रामानंद सागर की 'रामायण' में सीता का किरदार निभा चुकीं एक्ट्रेस दीपिका चिखलिया अब एक नए रोल में नजर आएंगी. एक्टिंग के बाद, उन्होंने अब प्रोड्यूसर की भी कुर्सी संभालने का फैसला किया है. दीपिका ओटीटी स्पेस में एक नया माइक्रो-ड्रामा शो 'आंटी, प्लीज स्पीक इंग्लिश' ला रही हैं, जिसमें वो एक्टिंग भी करती दिखेंगी. इस शो को Viralo ऐप पर स्ट्रीम किया जा सकता है.
दीपिका चिखलिया करने जा रहीं नई शुरुआत
हाल ही में इंडिया टुडे/आजतक से खास बातचीत के दौरान दीपिका ने इस नए शो और नए फॉर्मेट पर खुलकर बात की. उन्होंने एक्टिंग और प्रोडक्शन एक साथ करने के चैलेंजेस भी बताए. एक्ट्रेस ने कहा, 'ये पहली बार है जब मैंने माइक्रो-ड्रामा किया है. कहानी बहुत खूबसूरत थी. ये एक वाराणसी वाली औरत की कहानी है, जो अमेरिका जा रही है. उसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी अंग्रेजी बोलने की जरूरत नहीं पड़ी.'
'अब अचानक उसे बहुत टेंशन हो रही है कि इंटरव्यू कैसे पास करेगी, और लोगों से बात कैसे करेगी. वो गांव से शहर आती है, सब कुछ उसे बहुत रोमांचक और नया लगता है. लेकिन मन के किसी कोने में हमेशा ये डर रहता है कि इतना सब कैसे मैनेज करूंगी? अंग्रेजी कैसे बोलूंगी? तो मुझे ये बात बहुत दिलचस्प लगी.'
एक्टिंग के साथ प्रोडक्शन संभालने पर क्या बोलीं दीपिका?
दीपिका चिखलिया ने आगे अपने डबल रोल, एक्टिंग और प्रोड्यूसर पर बात की. उन्होंने कहा, 'जब एक साथ एक्टिंग भी करनी हो और प्रोडक्शन भी संभालना हो, तो बहुत मुश्किल हो जाता है. पर मजा भी खूब आया, क्योंकि मुझे वो रोल बहुत पसंद था.' एक्ट्रेस ने इस नए फॉर्मेट पर कहा, 'ये बहुत मजेदार तरीका है क्योंकि इससे आप बहुत ज्यादा लोगों तक पहुंच सकते हैं. आजकल ये फॉर्मेट सच में बहुत अच्छा काम करता है.'
माइक्रो-ड्रामा फॉर्मेट के लिए अक्सर सोचा जाता है कि इसमें थोड़ी लाउड एक्टिंग करनी पड़ती है. डायलॉग्स को काफी जोर-जोर से बोलकर, थोड़ा ज्यादा ड्रामा डालकर बोलना होता है. लेकिन दीपिका के विचार इसपर कुछ अलग हैं. उन्होंने कहा, 'जोर-जोर से एक्टिंग करने की जरूरत नहीं है. ये ऐसा मीडियम है जहां हमेशा चेहरा बहुत पास से नहीं दिखता. ज्यादातर सीन मिड-शॉट में होते हैं, इसलिए चेहरे के भाव और बॉडी मूवमेंट को बहुत सोच-समझकर बैलेंस करना पड़ता है. यहां बॉडी से ज्यादा एक्सप्रेसिव होना पड़ता है. इसमें दिमाग और कंट्रोल की जरूरत होती है.'
दीपिका ने अपनी बात का अंत ये कहते हुए किया कि जब 2-2 मिनट के एपिसोड होते हैं, तो ड्रामा बहुत हाई-वोल्टेज रहता है. किरदार में और स्क्रिप्ट में हमेशा जल्दबाजी रहती है. हर दो मिनट में एक क्लाइमैक्स मारना पड़ता है. यही चीज इसे बहुत अलग बनाती है.