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Chhapaak Review: कभी रुलाती तो कभी डराती है छपाक, दीपिका पादुकोण-विक्रांत मैसी की पॉवरफुल एक्टिंग

दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है. कैसी है ये फिल्म और आपको क्यों देखनी चाहिए, जानिए हमारे रिव्यू में.

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Chhapaak Review-दीपिका पादुकोण
Chhapaak Review-दीपिका पादुकोण
फिल्म:Chhapaak
4/5
  • कलाकार :
  • निर्देशक :Meghna Gulzar

इस देश में... नहीं, इस दुनिया में एक लड़की होना आसान बात नहीं है. हम रोज ना जाने कितनी बातों का सामना करते हैं, जिनमें से कई चीजों के बारे में किसी से बात करने में भी हम हिचकिचाते हैं. हम सभी के मन में रोज अलग डर होता है. शाम को बाहर ना जाना, कपड़ें ढंग से पहनना और भी बहुत सी बातें या तो हमें कही जाती हैं या फिर खुद हम ही सोचने लगते हैं.

आप नहीं जानते आपके साथ क्या होने वाला है. रेप से डर सभी को लगता है, हर लड़की को. लेकिन जिस बात पर हम कम ही ध्यान देते हैं वो है एसिड अटैक. किसी की सूरत के साथ-साथ उनकी पूरी जिंदगी बिगाड़ देने वाला ये दुष्कर्म हमारे देश में ना जाने कितनी लड़कियों के साथ हुआ है. ऐसी ही एक लड़की है लक्ष्मी अग्रवाल, जिसकी जिंदगी से प्रेरित होकर डायरेक्टर मेघना गुलजार ने अपनी फिल्म छपाक को बनाया है.

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फिल्म की कहानी

फिल्म छपाक की कहानी दिल दहला देने वाली है. ये कहानी है मालती अग्रवाल (दीपिका पादुकोण) की, जिसपर एसिड से अटैक किया गया है. मालती का पूरा चेहरा जल चुका है और उसकी जिंदगी तबाह हो गई है. लोगों का शक उसके बॉयफ्रेंड राजेश (अंकित बिष्ट) पर जाता है, लेकिन मालती का गुनहगार राजेश नहीं बल्कि उसी का जानकार बब्बू उर्फ बशीर खान और उसकी रिश्तेदार परवीन शेख है.

19 साल की मालती की मदद में आगे आती है उसके पिता की मालकिन शिराज और उनकी वकील अर्चना (मधुरजीत सरघी). अर्चना, मालती का केस लड़ती है और उसे न्याय दिलाने के लिए मेहनत करती है. वहीं मालती की मुलाकात होती है अमोल से, जो अपनी पत्रकार की नौकरी छोड़कर एसिड अटैक सर्वाइवर्स के इलाज के लिए NGO चला रहा है. मालती और अमोल साथ काम करते हैं और प्यार में पड़ जाते हैं.

परफार्मेंस

पादुकोण ने इस फिल्म में कमाल कर दिखाया है. ये उनकी अभी तक की सबसे बेस्ट परफॉर्मेंस है, जिसे देखकर आपको बहुत कुछ महसूस होगा. मालती के किरदार में आपको दर्द, खुशी, हिम्मत सबकुछ देखने को मिलेगा. मालती पर अटैक होना, उसका पहली बार अपने आप को आईने में, अपनी लड़ाई लड़ना और छोटी-छोटी जीत पर खुश होना, दीपिका ने हर सीन में जान डाली है. हालांकि उनका एक स्कूल की लड़की बनना आपको थोड़ा सा खटकेगा. वहां वो थोड़ी सी वीक थीं.

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अपनी जगह जबरदस्त हैं. उनका किरदार में ढलना, डायलॉग्स और लुक बहुत बढ़िया है. दीपिका के साथ उनकी जोड़ी भी अच्छी जमी है. विक्रांत ने एक बार फिर से साबित किया है कि उन्हें इंडस्ट्री में और ज्यादा अच्छा काम मिलना दर्शकों के लिए जरूरी है. आपको विक्रांत से आराम से प्यार हो सकता है.

विक्रांत और दीपिका के अलावा फिल्म के बाकी एक्टर्स अंकित बिष्ट, मधुरजीत सरघी संग देवस दीक्षित और अन्य सपोर्टिंग एक्टर्स ने बढ़िया काम किया है. इसके अलावा असल जिंदगी की एसिड अटैक सर्वाइवर ऋतू, बाला, जीतू और कुंती, जो कि फिल्म की शीरो यानी हीरो हैं, का काम भी अच्छा है.

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डायरेक्शन

डायरेक्टर किसी भी बड़ी से बड़ी कहानी को आराम और सलीके से जनता के सामने परोसना जानती हैं. छपाक जैसी दर्दनाक कहानी को बहुत खूबसूरती से बड़े पर्दे पर उतारा है. फिल्म का डायरेक्शन बहुत उम्दा है. इसकी सिनेमेटोग्राफी, म्यूजिक, एडिटिंग और प्रोस्थेटिक्स बहुत कमाल है. गुलजार के लिखे लिरिक्स और अरिजीत सिंह की आवाज आपको अंदर तक कचोटती है.

ये फिल्म आपको बहुत सारी चीजें महसूस करवाती है, जिसमें डर सबसे बड़ा है. इसी के साथ ये आपकी आंखें खोलने का काम भी करती है कि कैसे एसिड अटैक जैसा घिनौना अपराध आज भी हो रहा है और कितनी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो रही है. छपाक को देखने के बाद आप अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाएंगे. तो आपको दीपिका पादुकोण की छपाक जरूर देखनी चाहिए!

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