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जब कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में फंस गए देबीना-गुरमीत, एक्ट्रेस ने शेयर की यादें

टीवी एकट्रेस देबीना बनर्जी एक लंबे समय से मुंबई में दुर्गा पूजा सेलिब्रेट कर रही हैं. कोलकाता निवासी होने की वजह से देबीना के जेहन में आज भी अपने पुराने दिनों के दुर्गा पूजा की यादें ताजा हैं. देबीना हमसे शेयर कर रही हैं अपने कभी न भूलने वाली यादों को..

देबीना बनर्जी देबीना बनर्जी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दुर्गा पूजा को याद कर भावुक हुईं देबीना
  • एक बार भीड़ में फंस गए थे देबीना और गुरमीत
  • मुंबई में पंडालों में घूम बंगाली डिश का लुत्फ उठाती हैं

'दुर्गा पूजा में कोलकाता की हर गलियों में आपको मां दुर्गा मिलेंगी. मैं नॉर्थ कोलकाता में रहती थी, मेरे घर का नजारा यूं था कि मैं घर की बालकॉनी से रोजाना दर्शन कर लिया करती थी. बालकॉनी में खड़े होकर तमाम तरह की लाइटों से जगमगाता भव्य पंडाल और लोगों की चहल-पहल देख कर मैं वाकई कहीं खो सी जाती थी. ये मेरे रोजाना की रूटीन में शामिल था. मुंबई में उस बालकॉनी के कोने की बहुत याद आती है, खासकर दुर्गा पूजा के दिन..' जिस उत्साह से देबीना कोलकाता के दुर्गा पूजा का जिक्र करती हैं, उससे एक बार आपका भी मन करेगा कि एक बार दुर्गा पूजा का मजा कोलकाता में तो जरूर लिया जाए.

 एक्ट्रेस बनने का ख्वाब लिए जब देबीना कोलकाता छोड़ रही थीं, तो उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि शायद ही कभी वो  पूजा का लुत्फ दोबारा उठा पाएं.अब देबीना को मुंबई में एक लंबा अरसा हो गया है और वे यहां की दुर्गा पूजा वाले कल्चर में रस-बस गई हैं लेकिन कोलकाता के दुर्गा पूजा की याद उनके अंदर कहीं आज भी कहीं तरोताजा है. 

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कोलकाता फ्लेवर तलाश करेंगे, तो हैरान होंगे

अपने इन्हीं यादों को देबीना आजतक डॉट इन से शेयर करती हैं. देबीना बताती हैं, दुर्गा पूजा में पूरा कोलकाता ही सज जाता है. आप अगर कोलकाता वाली फ्लेवर की तलाश करेंगे, तो निराश ही होंगे. हां मैं बिना किसी उम्मीद के यहां पंडाल पहुंचती हूं, चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. मुंबई के ट्यूलिप स्टार देखें, तो लगेगा कि यहां दुनिया के पूरे बंगाली पहुंच गए हैं. हर कोई बांग्ला में बात करता है. इस साल रानी मुखर्जी का पूजा कहीं और शिफ्ट हुआ है. 

बालकॉनी से ही होता था मां के दर्शन 

मेरा घर नॉर्थ कोलकाता में होता था. उस वक्त घर की बालकॉनी में बैठ दुर्गा पूजा की चहल-पहल का देखा करती थी. वो जो सीन है, वो आज भी मेरी आंखों के कैमरे में कैद है. इसके अलावा हम एक दिन गाड़ी हायर कर पूरा पूजा पंडाल घूमने जाया करते थे. शाम से जो जर्नी स्टार्ट होती थी, वो सुबह के पांच-छ बजे जाकर खत्म होती थी. 

चार दिन बाहर खाया करते थे 

हम सभी बच्चे घर पर बोल देते थे कि चार दिन हम बाहर का ही खाना खाएंगे. पता नहीं उस वक्त स्ट्रीट फूड खाने में कितना मजा आता था. वहां हम तमाम तरह की डिसेज का लुत्फ उठाते थे. वो खाना कितना स्पेशल लगता था. ताल के पत्ते पर हमें खाना सर्व किया जाता था. रोड पर मेला लगता था. हम बंदूक की शॉट खेला करते थे. झूला झूलना ये सब हमारी रोजाना की रूटीन हुआ करती थी. 

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बेस्ट कपड़ा अष्टमी  के लिए होता था

दुर्गा पूजा में हमें केवल पेरेंट्स ही नहीं बल्कि रिलेटिव्स से भी कपड़े मिला करते थे. मासी-चाची सभी कपड़ें दिया करती थी. उसमें से बेस्ट कपड़ा हम अष्टमी के लिए रखते थे. फिर रोजाना नए कपड़े पहनकर दोस्तों के बीच कंपीटिशन लगाया करते थे. ज्यादा कपड़े हो गए थे, तो सुबह-शाम हम पहन लिया करते थे. कितनी यादों का खजाना है, ये जिंदगीभर मेरे साथ रहेगी. 

कोलकाता में डांडिया देख  हैरान हो गई

दो साल पहले ही हमें कोलकाता में दुर्गा पूजा के लिए बतौर स्पेशल गेस्ट बुलाया गया था. मैं काफी खुश भी थी कि चलो वहां दुर्गा पूजा देखेंगे. जिस इवेंट में बुलाया था, वहां गई तो देखा कि लोग डांडिया खेल रहे हैं. काफी हैरानी हुई कि कोलकाता में डांडिया.. ये कब और कैसे हुआ? लेकिन अच्छी बात है कि यह कल्चर भी वहां अपनाया जा रहा है. इवेंट खत्म होते ही मैं फौरन अपने घर गई. वहां हम दो दिन रूके और पंडाल विजिट किया. 

भीड़ ने हमें घेर लिया था

जब शुरुआत में मुंबई आने के बाद पहली बार गुरमीत को लेकर कोलकाता गई थी. उस वक्त पंडाल में हम फंस गए थे. हमें नहीं पता था कि हम फेमस हो चुके हैं. हम भीड़ में वैसे ही चले गए जैसे बचपन में जाया करते थे. अचानक देखा कि लोग हमें पहचानने लगे हैं और हमारी ओर भागने लगे, तो खींचा-तानी वाली मुसीबत आ गई. उसी दिन यह एहसास हुआ कि जिस तरह बचपन में मेला घुमकर इंजॉय किया करते थे, वो नहीं कर सकते, फिर जाने का क्या फायदा होगा. 

आलू पूड़ी बननी शुरू हो गई है

हर साल की तरह इस साल भी मुंबई के पंडालों में घूमेंगे और बंगाली रेस्त्रां में जाकर ऑथेंटिक बंगाली खाने का लुत्फ उठाएंगे. मेरे घर में तो आज से ही पूड़ी और आलू बनना शुरू हो गया है. 

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