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Afghanistan Taliban Crisis तालिबान का कहर, दहशत में लोग, बुरे हालात को करीब से समझाती हैं ये फिल्में

अफगानिस्तान और तालिबान के हालात पर कई फिल्में बनी हैं. बॉलीवुड मेन स्ट्रीम में एस्केप फ्राम तालिबान और काबुल एक्सप्रेस जैसी फिल्में हैं जिन्होंने भारत के पड़ोस में चल रहे कई दशक पुराने संकट को करीब से समझाया है.

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जॉन अब्राहम और अरशद वारसी
जॉन अब्राहम और अरशद वारसी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा
  • अफगानिस्तान और तालिबान के हालात पर बनीं कई फिल्में
  • एस्केप फ्रॉम तालिबान में मनीषा ने निभाया लीड रोल

Afghanistan Taliban Crisis: अफगानिस्तान में एक बार फिर तालिबान रिटर्न्स हो गया है. 20 साल तक लड़ाई के बाद अमेरिकी सेना के वापस लौटते ही अफगानिस्तान में तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया. अफगानिस्तान और तालिबान के हालात पर हॉलीवुड में कई फिल्में बनी हैं. बॉलीवुड मेन स्ट्रीम में एस्केप फ्रॉम तालिबान और काबुल एक्सप्रेस जैसी फिल्में हैं जिन्होंने भारत के पड़ोस में चल रहे कई दशक पुराने संकट को करीब से समझाया है. 

काबुल एक्सप्रेस में तालिबान और संघर्ष की कहानी
जैसा कि नाम से साफ है कि फिल्म काबुल और वहां को लेकर है. कभी वॉर जर्नलिस्ट रहे मशहूर डायरेक्टर कबीर खान ने बड़ी ही नजाकत से इस फिल्म को बनाया है. तालिबान के भय और वहां के हालात को बयां करने के लिए कबीर खान ने फनी अंदाज का भी इस्तेमाल किया है. 

मूल कहानी यही रहती है कि दिल्ली से दो जर्नलिस्ट काबुल जाकर तालिबान के साथ इंटरव्यू करना चाहते हैं. इसी दौरान वहां उन्हें एक अमेरिकी जर्नलिस्ट भी मिलती है. फिल्म की कहानी दो भारतीय, एक अमेरिकी, एक अफगानी और एक पाकिस्तानी कैरेक्टर के आसपास घूमती है. ये कबीर खान की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी जिसे उन्होंने खुद ही लिखा था. 

फिल्म में जॉन अब्राहम और अरशद वारसी मुख्य भूमिकाओं में थे.

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एस्केप फ्रॉम तालिबान

इस फिल्म में मनीषा कोईराला लीड रोल में थी. फिल्म की कहानी में दिखाया गया कि एक भारतीय महिला एक अफगानी शख्स से शादी करती है. वो शादी के बाद इंडिया छोड़ पति के साथ अफगानिस्तान आ जाती है. लेकिन एक बार जब वो अफगानिस्तान आ जाती हैं तो वो वहां हावी होते तालिबान के शासन से भयभीत हो जाती है और अपनी बेटी के साथ इंडिया भाग कर आने की कोशिश करती है.
 

जीरो डार्क थर्टी- अफगानिस्तान-पाकिस्तान और ओसामा को खोजने की कहानी
अमेरिका ने कई साल अलकायदा के सरगना आतंकी ओसामा बिन लादेन को खोजा. आतंकवाद को खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना अफगानिस्तान आईं और लंबे समय तक सर्च ऑपरेशन किया. ओसामा को खोजने और आखिरकार उसे मार गिराए जाने की कहानी ही जीरो डार्क थर्टी है. इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान में अमेरिकी इंटेलिजेंस के काम करने के तरीके, उन पर खतरे आदि को दिखाया गया है. 

ओसामा की कहानी और अफगानिस्तान के हालात 
जब आपके देश में कुछ भी नॉर्मल ना हो तो वहां नॉर्मल जिंदगी की कल्पना कैसे मुश्किल होती है, इस फिल्म में यही कहानी है. ओसामा एक लड़की और उसके मां की कहानी है जहां उसे ओसोमा नाम से रहना पड़ता है. ऐसा वो क्यों करती है फिल्म में यही परत दर परत दिखाया जाएगा.  

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रेस्टरेपो
अमेरिकी जर्नलिस्ट सबैस्टियन जंगर और ब्रिटिश फोटोजर्नलिस्ट टिम हेथेरिंटन की ये फिल्म दरअसल एक वॉर डाक्युमेंट्री है. फिल्म में कहानी और फुटेज से ज्यादा इस अनुभव को दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे इन दो जर्नलिस्ट ने कैसे सालों अफगानिस्तान में बिताए. 

The Road to Guantanamo
ये कहानी एक ब्रिटिश पाकिस्तानी मुस्लिम की है जो एक शादी में शामिल होने के लिए पाकिस्तान जाने का फैसला करता है. यहां जब वह एक ग्रुप के साथ आता है तो वे मिलकर अफगानिसतान जाने की सोचते हैं. तालिबान और अमेरिकी मिलिट्री के बीच उन्हें कैसा अनुभव होता है फिल्म की कहानी इसी सब्जेक्ट के आसपास घूमती है. 

 

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