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Film Review: जानें कैसी है फिल्‍म मिकी वायरस

एंकर मनीष पॉल की डेब्यू फिल्म मिकी वायरस के पॉपुलर हो चुके गाने प्यार चाइना का माल है की तर्ज पर कहा जाय तो ये फिल्म भी चाइनीज माल सी है. दिखने में आकर्षक, आधुनिक जबान से लबरेज, मगर आखिरी में टिकाऊ कहानी के अभाव में खराब होती.

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फिल्म मिकी वायरस
एक्टरः मनीष पॉल, एली अवराम, मनीष चौधरी, वरुण बडोला, पूजा गुप्ता, नितेश पांडे, राघव कक्कड़, विकेश कुमार
डायरेक्टर और राइटरः सौरभ वर्मा
ड्यूरेशनः 130 मिनट
पांच में से ढाई स्टार

एंकर मनीष पॉल की डेब्यू फिल्म मिकी वायरस के पॉपुलर हो चुके गाने प्यार चाइना का माल है की तर्ज पर कहूं तो ये फिल्म भी चाइनीज माल सी है. दिखने में आकर्षक, आधुनिक जबान से लबरेज, मगर आखिरी में टिकाऊ कहानी के अभाव में खराब होती. चले तो चांद तक, नहीं तो शाम तक वाला हाल यहां भी लागू होता है. फिल्म शुरू होती है, तो प्रॉमिसिंग लगती है. मगर हर डायलॉग को कंप्यूटर के टर्म्स से लबरेज करने और पंच मारने के फेर में ये ओवरस्मार्टनेस की शिकार हो जाती है.

क्लाइमेक्स में पब्लिक को चौंकाने के चक्कर में फिल्म घनचक्कर हो जाती है. इस फिल्म का ट्रेलर और टाइटल देखकर बार-बार विकी डोनर की याद आती थी. मगर विकी डोनर में डॉक्टर, चमन, दादी जैसे कई यादगार किरदार थे, वहीं यहां पर ये लिस्ट एक दो नामों पर ही सिमट जाती है, गाने याद नहीं रह पाते और कहानी जो सबसे बड़ी ताकत होती है किसी भी फिल्म की, वह भी मिस्ट्री और मजाक के मिक्स्चर को बनाने के फेर में भड़भड़ाहट नाम के वायरस की शिकार हो जाती है.

कहानी का हाल सुनिए अब. शहर दिल्ली में दो पहुंचे हुए विदेशी हैकरों की हत्या होती है. स्मार्ट एसीपी सिद्धांत और हरियाणवी-पंजाबी अंदाज वाले लल्लू टाइप इंस्पेक्टर देविंदर भल्ला केस की जांच में लगते हैं. उन्हें जरूरत है एक देसी हैकर लौंडे की, जो मिस्ट्री सॉल्व करने में मदद कर सके. नेहरू प्लेस के साइबर जंगल में उनकी निगाह टिकती है मिकी वायरस पर. ये लड़का काम से जी चुराता है, अपनी मम्मी की ग्रोसरी शॉप पर बोर होता है. मगर उसकी देह में शोर आता है, जब वह अपने हैकर दोस्तों के साथ होता है. इस गैंग में शामिल हैं, चटनी, फ्लॉपी और पैंचो. हैकिंग के केस में अटकने पर उन्हें ध्यान आता है प्रोफेसर का ज्ञान.

मिकी की हैकिंग की दुनिया में फेक पहचान कुंग फू चमेली के नाम से है. उसकी लाइफ में फूं फां होती है, जब चमेली जैसी एक स्मार्ट बाला से नजरें चार होती है. कामायनी नाम की इस युवती के प्यार में मिकी का सिस्टम बिजी हो जाता है, मगर फिर असल केस, बड़ी रकम का फेर और एक हैकिंग गैंग ब्रह्म की ऐसी कड़ियां जुड़ती हैं कि मिकी का एक-एक जोड़ हिल जाता है.

फिल्म के लीड रोल में मनीष पॉल की एक्टिंग औसत रही है. हंसाने में वह प्रायः सफल रहे हैं, मगर कभी कभी ज्यादा के जोर में फिल्म हत्थे से उखड़ जाती है. कामायनी के रोल में इन दिनों बिग बॉस के घर की शोभा बढ़ा रही एली अवराम हैं. उन्हें कतई एक्टिंग नहीं आती और डायरेक्टर शायद उनके उजले रंग और विदेशी मूल के फैक्टर के सहारे ही रह गए. अच्छी एक्टिंग की बात करें तो इंस्पेक्टर भल्ला के रोल में वरुण बडोला ने कमाल की एक्टिंग की है. टीवी का यह चहेता स्टार फिल्मों में और नजर आए, यही कामना है. एसीपी सिद्धांत के रोल में मनीष चौधरी हैं. उन्हें आप अक्सर टीवी सीरियल और कमर्शल ऐड में देखते हैं. यहां उन्होंने अपने रोल की सख्ती और सोच को बखूबी उभारा है. इसके अलावा चटनी के टॉम बॉय टाइप रोल में पूजा गुप्ता भी चटपटी लगती हैं.

फिल्म के डायलॉग कॉमेडी सर्कस की स्क्रिप्ट से उड़ाए लगते हैं. मसलन, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं मिस. म्यूचुअल फंड आर सब्जेक्ट टु मार्केट रिस्क. गानों में बस प्यार चाइना का माल है याद रह जाता है. गानों से ज्यादा एक्टरों के फोन की कॉलर टोन मजेदार लगती हैं. कॉमेडी से मिस्ट्री के ट्रैक पर आते ही फिल्म उलझ जाती है और डायरेक्टर सौरभ वर्मा फिल्म पर अपनी पकड़ खोने लगते हैं.

मिकी वायरस देखिए अगर हैकरों की दुनिया को देखने का इरादा है. दिल्ली की और आज की व्हाट्स एप एज के नौजवानों की मजेदार मॉर्डन तुकबंदी पसंद है और मिस्ट्री में ये तुक्केबाजी लगाने का शौक है कि मुझे अमुक अमुक पर शक है और देखना आखिरी में यही लोग गुनहगार निकलेंगे. फिल्म की थीम नई है, मगर उसका ट्रीटमेंट गड़बड़ा गया. चाइनीज माल की तरह...

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