रेटिंगः 2.5 स्टार
कलाकारः अनिल कपूर, फरहान अख्तर, प्रियंका चोपड़ा, अनुष्का शर्मा, रणवीर सिंह और शेफाली शाह
डायरेक्टरः जोया अख्तर
फरहान अख्तर और जोया अख्तर दोनों ऐसे नाम हैं जो कुछ खास तरह की फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. जोया के डायरेक्शन वाली 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' मजेदार फिल्म थी. जिसमें कहानी के साथ हसीन नजारे भी थे, और दिलकश सितारे भी थे. लेकिन जोया की 'दिल धड़कने दो' इस मामले में कमजोर फिल्म है. इसमें नजारे हैं. बड़े सितारे भी हैं, लेकिन कहानी नाम की चीज मिसिंग है. इसमें कोई दो राय नहीं कि क्रूज पर फिल्म आधारित होने की वजह से नजारे बेहतरीन दिखते हैं. वैसे भी जोया का डायरेक्शन बहुत अच्छा है, लेकिन कहानी कमजोर होने की वजह से नजारे देख-देखकर भी लगभग 2 घंटे 50 मिनट बाद उत्साह दम तोड़ने लगता है. संवाद मजेदार है, लेकिन सारी मेहनत पर कमजोर कहानी पानी फेर देती है. पूरी फिल्म में फील टेलीविजन सीरियल वाली ही रहती है यानी कहानी घर-घर की.
कहानी में कितना दम
अनिल कपूर एक रईस हैं और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं. समस्याओं को हल करने के लिए वे अपनी शादी की 30वीं सालगिरह क्रूज पर मनाने का फैसला करते हैं. रणवीर और प्रियंका उनके बच्चे हैं. दोनों के जीवन की अपनी-अपनी समस्याएं हैं. किसी का वैवाहिक जीवन सही नहीं है तो किसी की अपनी आकांक्षाएं हैं. फरहान प्रियंका के पूर्व प्रेमी हैं. अनुष्का डांसर के किरदार में हैं. क्रूज का सफर मेहरा परिवार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा है. कई तरह के ड्रामे हैं. रिश्तों की जटिलताएं हैं. कहानी बहुत ही औसत है. पटकथा के मामले में सबकुछ बहुत अनगढ़-सा लगता है.
स्टार अपील
फिल्म में सितारों का ढेर है. प्रियंका चोपड़ा ने हर बार की तरह इस बार भी अच्छी ऐक्टिंग की है. अनिल कपूर झकास रहे हैं, और अपने रोल में जमते हैं. शेफाली शाह कमाल हैं जबकि रणवीर अभी तक कहीं न कहीं अपनी ओवरडोज दे ही जाते हैं. अनुष्का शर्मा तो इस बार भी असर डालती नहीं लगती हैं, और उनका रोल बिल्कुल भी याद नहीं रहता. फरहान अख्तर छोटे से रोल में हैं, लेकिन उनकी अदाकारी अच्छी है. राहुल बोस भी प्रियंका चोपड़ा के पति के किरदार में जमे हैं. बाकी सब भी ठीक हैं.
कमाई की बात
'दिल धड़कने दो' को बड़ी बजट की फिल्म बताया जाता है. ऐसे में इसको पहले वीकेंड पर मोटी कमाई करनी होगी. लेकिन कहानी और फिल्म का ट्रीटमेंट सिंगल स्क्रीन थिएटर के माफिक कम ही नजर आता है. फिल्म का म्यूजिक भी बहुत ढीला है, और कई बार तो ऐसा लगता है कि फिल्म की पूरी कहानी जैसे यूरोप के सुदंर नजारों को दिखाने के लिए ही लिखी गई है. कहानी के ट्रीटमेंट की वजह से यह एक अलग ही क्लास के लिए बन गई है. फिल्म की लंबाई भी थका देने वाली है. फिल्म में ऐसे स्टार भी नहीं हैं जिन्हें तगड़ी ओपनिंग मिले. फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी.