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जब वाजपेयी को हराने के लिए नेहरू ने लिया इस फिल्म स्टार का सहारा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल ब‍िहारी वाजपेयी की प्रतिभा का लोहा जवाहर लाल नेहरू भी मानते थे. उन्होंने एक बार वाजपेयी के ख‍िलाफ अपनी पार्टी के उम्मीदवार को ज‍िताने के ल‍िए फिल्म स्टार का सहारा ल‍िया था.   

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पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल ब‍िहारी वाजपेयी शुक्रवार को पंचतत्व में व‍िलीन हो गए. वाजपेयी अपने 9 दशकों के बेमिसाल जीवन में कई किस्से-कहानियां पीछे छोड़ गए. उनका ऐसा ही एक किस्सा देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से जुड़ा है.

1957 में अटल ब‍िहारी वाजपेयी बलरामपुर सीट से 10 हजार वोटों से जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे. इसके बाद 1962 में हुए अगले आम चुनाव में कांग्रेस ने वाजपेयी को हराने के लिए गांधीवादी शुभद्रा जोशी को उनके ख‍िलाफ मैदान में उतारा था.दोनों ही भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा रहे थे, लेकिन विचारधारा के स्तर पर अलग थे.

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पहली बार संसद पहुंचे अटलजी का भाषण सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बेहद प्रभावित हुए. वे उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री मानते थे. अटल ब‍िहारी को बलरामपुर सीट से कांग्रेस की जीत के लि‍ए उन्होंने खतरे माना. मतदाताओं पर अपना प्रभाव जमाने के लिए उन्होंने शुभद्रा जोशी के पक्ष में उस समय के लोक्रप्रिय फिल्म अभ‍िनेता बलराज साहनी से प्रचार कराया. नतीजतन, वाजपेयी ये चुनाव हार गए.

यह पहली बार था जब देश की राजनीति में हिन्दी सिनेमा का कोई अभ‍िनेता किसी राजनीतिक पार्टी के चुनाव उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार कर रहा था. बाद में ये एक परंपरा बन गई. हेमा मालिनी, जया बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, सुनील दत्त, परेश रावल, गोविंदा आदि तमाम फिल्मी सितारे राजनीतिक पार्टियों से जुड़ गए.

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आने वाले दिनों में यह व्यक्ति प्रधानमंत्री बनेगा: नेहरू

वाजपेयी के असाधारण व्‍यक्तित्‍व को देखकर उस समय के वर्तमान प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि आने वाले दिनों में यह व्यक्ति जरूर प्रधानमंत्री बनेगा.

नेहरू ने ये बात तब कही थी जब एक दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली में ब्रिटिश नेता से अटल बिहारी वाजपेयी की मुलाकात करवाई. इस दौरान नेहरू ने अटल का परिचय देते हुए कहा- इनसे मिलिए, यह युवा एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा.

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बता दें कि एक बार संसद में एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू पर विपक्षी नेता जमकर निशाना साध रहे थे. अटल जी काफी देर तक ये देखते रहे और फिर गुस्से से अपनी सीट से उठे और पूछा कि क्या सिर्फ विपक्ष होने के नाते प्रधानमंत्री का विरोध करना जरूरी हो गया? नेहरू ने भी वाजपेयी की इस जिंदादिली का खुलकर स्वागत किया और उन्हें साल 1961 में नेशनल इंटिग्रेशन काउंसिल में नियुक्ति दी.

अटल बिहारी वाजपेयी के भाषणों ने उन्हें कम उम्र में ही चर्चित कर दिया था. अटल बिहारी सरकार की नीतियों के विरोध में जोरदार तरीके से अपनी बात रखते थे. यूं तो नेहरू भी अच्छे वक्ता थे. लेकिन दोनों ही लोग राजनैतिक मतभेदों से इतर एक दूसरे का पूरा सम्मान करते थे.

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