अगर मैं आपसे कहूं कि एक तरफ मुंबई की चकाचौंध वाली 'साउथ बॉम्बे' लाइफ है और दूसरी तरफ नालासोपारा की गलियों का देसी टैलेंट, तो शायद आप एक रेगुलर लव स्टोरी की उम्मीद करेंगे. लेकिन डायरेक्टर बिजॉय नाम्बियार ने इस लव स्टोरी में जो 'ट्विस्ट' डाला है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो. फिल्म 'तू या मैं' एक ऐसी ही अजीबोगरीब और रोंगटे खड़े कर देने वाली सर्वाइवल की कहानी है, जो शुरू तो 'कोलैब' से होती है पर खत्म एक गहरे खौफ पर होती है.
कैसी है फिल्म और इसकी स्टार कास्ट?
कहानी की जान हैं इसके दो लीड किरदार. नालासोपारा का उभरता हुआ रैपर और इन्फ्लुएंसर मारुति कदम (आदर्श गौरव), जिसे सब 'फ्लो' नाम से जानते हैं, जिसके सपनों में बड़ी उड़ान है. दूसरी तरफ है अवनी शाह यानी 'मिस वैनिटी' (शनाया कपूर), जिसकी सोशल मीडिया लाइफ और रईसी के लाखों दीवाने हैं. आदर्श गौरव ने एक बार फिर साबित किया है कि वो मिट्टी से जुड़े किरदारों को जीने में माहिर हैं. वहीं शनाया कपूर ने अपनी पहली बड़ी स्क्रीन अपीयरेंस में काफी कॉन्फिडेंस दिखाया है. इन दोनों की केमिस्ट्री फिल्म के पहले पार्ट को काफी लाइट बनाए रखती है. खास तौर पर फिल्म के शुरुआती रैप सॉन्ग्स कहानी की रफ्तार को टूटने नहीं देते बल्कि माहौल बनाते हैं. इसके अलावा फिल्म में पारुल गुलाटी, अंश विकास चोपड़ा, और अमृता खानविलकर ने अच्छा सपोर्ट दिया है.
गोवा के ट्रिप ने बदला माहौल
खैर, एक स्ट्रेटेजिक 'लव कोलाब' के तौर पर शुरू हुई फ्लो और मिस वैनिटी की स्टोरी जल्द ही सच्चे प्यार में बदल जाती है, जो उन्हें गोवा की एक इंपल्सिव एडवेंचर ट्रिप पर जाने के लिए मोटिवेट करती है. फिल्म में असली मोड़ यही आता है जब ये दोनों सुकून के पल बिताने गोवा निकलते हैं. इसके बाद आता है एक खूबसूरत लेकिन थोड़ा डरावना रिजॉर्ट और वहां का स्विमिंग पूल. यहां तक सब कुछ परफेक्ट था लेकिन तभी कहानी में एंट्री होती है एक खूंखार और बड़े से खूनी मगरमच्छ की. अब सवाल यह है कि एक रिजॉर्ट के बंद स्विमिंग पूल में इतना बड़ा मगरमच्छ आखिर आया कैसे? क्या यह महज एक हादसा है या किसी की सोची-समझी साजिश? यहीं से फिल्म एक सस्पेंस थ्रिलर का रूप ले लेती है. मगरमच्छ के सामने आने के बाद मिस वैनिटी और फ्लो की जिंदगी किस तरह बदलती है, वो देखने लायक है.
डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले
फिल्म का दूसरा पार्ट पूरी तरह से सर्वाइवल ड्रामा पर टिका है. हालांकि, डायरेक्शन की बात करें तो वहां खामियां साफ खटकती हैं. ढाई घंटे की ये फिल्म न सिर्फ थोड़ी खिंची हुई महसूस होती है बल्कि बोर भी करती है और कई जगहों पर तो लॉजिक को भी ताक पर रख दिया गया है. कुछ सीन ऐसे हैं जिन्हें देखकर आपके मन में सवाल आएगा कि 'ये कैसे पॉसिबल है?' अगर आप फिल्म में बहुत ज्यादा लॉजिक ढूंढने की कोशिश करेंगे, तो शायद निराश हों. 2 घंटे 30 मिनट की ये फिल्म आपके पेशेंस का पूरा टेस्ट लेगी. लेकिन अगर आप सिर्फ सस्पेंस और डर का मजा लेना चाहते हैं, तो फिल्म आपको बांधे रखने में सफल होगी.
फिल्म देखें या न देखें?
'तू या मैं' एक अलग तरह का सिनेमाई एक्सपीरियंस है. शनाया और आदर्श की एक्टिंग काफी अच्छी हैं. अगर आप थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं और कुछ अलग (मगरमच्छ वाला एंगल) देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए एक बार देखने लायक है. ये आपको कुर्सी से हिलने तो नहीं देगी, बस शर्त ये है कि आप लॉजिक की गहराई में न जाएं. आखिरी बात ये फिल्म यह सर्वाइवल ड्रामा 'तू या मैं' 2018 में रिलीज हुई थाई हॉरर फिल्म 'द पूल' से इंस्पायर्ड है.