निर्देशकः अनीस बज्मी
कलाकारः अक्षय कुमार, बॉबी देओल, इरफान, सुनील शेट्टी, सोनम कपूर, रिमी सेन, सेलीना जेटली
एक लिहाज से थैंक्यू को सुविधाजनक फिल्म कह सकते हैं. आप कहानी के किसी भी मोड़ पर देखने घुसें और कभी भी निकल आएं, मजमून आप समझ ही लेंगे.
यह शादीशुदा तीन मर्दों की ऐयाशी, आवारगी और फिल्म की ही शब्दावली लेकर कहें तो उनके 'कमीनेपन' का किस्सा है. बॉबी, शेट्टी और इरफान ऐसे किरदारों में हैं, जो (समुद्री) याट बेचने का धंधा करते हुए, बीवियों को धोखे में रख, मौज करते हैं. उनके लिए औरत यानी ऐश, जैसा कि अनीस बज्मी की दूसरी फिल्में भी बताती ही रही हैं.
बीवियों की करुण पुकार पर इन मर्दों के कमीनेपन का केंचुल उतारने बीच पर पहुंचता है एक लाउड, कर्कश अंडरकवर एजेंट किशन (अक्षय). थोड़ी बहुत सिचुएशंस को छोड़ दें तो किस्से में नया कुछ भी नहीं.
मल्लिका शेरावत के अवतार वाला गाना रजिया गुंडों में फंस गई, इस दौर के सबसे बासी/बेजान आइटम गानों में से है. समंदर, याट और दूसरे भव्य दृश्य आंखों को जंचते हैं पर दिमाग को 'तंग' नहीं करते. एक से किरदारों वाली सोनम कपूर, रिमी और सेलीना जेटली में से दो तो कामचलाऊ हैं पर सोनम अपने टूटे उच्चारण, बेमेल भाव और सूखे अभिनय से अपनी मौजूदगी कमजोर करती हैं.
अभिनेताओं में इरफान बातचीत नुमा चलताऊ संवादों को भी जज्ब करके जबान पर लाते और जान डालते हैं. हैरत नहीं कि दर्शकों के सबसे ज्यादा ठहाके उन्हीं के हिस्से में आते हैं.