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मनोरंजन

ये हैं देश के 25 'बालवीर'

ये हैं देश के 25 'बालवीर'
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हर साल की तरह इस बार भी देश के 25 जांबाज बच्चों को उनकी बहादुरी के लिए राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है. इन जांबाज बच्चों में दो ऐसे भी हैं, जिन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए हंसते-हंसते अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी और इन्हें मरणोपरांत यह सम्मान मिलेगा.



ये हैं देश के 25 'बालवीर'
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नागपुर जिले में रहने वाले 15 साल के गौरव ने 3 जून 2014 को अंबाझरी झील में चार दोस्तों को डूबते हुए देखा. अपनी ज़िंदगी की परवाह किए बगैर गौरव ने झील में छलांग लगा दी और चारों दोस्तों को बचा लिया. मगर वह खुद नहीं बच सका. सहस्त्रबुद्धे को ‘भारत पुरस्कार’ दिया जाएगा जो राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों में सर्वोच्च है.
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17 जून 2015 को शिवांश के पांच दोस्त सरयू नदी में नहा रहे थे. इनमें से एक दोस्त नदी की धारा में डूबने लगा. शिवांश उस तक पहुंच तो गया और किनारे तक भी ले आया लेकिन बदकिस्मती से दोनों डूब गए.
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16 जुलाई 2014 को अर्जुन सिंह की मां जानवरों को चारा डालने गई थीं. उसी दौरान एक टाइगर ने उन पर हमला कर दिया. मां की चीख सुनकर अर्जुन बाहर आया और दरांती से टाइगर पर टूट पड़ा. इस बार टाइगर ने उस पर भी हमला कर दिया. मगर, अर्जुन ने दूसरा वार किया और टाइगर भाग गया.
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हरियाणा में रहने वाले दिशांत के घर 4 अप्रैल 2015 को एक चोर घुस आया. उसने दिशांत की मां की गर्दन पर चाकू रख दिया. मां ने मदद के लिए गुहार लगाई तो दिशांत पहुंचा. उसने बड़ी होशियारी से चोर के पैर पकड़ लिए और मां को छोड़ने की अपील करते हुए उसे पकड़कर गिरा दिया.
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14 जून 2015 को खेलते हुए एक लड़के की बॉल कुएं में गिर गई है. वो बॉल लेने के चक्कर में कुएं में गिर गया. राकेशभाई ने उसकी आवाज सुनी तो मदद के लिए कुएं में छलांग लगा दी. कुछ देर की मशक्कत के बाद राकेश ने कुएं में गिरे लड़के को बचा लिया.
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प्रख्यात गीता चोपड़ा पुरस्कार तेलंगाना निवासी आठ वर्षीय शिवमपेट रूचिता को दिया जाएगा जिसने अपनी स्कूल बस के एक ट्रेन की चपेट में आने पर दो बच्चों की जान बचाने में अदम्य साहस का परिचय दिया था.
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से 24 जनवरी को पुरस्कार ग्रहण करने जा रहे 25 बहादुरों में वह सबसे छोटी है. यह हादसा 24 जुलाई को हुआ था जिसमें चालक और कंडक्टर के अलावा 16 छात्रों की मौत हो गई थी.
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रूचिता के मुताबिक रेलवे फाटक पार करने के दौरान जब बस पटरी पर रुक गई तब उसने अपनी छोटी बहन को आवाज दी जो पहली सीट पर बैठी हुई थी लेकिन वह उसकी और अन्य की जान नहीं बचा सकी क्योंकि तब तक ट्रेन ने बस को टक्कर मार दिया था.
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ये बच्चे 24 जनवरी को प्रधानमंत्री के हाथों से अपना पुरस्कार ग्रहण करेंगे और गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेंगे. इनका चयन एक उच्चाधिकार समिति ने किया है जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और एनजीओ के प्रतिनिधि बतौर सदस्य शामिल थे. बहादुरों को एक पदक, प्रमाणपत्र और नकद राशि दी जाएगी.
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राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार भारत में हर साल 26 जनवरी से पहले दिए जाते हैं.
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इस पुरस्कार की शुरुआत साल 1957 में भारतीय कल्याण परिषद ने की थी.
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पुरस्कार के रूप में एक पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि दी जाती है.
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पुरस्कार पाने वाले सभी बच्चों को स्कूल की पढ़ाई पूरी करने तक वित्तीय सहायता भी दी जाती है.
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26 जनवरी के दिन ये बहाददुर बच्चे हाथी पर सवारी करते हुए गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होते हैं.
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बहादुर बच्चों को पांच तरह के पुरस्कार दिए जाते हैं, इनमें भारत पुरस्कार, गीता चोपड़ा पुरस्कार, संजय चोपड़ा पुरस्कार, बापू गैधानी पुरस्कार और सामान्य राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार शामिल हैं.
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2 अक्टूबर, 1957 को 14 साल की उम्र में एक लड़के हरीश मेहरा ने अपनी जान की परवाह किए बगैर पंडित नेहरू और तमाम दूसरे गणमान्य नागरिकों को एक बड़े हादसे से बचाया था.
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उस दिन पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, जगजीवन राम रामलीला मैदान में चल रही रामलीला देख रहे थे कि अचानक उस शामियाने के ऊपर आग लग गई.
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  • 19/25
हरीश वहां वॉलेंटियर के तौर पर तैनात था. उसने तुंरत 20 फीट ऊंचे खंबे के सहारे चढ़ बिजली के तार को काटा.
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पंडित नेहरू हरीश के इस साहस से प्रभावित हुए और अखिला भारतीय स्तर पर ऐसे साहसी बच्चों को सम्मानित करने का फैसला लिया.
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  • 21/25
सबसे पहला पुरस्कार हरीश चंद्र मेहरा को उसकी बहादुरी के लिए दिया गया था.
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  • 22/25
इस साल राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 25 बहादुर बच्चों को दिए गए, इनमें तीन लड़कियां शामिल हैं.
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बहादुरी पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चे हैं- मौरीस येंगखोम और चोनगथम कुबेर मेइतेई (मणिपुर), एजेंलीसा सीनसोंग (मेघालय), साई कृष्ण अखिल किलांबी (तेलंगाना), जोएना चक्रवर्ती और सर्वानंद साहा (छत्तीसगढ़), बीधोवन, नितिन फिलिप मैथ्यू, अभिजीत केवी, अनंदू दिलीप, मोहम्मद शामंद, अरोमल एसएम (सभी केरल), मोहित महेन्द्र दाल्वी, नीलेश रेवाराम भील, वैभव रमेश घानगारे (सभी महाराष्ट्र), अबिनाश मिश्रा (ओड़िशा) और भीमसेन (उत्तर प्रदेश).
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  • 24/25
हर साल आईसीसीडब्ल्यू को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए स्थानीय और जिला सरकार, स्कूल प्रशासन, बाल कल्याण परिषद आदि से आवेदन मिलते हैं.
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पुरस्कार किन बच्चों को दिया जाना है इसके लिए आईसीसीडब्ल्यू (इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर) की ओर से एक समिति बनाई जाती है.
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