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औरंगजेबः डायनामाइट परफॉर्मेंसेस की कहानी

इशकजादे के बाद प्रोड्यूसर बोनी कपूर के बेटे अर्जुन कपूर की यशराज फिल्म्स के साथ औरंगजेब दूसरी फिल्म है. फिल्म में ऋषि कपूर और जैकी श्रॉफ जैसे दिग्गज भी हैं. आइए जानते हैं फिल्म में क्या है खास और कहां हुई चूक.

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aurangzeb
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फिल्म: औरंगजेब
डायरेक्टर: अतुल सभरवाल
कलाकार: अर्जुन कपूर, साशा आगा, ऋषि कपूर, जैकी श्रॉफ, अमृता सिंह और पृथ्वीराज
बजट: 25 करोड़ रु.

अर्जुन कपूर ने इशकजादे के अपने अंदाज को ही औरंगजेब में आगे बढ़ाया है. शायद युवा पीढ़ी के वे एकमात्र ऐसे ऐक्टर हैं जो खुद को चॉकलेटी बॉय के किरदार में न बांधकर कुछ सॉलिड करने में यकीन कर रहे हैं. उनकी ताजा फिल्म औरंगजेब इसी और इशारा करती है. अर्जुन की यह फिल्म कई मायनों में पहली है, जैसे लंबे समय बाद स्क्रीन पर डबल रोल में कोई ऐक्टर नजर आ रहा है. ऋषि कपूर पुलिस वाले बने हैं और गुड़गांव के रियल एस्टेट माफिया को लेकर कोई कहानी सामने आई है. बेशक फिल्म जबरदस्त तरीके से आगे बढ़ती है लेकिन हमेशा की तरह फिल्म अपने दूसरे पड़ाव में जाकर कुछ कमजोर पड़ जाती है. बॉलीवुड के डायरेक्टरों को अपनी फिल्म को लंबे समय तक बॉक्स ऑफ ऑफिस पर दौड़ाने के लिए बेहतर ऐंड और सेकंड हाफ का ईंधन चाहिए होगा. ऐसे दौर में जब कॉमेडी और हल्के-फुल्के मिजाज की फिल्में आ रही हैं, औरंगजेब अलग तरह की उम्मीद जगाती है.

कहानी में कितना दम
फिल्म गुड़गांव के दो परिवारों की हैं. यशवर्धन (जैकी श्रॉफ) रियल एस्टेट के बड़े खिलाड़ी हैं और गैर कानूनी गतिविधियों में लगे हुए हैं. पुलिस यशवर्धन तक पहुंचने के लिए उसके बेटे अजय (अर्जुन कपूर) को निशाना बनाती है और उसके हमशक्ल विशाल को उसकी जगह भेज देती है. एक तरफ जैकी श्रॉफ का परिवार है तो दूसरी ओर रविकांत (ऋषि कपूर) की पुलिसिया फैमिली है. पूरा ड्रामा इसी के चारों ओर बुना हुआ है. कहानी स्पीड के साथ चलती है. लेकिन फर्स्ट हाफ के बाद कहानी का ताना-बाना डायरेक्टर के हाथों से निकलता नजर आता है. अंत भी थोड़ा तंग करता है. कहानी कहीं-कहीं उलझी हुई भी लगती है. डायलॉग अच्छे हैं लेकिन सलीम-जावेद को समर्पित होने की वजह से कहीं-कहीं ठूंसे हुए से भी लगते हैं. रिसर्च अच्छी है, लेकिन ट्रीटमेंट थोड़ा कमजोर.

स्टार अपील
अर्जुन कपूर छा गए हैं. उन्हें देखकर लगता ही नहीं है कि यह उनकी दूसरी फिल्म है. एक नए सितारे का इस तरह इंटेंस रोल करना काबिलेतारीफ है. ऋषि कपूर तो बढ़ती उम्र के साथ कमाल होते जा रहे हैं. अग्निपथ में रौफ लाला, चश्मेबद्दूर में 50 साल के बैचलर और अब एक पुलिस ऑफिसर, जबरदस्त है. पृथ्वीराज को सरप्राइज पैकेज कहा जा सकता है. साशा आगा का काम फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाने का है. इसके अलावा फिल्म में गुजरे जमाने के कई सितारे जैसे जैकी श्रॉफ, अमृता सिंह और दीप्ति नवल ने भी अच्छा काम किया है. लेकिन अर्जुन-ऋषि-पृथ्वीराज की तिकड़ी कमाल है.

किस्सा कमाई का
फिल्म मीडियम बजट है. फिल्म की पब्लिसिटी इस तरह से की गई है कि इसे लेकर दर्शकों में काफी क्रेज है. लेकिन हिंदी फिल्मों के साथ पेश आने वाली समस्या इसके साथ भी है. सेकंड हाफ जायका बिगाड़ता है. कुल मिलाकर औरंगजेब एक बार जरूर देखने लायक थ्रिलर है क्योंकि नए दौर में अर्जुन जैसे सितारे बहुत कम हैं जो रिस्क लेकर चलते हैं. कुल मिलाकर फिल्म औसत ही है.

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