फिल्म रिव्यूः शराफत गई तेल लेने
एक्टरः जायद खान, रणविजय सिंह, टीना देसाई, अनुपम खेर
डायरेक्टरः गुरमीत सिंह
ड्यूरेशनः 1 घंटा 48 मिनट
रेटिंगः 2 स्टार
एक सिंपल सा बंदा है पृथ्वी खुराना. पेशे से आर्किटेक्ट. अपनी गर्लफ्रेंड से प्यार करता है और पाई पाई का हिसाब रखता है. उसका निकम्मा और हमेशा कंप्यूटर में घुसा रहने वाला 'पित्जा-पेप्सी टाइप' फ्लैटमेट है सैम. लाइफ घिसट रही है. लेकिन एक दिन सब बदल जाता है. पृथ्वी के अकाउंट में 100 करोड़ रुपये आ जाते हैं. ये रुपये उसे गुंडा नंबर एक दाऊद ने भेजे हैं.
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पृथ्वी दाऊद के चंगुल में फंस गया है. उसे इस गुंडे के बताए पते पर पैसे बैंक से निकाल भेजने होंगे. इस काम में बैंक का आदमी थडानी भी मिला हुआ है. पृथ्वी और सैम कमीशन के बदले इस जिम्मेदारी को पूरा करते रहते हैं. मगर तभी एक दिन कांड हो जाता है. टीवी पर दाऊद के मरने की खबर. और इसके बाद पृथ्वी की गर्लफ्रेंड पर हमला. जब राज खुलता है तो तमाम चेहरे सामने आते हैं. और आखिर में सभी भले लोग अपनी शराफत को तेल लेने भेज देते हैं. उनका संदेश है कि शरीफ आदमी को किसी का बुरा नहीं करना चाहिए. मगर यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई उनका बुरा न कर सके.
फिल्म की कहानी फर्स्ट हाफ में फ्रेश लगती है, मगर सेकंड हाफ में खिंचने लगती है. आखिर में सस्पेंस हटाने के नाम पर कूड़ा ज्यादा बगरा दिया जाता है. एक्टिंग की बात करें तो जायद खान को अरसे बाद पर्दे पर देखना शुरुआत में अच्छा लगा. एक्ट्रेस टीना देसाई के एक्सप्रेशन फ्लैट दिखे. बाकी सब भी पानी वाली चाय से ही हैं. इस फिल्म में भी 'ऊम्फ' के नाम पर कम और वह भी काले चमड़े के बने कपड़ों में विदेशी बाला नजर आती है. मगर फिल्म को कुछ खास फायदा नहीं पहुंचाती. गानों के नाम पर सेल्फियां हिट हो चुका है. बाकी सब भी ठीक ठाक हैं.
डायरेक्टर गुरमीत सिंह ने उपलब्ध संसाधन (पढ़ें एक्टर और कहानी) में ठीक काम किया है. एडिटिंग दुरुस्त है. फिल्म क्लाइमेक्स में ही कुछ ढीली होती है. ड्यूरेशन दुरुस्त है, इसलिए ज्यादा बोरियत नहीं होती.
अगर रहस्य, रोमांच, चुक्की भर एक्शन, रोमांस और कॉमेडी. ये सब एक ही फिल्म में थोड़ा-थोड़ा देखना चाहते हैं और चार साल बाद रिलीज हुई फिल्म के टाइम फ्रेम से ज्यादा दिक्कत नहीं, तो 'शराफत गई तेल लेने' एक एवरेज टाइम पास फिल्म के तौर पर आपका ऑप्शन हो सकती है.