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तांडव रिव्यू: जबरदस्त ट्विस्ट- शानदार परफॉरमेंस, फिर भी स्लो है सैफ की तांडव

सैफ अली खान की वेब सीरीज तांडव का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है. ये सीरीज अब अमेजन प्राइम पर आ चुकी है और हम बता रहे हैं आपको इसे देखना चाहिए या नहीं. अगर हां, तो क्या है तांडव में ऐसा खास. पढ़िए हमारा रिव्यू.

वेब सीरीज तांडव में सैफ अली खान, सुनील ग्रोवर, डिंपल कपाड़िया और अन्य वेब सीरीज तांडव में सैफ अली खान, सुनील ग्रोवर, डिंपल कपाड़िया और अन्य
फिल्म:तांडव
3/5
  • कलाकार : सैफ अली खान, डिंपल कपाड़िया, सुनील ग्रोवर, गौहर खान, तिग्मांशु धुलिया, कुमुद मिश्रा, अनूप सोनी, मोहम्मद जीशान अयूब
  • निर्देशक :अली अब्बास जफर

OTT प्लेटफॉर्म्स ने पॉलिटिकल ड्रामा को अपना सबसे बड़ा विषय चुना हुआ है और इसी से जुड़ी नई और दिलचस्प कहानियां कंटेंट क्रिएटर हमारे लिए लेकर आ रहे हैं. मिर्जापुर, पाताल लोक, इनसाइड एज और अन्य के बाद अब सैफ अली खान स्टारर शो तांडव रिलीज हो चुका है. जनता को इस शो को देखने का बेसब्री से इंतजार था. हालांकि अब जब ये सामने आ गया है तो बात कुछ और है. 

क्या है तांडव की कहानी?

तांडव कहानी है समर प्रताप सिंह (सैफ अली खान) नाम के एक शख्स की, जो प्रधानमंत्री का बेटा है और सत्ता अपने हाथ में पाने के लिए कुछ भी कर सकता है. समर चालाक है, भ्रष्ट है और खतरनाक भी. उसके साथ है गुरपाल (सुनील ग्रोवर), जो मालिक के लिए कुछ भी करने को तैयार है और शहर के सारे लोग उनकी मुट्ठी में हैं. गुरपाल निर्दयी है और उसे अपने किए से कभी बुरा भी नहीं लगता. वो किसी की भी जान ले सकता है और कुछ भी करना उसके लिए हद पार करना नहीं है. 

समर के पिता देवकीनंदन तीन टर्म्स से देश के प्रधानमंत्री रहे हैं और एक बार फिर चुनाव में जीतने वाले हैं. लेकिन प्रधानमंत्री की गद्दी हथियाने के लिए समर जाल बिछाता है. बात तब पलट जाती है जब समर अपने ही बिछाए जाल में फंसने लगता है. लेकिन वो अपनी पूरी कोशिश के साथ इससे उबरने में लगा है. 

हमने हमेशा से सुना है कि सत्ता का खेल, राजनीति सीधे लोगों की बात नहीं है. यहां आने के लिए इंसान में कुछ भी करने का दम होना चाहिए और यहां बने रहने के लिए उसका भ्रष्ट और निर्दयी होना जरूरी है. इसी सोच पर तांडव को बनाया गया है. लेखक गौरव सोलंकी और डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने इसी चीज को अपने शो का आधार बनाया है और कहानी को आगे लेकर चले हैं. 

ये कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती हैं, इतनी धीरे कि कभी-कभी आपका ध्यान भी भटक सकता है. इसलिए आपका धैर्य रखना बहुत जरूरी है क्योंकि शो में देखने के लिए बहुत कुछ है. ये शो बढ़िया है. इसकी कहानी आपको बहुत सी चीजों की याद दिलाती है फिर भी कुछ अलग है. हालांकि एक समय पर आपको ये भी लगता है कि आखिर है क्यों? इस शो का मतलब क्या है. 

शो में कैसी है एक्टर्स की परफॉरमेंस?

परफॉरमेंस की बात करें तो एक घायल शेर बने सैफ अली खान की दर्द भरी दहाड़ देखने लायक है. सैफ खुद इस बात को मान चुके हैं कि उन्हें डार्क किरदार निभाने में मजा आता है और ये सच बात है कि वह इसमें काम भी बेहतरीन करते हैं. तांडव में भी उनका काम देखने लायक है. सैफ के साथी बने सुनील ग्रोवर ने गुरपाल के किरदार को बेमिसाल तरीके से निभाया है. पूरी सीरीज में एक इंसान जो सबसे खतरनाक है और कब-क्या कर जाए और जिससे आपको सही में डर लगता है वो है सुनील ग्रोवर का गुरपाल. साथ ही गुरपाल, सुनील के लिए बड़ा करैक्टर चेंज भी है. 

डिम्पल कपाड़िया ने भी इस शो में बढ़िया काम किया है. उनके साथ तिग्मांशु धुलिया, अनूप सोनी, गौहर खान ने अपने किरदारों को अच्छे से निभाया है. कुमुद मिश्रा की एक्टिंग हमने जैसी देखी है, तांडव में उससे कुछ कम है. इन सभी के लिए अलावा जीशान अयूब अपने किरदार में जमे हैं. एक निडर और ईमानदार स्टूडेंट के रूप में जीशान ने कमाल किया है. इन सभी के अलावा और भी कई एक्टर्स इस शो में सपोर्टिंग कास्ट में हैं और सभी ने अपने-अपने किरदारों को अच्छे से निभाया है. 

डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने इस शो को बॉलीवुड के स्टाइल में बनाया है. ये सीरीज जबरदस्त ट्विस्ट और टर्न्स से भरी हुई है, बस आपको थोड़ा संयम रखने की जरूरत है. शुरूआती एपिसोड में भले ही आपको लगे कि आखिर ये क्या और क्यों हो रहा है, लेकिन बाद में चीजें एक दूसरे से जुड़ने लगती हैं और आप भी शो के साथ जुड़ जाते हैं. कुल-मिलाकर तांडव शो बढ़िया है. 


 

 

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