Agenda AajTak 2024: एजेंडा आजतक 2024 के पहले दिन शुक्रवार को पहले सत्र में देश की दिग्गज महिला राजनीतिज्ञों से मंच सजा था. इनमें से एक बिहार की सांसद शांभवी चौधरी जो पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर सदन पहुंची हैं, उन्होंने भी एजेंडा आजतक के पहले सेशन - 'ओ स्त्री, चुनाव में रक्षा करना' में शिरकत की और महिलाओं के समक्ष राजनीति में आने वाली चुनौतियों पर खुलकर अपनी बात रखी.
सांभवी ने महिलाओं की सबसे बड़ी चुनौती पितृसत्तात्मक समाज को बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे समाज में जहां महिलाओं को लेकर एक अलग ही नजरिया हैं, वहां हमें खुद की जगह बनाने में काफी संघर्ष करना पड़ता है. आज मैं सांसद हूं, तो सिर्फ चुनाव जीतकर यहां नहीं पहुंची हूं.
पितृसत्तात्मक समाज सबसे बड़ी चुनौती
उन्होंने कहा कि हमने इस पेट्रियाकल समाज से लड़ाई की. आजकल के पेरेंट्स हमेशा कहते हैं कि मेरी बेटी बेटे जैसी है, लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि मेरे परिवार ने हमेशा मुझे कहा कि ये मेरी बेटी है और किसी से कम नहीं है. जब मुझे टिकट मिला तो कई सारे सवाल पूछे गए. तभी एक पत्रकार ने मुझसे सवाल पूछा था कि अब आप राजनीति में आ गई हैं तो आपका घर कैसे संभलेगा. ये एक स्टिरियोटाइप सोच है.
'स्टिरियो टाइप को तोड़ना जरूरी...'
शांभवी ने खुलकर कहा कि हमें इस सोच को पीछे छोड़ना है. अक्सर लोग पूछते हैं कि घर कैसे संभलेगा. अब आप कैसे राजनीति और परिवार को बैलेंस करेंगी? तो बता दूं कि ये एक स्टिरियोटिपकल सोच है, ये सारी चीजें चलती रहती हैं और हमें इन चुनौतियों से ही लड़ना है. तभी हम ये तय कर पाएंगे कि आधी आबादी को कैसे आगे लेकर जाएंगे.
सबसे कम उम्र की सांसदों में एक हैं सांभवी
शांभवी चौधरी को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने इस बार लोकसभा चुनाव में टिकट दिया था. वो पहली बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचने वाली युवा सांसदों में एक हैं. इनका जन्म 15 जून 1998 में हुआ था. फिलहाल सांभवी समस्तीपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. वह 18वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र की सांसदों में से एक हैं .
महिला राजनीतिज्ञों ने खुलकर रखी अपनी बातें
एजेंडा आजतक के पहले सत्र - 'ओ स्त्री, चुनाव में रक्षा करना' में न सिर्फ यंग और पहली बार चुनी जाने वाली महिला सांसद थीं, बल्कि वैसी पारखी और महिला राजनीतिज्ञ भी पहुंची हुईं थी, जो राजनीति में लंबे समय से अपनी जगह बनाए हुए हैं. इस सत्र में सांसद रंजीता रंजन (कांग्रेस), सांसद शांभवी चौधरी (एलजेपीआर), सांसद बांसुरी स्वराज (बीजेपी), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना यूबीटी) और प्रिया सरोज (समावादी पार्टी) ने शिकत किया. नए और पुराने दोनों ही तरह की सशक्त महिलाओं ने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर खुलकर अपने विचार रखें.