दूरदर्शन के शो हम लोग को 36 साल पूरे हो गए हैं. हम लोग इंडियन टीवी पर टेलीकास्ट होने वाला पहला सोप-ओपेरा था. शो को पी कुमार वासुदेव ने डायरेक्ट किया था. मनोहर श्याम जोशी ने इसे लिखा था. इस शो को काफी पसंद किया गया था. शो के कैरेक्टर्स भी फेमस हुए थे.
हम लोग के कैरेक्टर नन्हे (अभिनव चतुर्वेदी) रियल लाइफ में एक क्रिकेटर, अभिनेता, निर्देशक, एंकर, एंटरटेनर हैं. इंडिया टुडे से ख़ास बात करते हुए अभिनव ने शो के बार में बताया- "100 वें एपिसोड में, ताज पैलेस में एक पार्टी हुई थी, जहां पहली बार मैंने शैंपेन पी थी.''
अभिनव को मिले प्रति एपिसोड 500 रुपये
शूटिंग के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा- "सुषमा जी और विनोद जी के लिए एक स्पेशल कार थी, बाकी हम मेटाडोर से यात्रा करते थे. पूरी शूटिंग गुड़गांव में हुई थी." अभिनव चतुर्वेदी को हर एपिसोड के लिए 500 रुपये मिले थे, उस समय दूरदर्शन के ए-ग्रेड कलाकारों की राशि से दोगुना. हम लोग में चतुर्वेदी ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा.
वरिष्ठ अभिनेता विनोद नागपाल, जिन्होंने नन्हे के शराबी पिता बसेरा राम का किरदार निभाया था. उन्होंने कहा- "वो एरा समाप्त हो गया है, नए जोनर ने जगह ले ली है. उम्मीद है कि यह भी मर जाएगा और कुछ और इसकी जगह लेगा. हमारे पास अच्छा टेलीविजन है, ये हाई टाइम है दूरदर्शन को अब ज्यादा खर्च करना चाहिए और अच्छा स्टफ बनाना चाहिए. ताकि उनके पास ये कहने के लिए हो कि क्या दिखाना है और क्या नहीं दिखाना है.
राजेश पुरी बसेरा राम के बड़े बेटे ( ललित प्रसाद उर्फ लल्लू) की भूमिका निभाई थी. उनका कहा है, "आज मैं बहुत उदासीन महसूस करता हूं. हम बहुत फेमस थे, जनता हमारे साथ राजाओं जैसा व्यवहार करती थी. राजेश ने बताया कि मेरठ और इंदौर में होने वाले कार्यक्रमों में भीड़ ने उन्हें घेर लिया था. उन्हें बचाने के लिए आर्मी को बुलाना पड़ा था.'' मालूम हो कि राजेश पुरी ने 200 नाटक किए हैं और लगभग 5000 परफॉर्मेंस दी हैं.
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टीआरपी की लड़ाई में कंटेंट का नुकसान हो रहा- सीमा
सीमा भार्गव जिन्होंने शो में लल्लू की बहन बड़की का किरदार निभाया. उन्होंने कहा- हम लोग 3 कैमरा सेटअप पर शूट करते थे और कोई टेक्निकल हेल्प और प्रॉपर एडिटिंग नहीं होती थी. लेकिन आज के दौर में एक्टर को स्ट्रॉन्ग टेक्निकल सपोर्ट मिलता है. हमारे समय में तो मुख्य फोकस राइटर और एक्टर्स पर होता था, कैसे व्यूअर्स की अटेंशन को बनाए रखा जाए, जो अब धुंधला हो रहा है. स्क्रिप्ट पकड़ना आज मुश्किल हो गया है. बहुत सारे टीवी चैनल्स और सीरीज टीआरपी के लिए लड़ रहे हैं. इस सब के बीच कंटेंट सफर कर रहा है.'
'हमारे समय में लोग दुकाने बंद करके सभी के साथ बैठकर साथ में एन्जॉय करते थे. लेकिन आज का सिनेरियो बदल चुका है. आज के समय में लोग मुझे सोशल वर्कर के रूप में पहचानते हैं, जो कि मैंने सीरीज में रोल प्ले किया था. लोग मेरे पास आते हैं और अपनी परेशानी मेरे साथ शेयर करते हैं. इस तरह की पहचान और प्रभाव आज के समय में गायब है. पहले काम इतना मजबूत होता था कि लोग आज तक याद रखते हैं उन कैरेक्टर्स को.'
मालूम हो कि 1983 में मैक्सिकन टीवी राइटर Miguel Sabido आकाशवाणी भवन (नई दिल्ली) में अपने मॉडल पर 5 दिन की वर्कशॉप प्रस्तुत करने के लिए भारत आए थे. तब उन्होंने सुझाव दिया था कि टेलीविजन सोप ओपेरा को हफ्ते में पांच बार प्रसारित करने की आवश्यकता है. Sabido ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात कर उन्हें अपने दृष्टिकोण को समझाया था.और आखिर में लेखक मनोहरलाल श्याम जोशी की मदद से, हम लोग की कहानी, चरित्र और मूल आधार बनाया गया था. लेकिन भारतीय अधिकारियों ने कहा था कि इस तरह के शो को केवल सप्ताह में एक बार प्रसारित करने के लिए पर्याप्त संसाधन थे, जिसे फॉलो किया गया.