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सबकी सहभागिता से चलता है लोकतंत्र, संख्या बल के हिसाब से नहीं: ओम बिरला

लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष की सहभागिता का जिक्र करते हुए ओम बिरला ने कहा, ''लोकतंत्र के अंदर जितनी पक्ष की भूमिका होती है, उतनी ही विपक्ष की भी भूमिका होती है. लोकतंत्र तभी उतना सशक्त होगा जब विपक्ष मजबूत होगा.''

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'एजेंडा आजतक' के मंच पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला 'एजेंडा आजतक' के मंच पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ओम बिरला बोले- लोकतंत्र में विपक्ष का भी महत्व
  • 'देर रात तक चलती है संसद, बढ़ती है प्रोडक्टिविटी'

Agenda Aajtak 2021: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित 'एजेंडा आजतक' के मंच पर कहा कि लोकतंत्र संख्या बल के हिसाब से नहीं चलता, बल्कि यह पक्ष और विपक्ष की बराबरी और सबकी सहभागिता से चलता है. जितनी भूमिका लोकतंत्र में पक्ष की होती है, उतनी ही विपक्ष की भी होती है. लोकतंत्र तभी सशक्त होगा, जब विपक्ष मजबूत होगा. इसीलिए डेमोक्रेसी में विपक्ष को भी पर्याप्त महत्व दिया गया है. 

'लोकतंत्र के पहरेदार' सत्र में शामिल होते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि एक लोकसभा सदस्य 10-15 लाख जनता का प्रतिनिधित्व करता है. वह जनता की दिक्कतों को संसद में ही बताएगा. ऐसे में संसद में सदस्यों को जनता की परेशानी को बताने का मौका मिले, यही मेरी कोशिश रहती है. देर रात तक संसद चलती है, जिससे संसद की प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है. लोग भी मानते हैं कि संसद में काम होता है और उनकी बातें सुनी जाती हैं. ओम बिरला ने दावा किया कि वर्तमान की 17वीं लोकसभा में मोदी सरकार ने शून्यकाल में उठने वाले हर मुद्दों का जवाब देने की कार्रवाई शुरू की है. यह एक अच्छी प्रक्रिया है. 

लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष की सहभागिता का जिक्र करते हुए ओम बिरला ने कहा, ''लोकतंत्र के अंदर जितनी पक्ष की भूमिका होती है, उतनी ही विपक्ष की भी भूमिका होती है. लोकतंत्र तभी उतना सशक्त होगा जब विपक्ष मजबूत होगा.'' वहीं, संसद का नया भवन कब तक बनकर तैयार हो जाएगा, इस पर ओम बिरला ने बताया कि वर्तमान संसद भवन की 1921 में नींव रखी गई थी और यह 1927 में तैयार हुआ था. उस समय 87 लाख रुपये का खर्चा आया था. उसके बाद से जनता की अपेक्षा बढ़ी है. संसदीय काम-काज में बदलाव आया है. इसीलिए नए संसद भवन की जरूरत थी. साथ ही नए संसद भवन को बनाने की चर्चा चल रही थी काफी समय से. हमने सरकार से नया संसद भवन बनाने के लिए आग्रह किया और उन्होंने उसे बनाने का फैसला किया. 

उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने नया संसद भवन बनाने का फैसला किया. आजादी के 75 वर्ष होंगे, तब अक्टूबर, नवंबर तक संसद भवन बन जाना चाहिए. हमारी कोशिश अगस्त तक इसे बनाने की है.'' लोकसभा स्पीकर ने कहा कि नई संसद भारत के आजादी का प्रतीक है और उसके साथ-साथ हमारी सरकार द्वारा बनाया गया संसद भवन होगा. हम कह सकते हैं कि जितना बड़ा देश का लोकतंत्र है, उतना ही बड़ा संसद भवन होगा. 

संसद में पत्रकारों की एंट्री पर क्या बोले ओम बिरला?

वहीं, संसद में पत्रकारों की एंट्री के मुद्दे पर ओम बिरला ने कहा कि अभी 109 से ज्यादा पत्रकार संसद में हैं. कोविड गाइडलाइंस के हिसाब से ही सत्र चलाया जा रहा है. दर्शकदीर्घा के अंदर भी किसी को इजाजत नहीं दी गई है, क्योंकि वहां भी सांसद बैठते हैं. इसी तरह मंत्री के स्टाफ समेत कई अन्य लोगों को भी सदन में इजाजत नहीं दी गई है. चूंकि पत्रकार लोकतंत्र के मुख्य स्तंभ हैं तो पर्याप्त संख्या और आवश्यकता के आधार पर उन्हें संसद में इजाजत दी गई है. अभी 109 को दी गई है, भविष्य में कोविड जैसे ही कम होगा, बाकी को भी पास जारी किए जाएंगे. 

 

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