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Panga Movie Review: सपनों की राख में चिंगारी का काम करती है कंगना रनौत की पंगा

Panga Review कंगना रनौत जिसका नाम है पंगा. 24 जनवरी को रिलीज हो गई है. फिल्म कैसी है ये जानने के लिए पढ़ें रिव्यू.

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Panga Movie Revie: फोटो- कंगना रनौत
Panga Movie Revie: फोटो- कंगना रनौत
फिल्म:Panga
3.5/5
  • कलाकार :
  • निर्देशक :Ashwiny Iyer Tiwari

दिल से देखे गए सपने अधूरे रह जाए तो उनकी कसक जिंदगी भर दिल में रह जाती है. लेकिन इन सपनों को पूरा करने का मौका मिले तो पंगा लेना जरूर चाहिए, इस बात को बिना सोचे की जीत होगी या हार. ऐसी ही कहानी लेकर आई हैं कंगना रनौत, जिसका नाम है पंगा. 24 जनवरी को रिलीज हुई फिल्म पंगा कहानी है जया निगम की.

जया रेलवे की तरफ से कबड्डी खेलने वाली प्लेयर रही हैं. लेकिन अब वो रेलवे में टिकट काटने का काम करती हैं. वो ऐसी प्लेयर थी, जिसके लिए पूरी टीम कहती है कि प्लेयर आते जाते हैं लेकिन जया निगम जैसे स्टार प्लेयर कम ही आते हैं. जया के शानदार खेल की वजह से उसे कई बड़े मौके मिलते हैं. इसी बीच उसे जीवन साथी भी मिल जाता है प्रशांत (जस्सी गिल). प्रशांत और जया की लव स्टोरी दो तीन सीन तक चलती है और फिर जया की मां (नीना गुप्ता) से मंजूरी मिलते ही दोनों की शादी हो जाती है. लेकिन, शादी की एक शर्त होती है कि जया को प्रशांत शादी के बाद भी कबड्डी खेलने देगा.

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इस बात से प्रशांत को कोई परेशानी होती नहीं है. तो बस जिंदगी निकल पड़ती है. इसके बाद जया को मौका मिलता है देश के लिए खेलने का. लेकिन बीच में ही जया मां बन जाती है और अपने बच्चे के जन्म के बाद खेलने की प्लानिंग करती है. जया का बेटा आदित्य (यज्ञ भसीन) दुनिया में आता है, लेकिन जया का मैदान में जाना बंद हो जाता है. मां बनने की जिम्मेदारी जया के सपनों को पीछे छोड़ देती है. कहानी आगे बढ़ती है और एक दिन जया का बेटा आदित्य उसे कमबैक करने को कहता है. बेटे की खुशी के लिए जया कमबैक का नाटक करती है लेकिन फिर से दिल में दबे अरमानों को पंख लग जाते हैं.

जया 8 साल के बाद मैदान में उतरने का मौका पाने की कोशिश करती है. जया के सपोर्ट में उसका पति, बेटा और खास दोस्त मीनू (ऋचा चड्ढा) आते हैं. मां भी जया के साथ है लेकिन मुश्किल है जया की फिजीक जो वक्त के साथ टूट गई है. लाख कोशिश के बाद जया को नेशनल टीम में जगह मिलती भी है लेकिन बस सब्सटीट्यूट बनाकर उसे टीम के साथ रखा जाता है. फिल्म में सबसे बड़ा पंच है इसका क्लाइमैक्स, जया निगम 32 की उम्र में 8 साल बाद 7 साल के बच्चे की मां बनकर जीत पाती है या नहीं. यही देखना खास है.

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अदाकारी

फिल्म की कहानी सीधी और सुलझी हुई है. जया के किरदार में कंगना ने एक बार फिर शानदार काम किया है. जया के पति प्रशांत के किरदार में जस्सी गिल की भूमिका भी अच्छी है. प्रशांत के किरदार को देखकर ये जरूर कहा जा सकता है कि अब उनकी फीमेल फैन फालोइंग उनके जैसा पति ही चाहेंगी. लेकिन सबसे मजेदार किरदार है कंगना का बेटा आदित्य, इस रोल में यज्ञ भसीन ने कमाल का काम किया है. जबरदस्त पंच दिए हैं. सपोर्टिंग रोल में नीना गुप्ता और ऋचा चड्ढा का काम भी बेहतरीन है.

डायरेक्शन

फिल्म के डायरेक्शन का जिम्मा अश्विनी अय्यर तिवारी ने संभाला है. अश्विनी ने फिल्म के हर पहलू को खूबसूरत तरीके से दिखाया है. एक मां जो अपने परिवार के लिए सपनों को छोड़ती है. फिर वही परिवार उसके सपनों को पूरा करने की कोशिश करता है. लेकिन महज परिवार का सपोर्ट सब नहीं होता. एक महिला के अंदर की जंग कितनी बड़ी होती है ये पंगा बखूबी बताती है.

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फिल्म में क्या है कमी?

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पंगा में जज्बात है, कहानी इमोशनल भी कर जाती है. लेकिन कई बार इसे देखने पर दंगल और मैरीकॉम की याद आ जाती है. ऐसे में तुलना होना लाजमी है और वहीं पंगा मात खा जाती है. पंगा सामान्य सी कहानी है, इसमें गानों की सबसे बड़ी कमी है. ऐसा नहीं कि तड़कते-भड़कते गाने फिल्म में जरूरी हैं लेकिन कोई यादगार गाना सच्चे जज्बात को बयां करता हुआ भी नहीं है.

पंगा फिल्म कैसा करेगी ये बॉक्स ऑफिस की रिपोर्ट आने वाले दिनों में बता देगी. लेकिन ये फिल्म उन महिलाओं और खास तौर से उन मां को जरूर देखनी चाहिए जो अपने सपनों को पीछे छोड़ चुकी हैं. फिल्म के अंत में यही संदेश स्क्रीन पर लिखा दिखता है. पंगा हर उस महिला की कहानी है जो भले की आम हो, गुमनाम हो मगर उसे खुद को खास समझने का जज्बा नहीं छोड़ना चाहिए. अगर जिंदगी मौका दे तो एक बार पंगा जरूर लेना चाहिए.

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