहीं है. प्रधानमंत्री ने जो बड़प्पन दिखाया है, उसकी देशभर में तारीफ हो रही है. जो आंदोलनकारी किसान हैं, वे भी विचार कर रहे हैं कि प्रमुख रूप से जिस आंदोलन की शुरुआत हुई थी, वह बात मान ली गई है तो हमें भी आंदोलन पर विचार करना चाहिए. हमें लगता है कि उनमें इस बात की भी चर्चा चल रही होगी. 

तोमर बोले- आंदोलन कृषि कानूनों को खत्म करने पर था
किसानों की एमएसपी की गारंटी वाली मांग पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि जब यह आंदोलन शुरू हुआ तब यह कृषि कानूनों को रद्द करने पर था. इसके बाद कुछ लोग एमएसपी की भी बात करते रहे. हम उस समय भी उनकी भावनाओं को समझकर एमएसपी पर समिति बनाने का सोच रहे थे और बातचीत भी हुई थी. मैंने भी आश्वास्त किया कि एमएसपी जारी है और जारी रहेगी. स्वामीनाथन साहब ने एमएसपी को लागत पर 50 फीसदी मुनाफा घोषित करने की रिक्मेंडेशन यूपीए सरकार को दी थी. जो भी कांग्रेस के नेता एमएसपी की गारंटी की बात करते हैं तो उनसे पूछता हूं कि उन्होंने क्यों नहीं इसे लागू किया? अगर हमारी नीयत में खोट होता तो प्रधानमंत्री एमएसपी को डेढ़ गुना घोषित करना क्यों शुरू करते? अब एमएसपी लागत पर 50 फीसदी मुनाफा करके घोषित की जाती है. एमएसपी पर खरीद को भी दोगुना किया गया है. एमएसपी और प्रभावी हो, इस नजर से प्रधानमंत्री ने कानून को रिपील करने की बात की. 

सीड बिल पर क्या बोले कृषि मंत्री तोमर?
उधर, सीड बिल पर कृषि मंत्री ने कहा कि अभी तक यह नहीं आया है और जब आएगा तो संबंधित लोगों से चर्चा होती रहेगी. तोमर ने कहा, ''मैं किसानों से कहना चाहता हूं कि जो कानून बनाए गए थे, उन्हें प्रधानमंत्री जी ने वापस लिए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी किसानों के प्रति प्रतिबद्ध हैं. सात सालों में अनेक योजनाओं की शुरुआत हुई, जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है. कानून वापस हो गए हैं. एमएसपी जैसे विषयों पर कमेटी बन गई है तो ऐसे में आप सभी लोग अपने आंदोलन को खत्म करके फोरम पर आएं. तोमर ने कहा कि दावा किया कि बीजेपी के लिए देश पहले और पार्टी व चुनाव बाद में है. हम लोग वोट के आधार पर कोई फैसला नहीं लेते हैं. कोई भी फैसला होता है वह देश के हित में ही होता है. जब पीएम मोदी के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया तो इसका वोट और चुनाव से कोई वास्ता नहीं है. देश के व्यापक हित और आजादी के अमृत महोत्सव को ध्यान में रखते हुए इसका फैसला किया गया.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें